बंगाल में पहली बार खिलने जा रहा कमल, तमिलनाडु में आई सुपरस्टार विजय की आंधी; 5 राज्यों के चुनावी नतीजों के क्या हैं मायने?
हुगली नदी में पिछले 15 सालों में कितना पानी बह गया, इसकी गहराई का अंदाजा अब पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों से लगाया जा सकता है। उधर दक्षिण में कावेरी नदी के किनारे ऐसी आंधी चली जिसने स्टालिन परिवार की जड़ें हिला दीं। असम में राजनीति 'मामा' और 'मियां' के इर्द-गिर्द घूमती रही, तो केरल ने कांग्रेस के सूखे चेहरे पर मुस्कान ला दी है। पुडुचेरी में भी बीजेपी का 'करंट' बरकरार है। आखिर ये सब हुआ कैसे, आइए समझते हैं इन नतीजों की बड़ी बातें।
बीजेपी ने इस बार शुरू से ही आक्रामक खेल खेला। अमित शाह की नजर बूथ लेवल मैनेजमेंट पर थी। पीएम मोदी की रैलियों और केंद्र की योजनाओं ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। कोलकाता के जानकारों ने पहले ही कह दिया था कि सत्ता बदलने की जमीन तैयार हो चुकी है और नतीजों ने उस पर मुहर लगा दी।
बंगाल में ममता 'दीदी' क्यों हारीं?
ममता बनर्जी की हार के पीछे कोई एक नहीं बल्कि कई वजहें हैं। मई 2011 में ममता ने 34 साल के वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था, लेकिन आज बीजेपी ने वही इतिहास दोहरा दिया है। जानकारों का कहना है कि 15 साल की सत्ता के बाद ममता के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी थी। कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप और केंद्र से लगातार टकराव जैसे मुद्दों ने जनता के मन में असंतोष पैदा किया। टीएमसी के जो इलाके कभी अभेद्य माने जाते थे, वहां भी पार्टी की पकड़ ढीली नजर आई।बीजेपी ने इस बार शुरू से ही आक्रामक खेल खेला। अमित शाह की नजर बूथ लेवल मैनेजमेंट पर थी। पीएम मोदी की रैलियों और केंद्र की योजनाओं ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। कोलकाता के जानकारों ने पहले ही कह दिया था कि सत्ता बदलने की जमीन तैयार हो चुकी है और नतीजों ने उस पर मुहर लगा दी।
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