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क्या धुरंधर सच में प्रोपेगेंडा है या सिर्फ एक फिल्म, समझिए पूरा मामला

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भारतीय सिनेमा और राजनीति का रिश्ता हमेशा से जटिल रहा है। जब कोई फिल्म देश, सुरक्षा या राजनीति जैसे संवेदनशील विषयों को छूती है, तो बहस होना लगभग तय होता है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म Dhurandhar: The Revenge भी इसी वजह से चर्चा के केंद्र में आ गई है।
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फिल्म में Ranveer Singh मुख्य भूमिका में हैं और इसका निर्देशन Aditya Dhar ने किया है। यह एक स्पाई थ्रिलर है, जिसमें देशभक्ति, सुरक्षा और राजनीतिक घटनाओं को कहानी का हिस्सा बनाया गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

फिल्म के रिलीज होते ही कुछ लोगों ने इसे प्रोपेगेंडा करार देना शुरू कर दिया। खासतौर पर फिल्म में दिखाए गए कुछ राजनीतिक घटनाक्रम और उनके प्रस्तुतीकरण को लेकर सवाल उठाए गए। कुछ दर्शकों का मानना था कि फिल्म एक खास सोच को बढ़ावा देती है, जबकि अन्य लोगों ने इसे सिर्फ एक सिनेमाई कहानी बताया।


यह बहस धीरे धीरे सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक मंच तक पहुंच गई। और यहीं से मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

पीएम मोदी का बयान

इस पूरे विवाद के बीच Narendra Modi ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। एक रैली के दौरान उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो फिल्म को प्रोपेगेंडा बता रहे थे। उन्होंने कहा कि जब ऐसी फिल्में आती हैं तो कुछ लोग तुरंत उन्हें गलत ठहराने लगते हैं और तथ्यों को नजरअंदाज करते हैं।

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उनका यह बयान आते ही मामला और ज्यादा गरमा गया। एक तरफ जहां उनके समर्थकों ने फिल्म और उसके मेकर्स का समर्थन किया, वहीं दूसरी तरफ विरोध करने वालों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और आलोचना के अधिकार से जोड़ा।

फिल्म इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने भी अपनी राय रखी। कुछ कलाकारों का कहना है कि सिनेमा को राजनीति से अलग रखना चाहिए और फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन या कला के रूप में देखना चाहिए।

वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अगर कोई फिल्म किसी वास्तविक घटना से प्रेरित है, तो उस पर चर्चा होना स्वाभाविक है। यही वजह है कि धुरंधर सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, बल्कि एक बहस का विषय बन गई है।

दर्शकों का नजरिया

दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ विवाद बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग इसे पसंद कर रहा है और फिल्म को बड़े पैमाने पर सराहा भी जा रहा है।


इससे यह साफ होता है कि हर दर्शक का नजरिया अलग होता है। कुछ लोग इसे देशभक्ति की कहानी के रूप में देखते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखते हैं।

असली सवाल क्या है

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिनेमा को पूरी तरह राजनीति से अलग रखा जा सकता है। या फिर जब भी कोई फिल्म समाज और देश से जुड़े मुद्दों को छुएगी, तब बहस होना तय है।

धुरंधर का मामला यह भी दिखाता है कि आज के समय में फिल्में सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई हैं। वे विचार, दृष्टिकोण और बहस का माध्यम भी बन चुकी हैं।

धुरंधर को लेकर चल रही बहस यह साबित करती है कि भारतीय सिनेमा का प्रभाव कितना गहरा है। एक फिल्म न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करती है, बल्कि समाज और राजनीति के बीच संवाद भी पैदा करती है।


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