NEET Success Story: 5 साल की तैयारी और फिर सब खत्म... नीट छोड़ने से पहले पढ़ें बिहार के प्रणव की कहानी

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NEET Success Story : 'बहुत सारे नीट एस्पिरेंट्स ने फिर से मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम देने की तैयारी शुरू कर दी होगी। कुछ नीट एग्जाम छोड़ने के बारे में भी सोच रहे होंगे। अगर आप नीट एग्जाम छोड़ने की सोच रहे हो तो धैर्य रखो, वक्त दो, एक कोशिश और करो।' यह कहना है बिहार के रहने वाले प्रणव का है, जिनकी सक्सेस स्टोरी छोटे शहरों से निकलकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे युवा नीट एस्पिरेंट्स के लिए मिसाल से कम नहीं है।
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घर-घर जाकर कूरियर बांटते थे पिताप्रणव बिहार के पुर्णिया के साधारण परिवार से आते हैं। प्रणव ने जब नीट एग्जाम देने का फैसला किया। उस समय उनके पिता कूरियर बॉय का काम करते थे। वे घर-घर जाकर कूरियर बांटते थे। इस काम में न ज्यादा सैलरी थी और न ही ज्यादा सम्मान था। फिर भी उनके पिता ने संघर्ष किया। प्रणव की मां एक टीचर हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।

आर्थिक तंगी में भी मां-बाप ने टॉप स्कूल में पढ़ायामाता-पिता दोनों की तनख्वाह किसी तरह घर का खर्च चलता था। फिर भी उनके पेरेंट्स ने कभी भी पैसों किल्लत को बेटे की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। चाहे गांव हो या शहर, प्रणव की पढ़ाई वहां के टॉप स्कूल में ही हुई। पैसे बचा-बचाकर स्कूल फीस भरी जाती थी। प्रणव ने 12वीं पास करने के बाद डॉक्टर बनने का सपना देखा था। हालांकि उनसे ज्यादा उनकी मां के लिए बड़ा सपना था, जिसके बारे में उन्होंने बहुत दिन बाद पता चला।

'नीट में नहीं हो पाएगा, कुछ और ट्राई करो'4 जून 2018, नीट यूजी का रिजल्ट जारी हुआ और प्रणव अच्छा स्कोर नहीं ला पाए। प्रणव ने जोश टॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि वे स्कूल के दिनों में होनहार स्टूडेंट्स नहीं थे। उनके रिश्तेदारों के बच्चे पढ़ाई में अच्छे थे। लेकिन वे भी नीट नहीं निकाल पाए थे। तब कई लोगों ने उन्हें कुछ और करने की सलाह दी। लोग बोलते थे कि नीट में नहीं हो पाएगा
, छोड़ दो, इसके बजाय कुछ और ट्राई कर लो। फिर भी प्रणव ने हिम्मत नहीं हारी।

डॉक्टर बनना चाहती थी मां नीट में असफल होने के बाद, तब मां उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम थी। उनका कहना था, ट्राई करो, कैसे नहीं होगा, जरूर होगा। एक शाम जब वे अपनी के साथ बैठे थे तब बातों-बातों में पता चला कि उनकी मां का सपना डॉक्टर बनने का था। मां ने गाइड किया, फोकस करने में मदद की और नीट की प्रिपरेशन फिर से ट्रैक पर आने लगी।

नीट में लगातार पांच बार असफललगातार पांच बार असफलता के बाद प्रणव ने नीट छोड़ दिया था। 2019 में 466 स्कोर 6300 AIR, साल 2020 में 530 स्कोर आया। परिवार ने पूरा सपोर्ट किया। 2021 में पहली बार नीट में सेक्शन A और B लाया गया था। कन्फ्यूजन और कठिन परीक्षा के चलते एग्जाम रूम में ही हार मान ली थी। डर ने मनोबल तोड़ दिया था। ऑफलाइन टेस्ट भी अटेंप्ट नहीं किए थे।

साल 2022 की तैयारी के लिए एक कोचिंग इंस्टीट्यूट ने फीस में छूट दी। लेकिन कोविड आ गया। कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हो गए थे। नीट एग्जाम की डेट पोस्टपोन हुई, जिससे तैयारी प्रभावित हुई। ऑनलाइन गेमिंग का चस्का लग गया और अगस्त 2022 में एग्जाम दिया तो स्कोर 557 और 44179 रैंक आई।

नीट छोड़ दिया थाअब हिम्मत जवाब दे रही थी। नीट छोड़ दिया था। BMS में एडमिशन ले लिया। फिर दोस्तों ने हौसला बढ़ाया। अपनी कमियों को पहचानने की कोशिश की। कहां गलतियां हो रही हैं? क्या करना चाहिए? क्या आगे कर पाऊंगा या नहीं? आदि सोचा। कॉलेज के दिनों में नीट की तैयारी की। मॉक टेस्ट अटेंप्ट किए। 2 महीने में 40-50 पेपर लगाए। एक गलती अलग कॉपी बनाई थी जिन्हें रेगुलर एनालाइज किया। NCERT बुक्स को पढ़ा। नीट एग्जाम रूम में जाने से पहले पसीने छूट जाते थे। बहुत ज्यादा पेनिक हो जाता था। इस बार सोच लिया था कि डरना नहीं है। पेपर को ठीक से पढ़ा और 1 घंटा 10 मिनट में पेपर कर लिया सिर्फ फिजिक्स सेक्शन ए बचा था और अंदाजा हो गया था कि इस बार कोई नहीं रोक सकता।

नीट एस्पिरेंट्स को सलाहनीट 2023 में अच्छे स्कोर के चलते प्रणव का एडमिशन सरकारी मेडिकल कॉलेज में हो गया था। प्रणव कहते हैं कि वो 5 असफलताएं बेकार नहीं गईं। उनसे बहुत कुछ सीखा है। अब जीवन में जो भी परीक्षा आए उनका आसानी से सामना कर लूंगा। नीट एस्पिरेंट्स को प्रणव की सलाह है कि अगर प्रिपरेशन अच्छी और एग्जाम में कम स्कोर का डर है तो सोचें कि गलती कहां हो रही है। उसे लिखें और उस पर काम करें। यकीन मानिए, अगला नीट आपका होगा।