MGNREGA Update 2026: अब 'पूज्य बापू योजना' के नाम से जाना जाएगा मनरेगा, 100 नहीं बल्कि 125 दिन मिलेगा काम
भारत के ग्रामीण इलाकों में रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली योजना मनरेगा ( MGNREGA ) अब एक बिल्कुल नए कलेवर में हमारे सामने आने वाली है। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना के स्वरूप और नाम में बड़े बदलाव करने की तैयारी पूरी कर ली है। ताज़ा अपडेट के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर अब 'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' किया जा सकता है। यह केवल नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि इसके भीतर मिलने वाली सुविधाओं और काम के दायरे को भी काफी व्यापक बनाया जा रहा है।
इसके साथ ही, सूत्रों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी में भी संशोधन किया गया है, जिसे बढ़ाकर 240 रुपये प्रति दिन तक किया जा सकता है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महंगाई के दौर में मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
इस बदलाव के साथ ही 'विकास भारत शिक्षा संस्थान बिल 2025' जैसी अन्य पहलों पर भी चर्चा तेज है, जो यह संकेत देती है कि सरकार ग्रामीण विकास और शिक्षा के ढांचे में एक साथ बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ा रही है।
अकुशल श्रम की गारंटी: बिना किसी विशेष हुनर के भी ग्रामीण वयस्क सदस्य शारीरिक श्रम के जरिए अपनी जीविका कमा सकते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही: सोशल ऑडिट और सीधे बैंक खाते में भुगतान (DBT) की व्यवस्था ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है।
महिला सशक्तिकरण: इस योजना में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से सराहनीय रही है। अपने घर के पास काम मिलने की सुविधा ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है।
संकट का साथी: कोविड-19 जैसे कठिन समय में जब प्रवासी मजदूर वापस अपने गांवों की ओर लौटे थे, तब इसी योजना ने उन्हें भुखमरी से बचाया था।
'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' के रूप में मनरेगा का यह नया अवतार ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि करोड़ों देशवासियों को एक सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी प्रदान करेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया कानून धरातल पर कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से लागू होता है।
क्या हैं मुख्य बदलाव?
इस नई योजना के तहत सबसे बड़ा और राहत देने वाला बदलाव काम के दिनों की संख्या में किया गया है। अभी तक ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का अधिकार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्रामीण मजदूरों को अब साल में 25 दिन अतिरिक्त काम मिलेगा, जिससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय सुधार होगा।इसके साथ ही, सूत्रों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी में भी संशोधन किया गया है, जिसे बढ़ाकर 240 रुपये प्रति दिन तक किया जा सकता है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महंगाई के दौर में मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
'पूज्य बापू योजना' की जरूरत क्यों पड़ी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना को नया नाम और नया विस्तार देने के पीछे सरकार की सोच इसे और अधिक समावेशी और आधुनिक बनाना है। 'पूज्य बापू' का नाम इस योजना को महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने से और गहराई से जोड़ता है। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से न केवल रोजगार मिले, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ संपत्तियों (Durable Assets) का निर्माण भी हो।इस बदलाव के साथ ही 'विकास भारत शिक्षा संस्थान बिल 2025' जैसी अन्य पहलों पर भी चर्चा तेज है, जो यह संकेत देती है कि सरकार ग्रामीण विकास और शिक्षा के ढांचे में एक साथ बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ा रही है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ और लाभ
पिछले दो दशकों में इस योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। इसकी कुछ प्रमुख खासियतें जो नए स्वरूप में भी बरकरार रहेंगी और मजबूत होंगी, वे इस प्रकार हैं:अकुशल श्रम की गारंटी: बिना किसी विशेष हुनर के भी ग्रामीण वयस्क सदस्य शारीरिक श्रम के जरिए अपनी जीविका कमा सकते हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही: सोशल ऑडिट और सीधे बैंक खाते में भुगतान (DBT) की व्यवस्था ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है।
महिला सशक्तिकरण: इस योजना में महिलाओं की भागीदारी हमेशा से सराहनीय रही है। अपने घर के पास काम मिलने की सुविधा ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया है।
संकट का साथी: कोविड-19 जैसे कठिन समय में जब प्रवासी मजदूर वापस अपने गांवों की ओर लौटे थे, तब इसी योजना ने उन्हें भुखमरी से बचाया था।
ग्रामीण भारत पर प्रभाव
काम के दिनों को 125 करने से ग्रामीण परिवारों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होगा। जब गांव के व्यक्ति की जेब में पैसा आता है, तो वह स्थानीय बाजारों में मांग पैदा करता है, जिससे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इसके अलावा, जल संरक्षण, सड़क निर्माण और बागवानी जैसे कार्यों से गांवों का बुनियादी ढांचा भी मजबूत होता है।'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' के रूप में मनरेगा का यह नया अवतार ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि करोड़ों देशवासियों को एक सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी प्रदान करेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया कानून धरातल पर कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से लागू होता है।
Next Story