US Admissions Decline: अमेरिका में पढ़ने का कम हो रहा क्रेज, 20% घटा एडमिशन, ट्रंप की ये नीतियां बनी वजह

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US Admission Decline: हायर एजुकेशन के लिए सबसे ज्यादा पॉपुलर देशों की जब भी बात होती है, तो उसमें अमेरिका का नाम जरूर लिया जाता है। इस देश में लाखों की संख्या में विदेशी छात्र पढ़ने आते हैं। हालांकि, अब अमेरिका धीरे-धीरे अपनी चमक खो रहा है, क्योंकि स्टूडेंट्स के बीच इस देश में पढ़ने का क्रेज घटता जा रहा है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में विदेशी छात्रों के घटते एडमिशन के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां हैं।
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इंटरनेशनल एजुकेशन ऑर्गेनाइजेशन NAFSA सहित कई एजुकेशन ग्रुप्स ने एक स्टडी की है। इसमें बताया गया है कि अमेरिकी कॉलेजों में विदेशी छात्रों के एडमिशन में इस स्प्रिंग इनटेक में पिछले साल की तुलना में औसतन 20% की गिरावट आई है। 149 अमेरिकी कॉलेजों के सर्वे पर आधारित ये आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप सरकार के तहत सख्त वीजा नियमों और नीतिगत परिवर्तनों की वजह से विदेशी छात्रों की संख्या घटी है। पिछले एक साल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कई सारे ऐसे फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ना मुश्किल हो गया है।

अमेरिकी कॉलेजों ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, 62% कॉलेज ऐसे हैं, जिनका कहना है कि 2025 के स्प्रिंग इनटेक की तुलना में इस साल उनके यहां बैचलर्स और मास्टर्स दोनों ही स्तर पर कम एडमिशन हुए हैं। अमेरिकी संस्थान स्प्रिंग इनटेक को इसलिए महत्व दे रहे हैं, क्योंकि इसी में सबसे ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। विदेशी छात्र कॉलेज-यूनिवर्सिटी की होने वाली कमाई का बड़ा जरिया हैं, क्योंकि वे ज्यादा ट्यूशन फीस देते हैं। अगर उनकी संख्या घटी तो कॉलेजों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। 84% कॉलेजों का कहना है कि विदेशी छात्रों की कम संख्या के पीछे सरकार की नीतियां हैं।

ट्रंप सरकार के जरिए छात्रों के खिलाफ लिए गए 5 बड़े फैसले
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही विदेशी छात्रों को लेकर ऐसे-ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर उन पर पर हुआ है। भले ही ये फैसले पिछले साल लिए गए थे, लेकिन अब उनका असर दिखना शुरू हो गया है। आइए ऐसे ही 5 बड़े फैसलों के बारे में जानते हैं।

  • H-1B वीजा नियम: विदेशी छात्रों को उम्मीद रहती थी कि उन्हें ग्रेजुएशन के बाद आसानी से H-1B वर्क वीजा मिल जाएगा। लेकिन अब लॉटरी खत्म हो चुकी है और सेलेक्शन ज्यादा सैलरी पर आधारित है। छात्रों को एंट्री-लेवल पदों पर कम सैलरी दी जाती है, जिस वजह से उनके लिए वीजा पाना मुश्किल हो गया है।
  • OPT और STEM-OPT पर अनिश्चितता: 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) और STEM-OPT पर जॉब करना मुश्किल हो गया है, क्योंकि ट्रंप सरकार ने संकेत दिए हैं कि इसे खत्म किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद अपने देश लौटने पर मजबूर होना पड़ेगा।
  • 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' खत्म करने का प्रस्ताव: ट्रंप सरकार ने कुछ वक्त पहले एक प्रस्ताव पेश किया था जिसके तहत छात्रों को मिलने वाले 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) को खत्म करने की बात कही गई थी। अगर ऐसा होगा, तो फिर छात्रों को एक निश्चित अवधि के लिए वीजा मिलेगा। अगर उस अवधि में कोर्स खत्म नहीं हुआ तो फिर एक्सटेंशन लेना होगा।
  • वीजा आवेदन की फीस और जांच कड़ी करना: ट्रंप सरकार ने F-1 स्टूडेंट वीजा के लिए फीस बढ़ा दी है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि अब वीजा देने से पहले आवेदकों के सोशल मीडिया चेक किए जा रहे हैं। अगर कुछ भी गड़बड़ी पाई जा रही है, तो फिर इसे आधार बनाकर वीजा रिजेक्ट किया जा रहा है।

कुल मिलाकर अमेरिकी कॉलेजों में एडमिशन का कम होना चिंता की बात है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये संस्थान विदेशी छात्रों के भरोसे ही चल रहे हैं। ट्रंप सरकार अगर वीजा नियमों समेत इमिग्रेशन से जुड़े फैसलों को कड़ा करती जाती है, तो इसका सीधा असर अमेरिका की प्रतिष्ठा पर पड़ेगा। अमेरिका में विदेशी छात्र पढ़ाई करने इसलिए आते हैं, क्योंकि यहां सबसे बेहतरीन शिक्षा मिलती है। अगर शिक्षा पाना ही मुश्किल कर दिया जाएगा, तो छात्र फिर यहां से मुंह मोड़ लेंगे, जैसा कि अभी देखने को मिल रहा है।