बदलेगा CUET का पैटर्न? संसदीय समिति बोली- आर्ट्स, सोशल साइंस जैसे विषयों की परीक्षा में MCQ सही नहीं, समीक्षा करें

Newspoint
CUET UG Exam Pattern will be change or not : अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए क्या कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG) का एग्जाम पैटर्न बदलेगा? संसदीय समिति की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट में सीयूईटी यूजी एग्जाम में मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (MCQs) पैटर्न पर सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सासंद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति का कहना है कि आर्ट्स और सोशल साइंस जैसे विषयों के लिए मल्टीपल चॉइस वाले सवाल का तरीका बिल्कुल सही नहीं है।
Hero Image

दरअसल, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने सीयूईटी यूजी के MCQs वाले एग्जाम पैटर्न पर सवाल उठाते एक रिपोर्ट तैयार की है। संसदीय समिति ने मंगलवार को राज्यसभा चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में इस्तेमाल होने वाला मल्टीपल-चॉइस सवाल का तरीका 'ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस' विषयों के लिए सही नहीं है।

समिति की 381वीं 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' के अनुसार, सीयूईटी यूजी एग्जाम में ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस विषयों के सवाल स्वतंत्र और सब्जेक्टिव नेचर का है। इन्हें सिर्फ 'सही बॉक्स पर टिक लगाने' वाले तरीके से नहीं परखा जा सकता। समिति ने CUET के प्रश्न-पत्रों की क्वालिटी और परीक्षा के पूरे डिजाइन की समीक्षा करने को कहा है ताकि यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत अपने लक्ष्य को पूरा कर सके।

CUET MCQs को इन विषयों के लिए सही नहीं मानाइससे साफ होता है कि समिति के सभी इस बात से सहमत नहीं है कि यह एक ही पैमाना हर सब्जेक्ट के लिए एक तरह से काम करता है। हालांकि, साइंस या कॉमर्स के स्टूडेंट को फॉर्मूले और फैक्ट्स की जानकारी है या नहीं, यह चेक करने के लिए मल्टीपल-चॉइस टेस्ट एक अच्छा तरीका हो सकता है।

लेकिन कमेटी का तर्क है कि पॉलिटिकल साइंस, फिलॉसफी या लिटरेचर जैसे सब्जेक्ट्स का मकसद स्टूडेंट की तर्क करने, व्याख्या करने और अपनी मौलिक राय बनाने की एबिलिटी को निखारना और परखना होता है। चार ऑप्शन वाले सवाल से इनमें से किसी भी चीज की सही जांच नहीं हो सकती।

बदल सकता है सीयूईयूटी यूजी का पैटर्न?समिति ने सिफारिश की है कि क्वेश्चन पेपर और परीक्षा के पूरे स्ट्रक्चर की समीक्षा होनी चाहिए ताकि CUET उन सब्जेक्ट्स के लिए ठीक नहीं है, जिनका निष्पक्ष मूल्यांकन करना ही उसका मकसद है। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर अगर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं तो आने वाले सालों में सीयूईटी यूजी का नया संशोधित एग्जाम पैटर्न लाया जा सकता है।

अगर ऐसा होता है तो कुछ विषयों में एडमिशन के लिए छात्रों को लिखित परीक्षा और कुछ विषयों के लिए MCQs परीक्षा देनी पड़ेगी। फिलहाल इस पर विचार किया जाना है। उसके बाद ही सीयूईटी एग्जाम पैटर्न को लेकर कोई तस्वीर साफ होगी।

CUET पर क्या कहती है सरकार?यह पहली बार नहीं है जब सीयूईटी एग्जाम पैटर्न को लेकर समिति ने सवाल उठाए हैं। पिछले साल कमेटी ने अपनी 364वीं रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें हायर एजुकेशन सिस्टम से जुड़े मामल थे। यह उसी रिपोर्ट का अगला पार्ट है। तब सरकार ने NTA और UGC को इस पर ध्यान देने की सलाह दी थी। साथ ही सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि CUET सिंगल एप्लीकेशन विंडो है, जिससे स्टूडेंट्स को वन आवेदन-वन एग्जाम देकर कई यूनिवर्सिटीज में एडमिशन ऑप्शन मिलता है।

सरकार के जवाब में आगे यह भी बताया था कि यूजी एडमिशन के लिए CUET के स्ट्रक्चर को इसके पहले तीन एडिशन से मिले एक्सपीरियंस के बाद पहले ही आसान बना दिया गया है और पिछले साल का सेशन 37 सब्जेक्ट्स में आयोजित किया गया था, जो एग्जाम के शुरू होने के समय ऑफर किए गए 63 सब्जेक्ट्स से काफी कम है। पिछले सेशन के नतीजे भी 2024 की तुलना में तीन हफ्ते से ज्यादा पहले घोषित किए गए थे, जिसे सरकार इस बात के सबूत के तौर पर पेश करती है कि एग्जाम का मैनेजमेंट बेहतर हो रहा है।