श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक महत्व, संदेश और मनाने का तरीका

सिख धर्म सिर्फ एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है और इस मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है श्री गुरु ग्रंथ साहिब, जो सिखों के 11वें और शाश्वत गुरु हैं। यह कोई साधारण धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि 10 सिख गुरुओं और विभिन्न धर्मों के संतों की शिक्षाओं का एक अनमोल संग्रह है, जिसमें मानवता, समानता और प्रेम का संदेश निहित है। हर साल, इस पवित्र ग्रंथ के पहले 'प्रकाश' को 'पहला प्रकाश पर्व' के रूप में मनाया जाता है, जो हमें गुरुओं की अनमोल वाणी और उनके सिद्धांतों को याद दिलाता है।
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  • पहला प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक महत्व

साल 1604 में गुरु अर्जन देव जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रथम प्रकाश हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) अमृतसर में करवाया। इसमें केवल सिख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संत कबीर, संत रैदास, नामदेव और कई अन्य संतों की वाणी भी संकलित है। यह ग्रंथ भाईचारे, समानता और प्रेम का अद्वितीय संदेश देता है।

  • श्री गुरु ग्रंथ साहिब का महत्व

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में लिखे गए शब्दों को 'गुरुबानी' कहा जाता है, जिसका अर्थ है "गुरु के मुख से निकली हुई वाणी।" यह ग्रंथ मानवता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है।


एक ईश्वर: गुरु ग्रंथ साहिब की शुरुआत "इक ओंकार" (ईश्वर एक है) से होती है। यह हमें सिखाता है कि सभी मानव एक ही परमपिता परमेश्वर की संतान हैं।

कर्म की महत्ता: यह ग्रंथ कर्म पर जोर देता है और हमें ईमानदारी, सेवा और परोपकार का मार्ग दिखाता है।