जल जीवन मिशन 2.0: 2028 तक हर ग्रामीण घर में नल से पानी का लक्ष्य, जानें पूरी जानकारी
ग्रामीण घर में नल लग जाना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली चुनौती उसके बाद शुरू होती है। अगर नल में नियमित पानी न आए, पानी का स्रोत गर्मियों में सूख जाए या पानी की गुणवत्ता खराब हो, तो केवल कनेक्शन होने से परिवार की समस्या खत्म नहीं होती। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 में केवल पाइप और नल लगाने के बजाय पानी की नियमित और टिकाऊ आपूर्ति पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने को मंजूरी दी।
शुरुआती लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना था। अब मिशन को नए स्वरूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है।
मिशन में ग्रामीण पेयजल ढांचे की डिजिटल मैपिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे जल स्रोतों और पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे की निगरानी और प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जल जीवन मिशन में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की स्थिरता और इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
यही वजह है कि जल जीवन मिशन 2.0 की सफलता केवल इस आधार पर नहीं मापी जाएगी कि कितने घरों में नल लगा। असली सवाल यह होगा कि उन नलों से नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पानी कितने समय तक मिलता है। ग्रामीण परिवारों के लिए यही बदलाव सबसे ज्यादा मायने रखता है।
क्या है जल जीवन मिशन?
जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में शुरू किया गया था। इसका मूल उद्देश्य ग्रामीण भारत के हर घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल के लिए घरेलू नल कनेक्शन पहुंचाना था।शुरुआती लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना था। अब मिशन को नए स्वरूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है।
JJM 2.0 में क्या बदलेगा?
नए चरण में केवल नए कनेक्शन देने की बजाय पानी की सेवा को लंबे समय तक चालू रखने पर जोर है। इसका मतलब है कि पाइपलाइन, पानी के स्रोत और अन्य बुनियादी ढांचे की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।मिशन में ग्रामीण पेयजल ढांचे की डिजिटल मैपिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे जल स्रोतों और पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे की निगरानी और प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
नियमित नल का पानी महिलाओं और लड़कियों पर पानी लाने का बोझ कम कर सकता है। इससे परिवारों को दूर के जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और स्वच्छता से जुड़ी आदतों को भी बढ़ावा मिलता है।जल जीवन मिशन में वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की स्थिरता और इस्तेमाल किए गए पानी के प्रबंधन जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
असली चुनौती क्या है?
हर गांव में पाइपलाइन बिछाना एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। लेकिन उस व्यवस्था को वर्षों तक ठीक रखना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण काम है।यही वजह है कि जल जीवन मिशन 2.0 की सफलता केवल इस आधार पर नहीं मापी जाएगी कि कितने घरों में नल लगा। असली सवाल यह होगा कि उन नलों से नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पानी कितने समय तक मिलता है। ग्रामीण परिवारों के लिए यही बदलाव सबसे ज्यादा मायने रखता है।
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