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श्रेया घोषाल का बड़ा बयान, लिप सिंक से बेहतर गाना छोड़ना पसंद करेंगी

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आज के दौर में जहां म्यूजिक इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है, वहीं कुछ कलाकार ऐसे भी हैं जो अपनी कला और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं करना चाहते। मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल ने हाल ही में ऐसा ही एक बयान दिया है, जिसने संगीत जगत में नई बहस छेड़ दी है।
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उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर कभी उन्हें स्टेज पर लिप सिंक करना पड़ा, तो वह गाना ही छोड़ना पसंद करेंगी। यह बयान सिर्फ एक राय नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों और संगीत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

लिप सिंक पर दो टूक राय

श्रेया घोषाल ने एक बातचीत के दौरान लिप सिंक को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इसे एक तरह की लापरवाही और मेहनत की कमी बताया।


उनका मानना है कि जब दर्शक किसी कॉन्सर्ट में जाते हैं, तो वे असली और लाइव आवाज सुनना चाहते हैं। ऐसे में रिकॉर्डेड ट्रैक पर परफॉर्म करना उस भरोसे के साथ समझौता है।



यही वजह है कि उन्होंने कहा कि वह इस रास्ते को कभी नहीं चुनेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें गाना छोड़ना ही क्यों न पड़े।

लाइव सिंगिंग की अहमियत

लाइव परफॉर्मेंस का अपना एक अलग जादू होता है। इसमें गलती की गुंजाइश भी होती है और उसी में उसकी खूबसूरती भी छिपी होती है।

जब कोई कलाकार बिना किसी सहारे के गाता है, तो दर्शकों के साथ एक सीधा जुड़ाव बनता है।

श्रेया घोषाल का मानना है कि यही असली कला है और यही संगीत की आत्मा है। अगर यह खत्म हो जाए, तो लाइव म्यूजिक का महत्व भी कम हो जाएगा।

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बदलती इंडस्ट्री और बढ़ता ट्रेंड

आजकल बड़े कॉन्सर्ट्स और शो में परफॉर्मेंस को परफेक्ट दिखाने के लिए कई बार प्री-रिकॉर्डेड ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ कलाकार डांस और स्टेज शो को बेहतर बनाने के लिए लिप सिंक का सहारा लेते हैं।

हालांकि यह एक आम प्रैक्टिस बनती जा रही है, लेकिन इसे लेकर बहस भी लगातार बढ़ रही है। कई लोग इसे गलत मानते हैं, जबकि कुछ इसे एक जरूरी तकनीकी सपोर्ट मानते हैं।

श्रेया घोषाल की पहचान और सिद्धांत

श्रेया घोषाल को उनकी साफ, सुर में बंधी और भावनाओं से भरी आवाज के लिए जाना जाता है।

उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए हैं और कई भाषाओं में अपनी पहचान बनाई है।


उनकी खास बात यह है कि वह हर परफॉर्मेंस में लाइव गाने की कोशिश करती हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता और भी मजबूत होती है।

कलाकार और जिम्मेदारी

एक कलाकार के रूप में सिर्फ अच्छा गाना ही काफी नहीं होता, बल्कि अपने दर्शकों के प्रति ईमानदार होना भी उतना ही जरूरी है।

जब लोग टिकट खरीदकर किसी शो में जाते हैं, तो वे एक असली अनुभव चाहते हैं।

ऐसे में कलाकार की जिम्मेदारी होती है कि वह उन्हें वही अनुभव दे, जिसके लिए वे आए हैं।

क्या कहती है यह बहस

श्रेया घोषाल का यह बयान सिर्फ उनके व्यक्तिगत विचार नहीं हैं, बल्कि यह पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सवाल है। क्या तकनीक के इस दौर में भी असली कला की अहमियत बनी रहनी चाहिए या फिर परफॉर्मेंस को बेहतर दिखाने के लिए कुछ समझौते जरूरी हैं यह बहस आगे भी जारी रहेगी।



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