ग्रीन पटाखों के नियम: इस दिवाली क्या जलाना सही है और क्या नहीं

हर साल दिवाली से कुछ हफ़्ते पहले परिवार के व्हाट्सऐप ग्रुपों में एक ही सवाल घूमने लगता है: क्या इस बार पटाखे जलाने की इजाज़त है? जवाब कभी सीधा नहीं होता। पटाखों के नियम हर साल अदालती आदेशों, वैज्ञानिक प्रमाणन और सर्दियों के धुएँ के बीच बदलते रहे हैं। इस साल दिवाली 8 नवंबर को है और तस्वीर अभी पूरी तरह साफ़ नहीं हुई है। इस लेख में समझिए कि ग्रीन पटाखे क्या हैं, ताज़ा संकेत क्या कहते हैं और नकली माल से कैसे बचा जाए।
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ग्रीन पटाखों की शुरुआत कैसे हुई

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अर्जुन गोपाल मामले में पटाखों पर पूरा प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन कम प्रदूषण वाले पटाखों की बात कही, जो सिर्फ़ लाइसेंसशुदा दुकानदार बेच सकें। नागपुर की संस्था सीएसआईआर-नीरी ने इसके लिए फ़ॉर्मूले तैयार किए और 2019 की दिवाली तक ग्रीन पटाखे बाज़ार में आ गए। इनमें बेरियम नाइट्रेट की जगह कम ज़हरीला पोटैशियम नाइट्रेट इस्तेमाल होता है। नीरी के मुताबिक़ इनसे उत्सर्जन लगभग 30 से 35 प्रतिशत कम होता है। यानी प्रदूषण घटता है, ख़त्म नहीं होता।

इस साल के नियम क्या कहते हैं

दिल्ली-एनसीआर के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि न पूरा प्रतिबंध होगा, न खुली छूट। कौन से पटाखे चलेंगे और किस समय, यह बेरियम वाले पटाखों पर सीपीसीबी की रिपोर्ट के बाद तय होना था, जो 15 अक्टूबर तक आनी थी। इसलिए ख़रीदारी से पहले ताज़ा आदेश ज़रूर देख लें।


पिछले साल का ढाँचा एक मोटा अंदाज़ा देता है। सिर्फ़ नीरी से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति थी, वह भी सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे के बीच, दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन। एनसीआर के बाहर से पटाखे लाने और ऑनलाइन बिक्री पर रोक थी।

असली ग्रीन पटाखे की पहचान

डिब्बे पर नीरी और पेसो का हरा लोगो, पंजीकरण संख्या और क्यूआर कोड होना चाहिए। नीरी का "ग्रीन क्यूआर कोड" नाम का ऐप भी है, जिससे डिब्बा स्कैन करके जाँच की जा सकती है। नागपुर में कुछ साल पहले ऐसे डिब्बे मिले थे जिन पर नीरी का लोगो था, मगर पेसो का प्रमाणन, पंजीकरण संख्या और क्यूआर कोड नहीं था। यही कमी नकली माल की सबसे बड़ी निशानी है।


छोटा फ़ैसला, बड़ा असर

नियम तोड़ने पर विक्रेता का लाइसेंस निलंबित हो सकता है, पर ख़रीदार की भूमिका भी कम नहीं। दो मिनट में लिया गया फ़ैसला अकेले छोटा लगता है, लेकिन जब हज़ारों लोग एक ही शाम वही फ़ैसला लेते हैं, तो अगली सुबह शहर की हवा उसी से तय होती है।