Indian History: अकाल पड़ा तो वीरान हो गया शहर, आज अपने इतिहास-एजुकेशन और नेचर के लिए मशहूर

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Ancient India Amravati History in Hindi : भारत के इतिहास में कई ऐसे शहर हैं, जिनकी पहचान अलग-अलग है। महाराष्ट्र का अमरावती भी उनमें से एक है और इसकी पहचान उन घटनाओं से बनी है जो सदियों बाद भी हैरान करती हैं। 14वीं सदी में इस शहर में पड़े भयंकर अकाल ने आबादी को बिखेर दिया और लोग दूसरे दूसरे शहरों में चले गए थे। कई साल बाद जब वे वापस लौटे तो शहर पहले जैसा आबाद नहीं था।

यही वजह है कि अमरावती का इतिहास प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए जीके के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। आइए जानें कैसे 900 साल से ज्यादा पुराने ऐतिहासिक प्रमाणों वाला यह शहर अपने अतीत के बारे में क्या बताता है।
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900 साल से ज्यादा पुराना है अमरावती का इतिहासअमरवाती के इतिहास को समझने के लिए सबसे पहले इसके पुराने नाम को जानना जरूरी है। अमरावती जिला प्रशासन की ऑफिशियल वेबसाइट amravati.gov.in पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर का प्राचीन नाम उदुंबरावती था। इसे उंबरावती बताया गया है और बाद में यह अमरावती के नाम से जाना गया।

इसके इतिहास को देखा जाए तो अमरावती के अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण प्रमाण 1097 ईस्वी के शिलालेख को बताया गया है। यह शिलालेख भगवान आदिनाथ यानी ऋषभनाथ की संगमरमर की प्रतिमा के आधार पर है।

14वीं सदी में आया अकाल तो शहर छोड़कर चले गए लोगअमरावती के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 14वीं सदी में यहां अकाल यानी सूखे की स्थिति पैदा हुई थी। कई साल तक मानसून फेल हुआ था और बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो गईं। इसका असर इतना गंभीर था कि अमरावती के लोगों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया था। लोग गुजरात और मालवा की ओर चले गए थे। यह तथ्य अमरावती के इतिहास को सिर्फ राजवंशों और शासकों की कहानी से अलग बनाता है क्योंकि यहां प्राकृतिक आपदा के कारण हुए लोगों के पलायन भी हुआ था।

पहले कम हो गई थी आबादी, फिर वापस लौटे लोगअकाल के दौरान लोग अमरावती छोड़कर गुजरात और मालवा गए थे। इसके बाद कई साल बाद धीरे-धीरे स्थानीय लोग वापस लौटे लेकिन उनके लौटने के समय अमरावती की आबादी कम हो चुकी थी। इस तरह अकाल ने शहर की जनसंख्या और उसके सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। यही कारण है कि इस घटना को अमरावती के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल किया जा सकता है।

अकाल और पलायन के बाद बदली अमरावती की तस्वीरअमरावती की कहानी अकाल और पलायन पर खत्म नहीं होती। बाद के दौर में शहर को फिर से विकसित होने का अवसर मिला। 1722 में छत्रपति शाहू महाराज ने अमरावती और बडनेरा को राणोजी भोसले को सौंपा।

  • उस समय अमरावती को ‘भोसले की अमरावती’ के नाम से भी जाना जाता था।
  • राणोजी भोसले के समय शहर का दोबारा निर्माण हुआ और अमरावती फिर समृद्ध होने लगी।
  • जिस शहर की आबादी एक समय अकाल के बाद कम हो गई थी, उसने आगे चलकर दोबारा आर्थिक और शहरी विकास की राह पकड़ी।
  • अमरावती के दोबारा विकसित होने में व्यापार की भी बड़ी भूमिका रही।
18वीं सदी के अंत तक व्यापार के विकास के साथ अमरावती तेजी से बढ़ने लगी और क्षेत्र के कस्बों में शामिल हो गई। आगे चलकर शहर में ब्रिटिश दौर के दौरान कई महत्वपूर्ण संस्थागत और बुनियादी ढांचे का विकास हुआ। 1859 में रेलवे स्टेशन के निर्माण और 1860 में कमिश्नर बंगले सहित कई सरकारी इमारतों का निर्माण कराया गया।

पश्चिमी विदर्भ में उच्च शिक्षा का केंद्र है अमरावतीशिक्षा के क्षेत्र में भी अमरावती की महत्वपूर्ण पहचान है। संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, पश्चिमी विदर्भ में उच्च शिक्षा का केंद्र बताती है। विश्वविद्यालय अमरावती, अकोला, बुलढाणा, यवतमाल और वाशिम सहित 5 जिलों की शैक्षणिक जरूरतें पूरी करता है और 382 संबद्ध कॉलेजों से जुड़ा है।

प्रकृति और पर्यटन से भी जुड़ी है पहचानप्रकृति और पर्यटन के दृष्टिकोण से अमरावती की पहचान मेलघाट और चिखलदरा से जुड़ी है। जिला प्रशासन के अनुसार, मेलघाट टाइगर रिजर्व सतपुड़ा की गविलगढ़ पहाड़ियों में स्थित है और राज्य का प्रमुख जैव विविधता क्षेत्र है। चिखलदरा करीब 1100 मीटर ऊंचे पठार पर स्थित है और मेलघाट का महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार है।

GK में क्यों महत्वपूर्ण है अमरावती का इतिहास?अमरावती की कहानी प्राचीन भारत के इतिहास की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण है। एक तरफ 1097 ईस्वी का शिलालेख शहर के प्राचीन अस्तित्व का प्रमाण देता है तो दूसरी ओर 14वीं सदी का अकाल बताता है कि प्राकृतिक आपदा किस तरह आबादी को प्रभावित कर सकती है।

इसके बाद गुजरात और मालवा की ओर लोगों का पलायन और फिर कई साल बाद उनकी वापसी इतिहास में पलायन का उदाहरण बताती है। आगे राणोजी भोसले के समय पुनर्निर्माण और व्यापार के बढ़ने से यह भी समझ आता है कि कोई शहर संकट के बाद फिर से आर्थिक केंद्र कैसे बन सकता है।