नीतीश कुमार के बाद क्या भाजपा देगी बिहार को पहली महिला मुख्यमंत्री? जानें कौन हैं इस रेस में शामिल
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने और राज्यसभा की ओर रुख करने के बाद बिहार की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि भारतीय जनता पार्टी अब पहली बार राज्य की कमान सीधे अपने हाथों में ले सकती है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन भाजपा के इतिहास को देखते हुए किसी चौंकाने वाले नाम से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिहार को पहली महिला मुख्यमंत्री देकर एक नया मास्टरस्ट्रोक चलेंगे? आइए जानते हैं उन चेहरों के बारे में जो इस शीर्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं।
महिला नेता जो मुख्यमंत्री पद की दावेदार हो सकती हैं
अगर भाजपा महिला नेतृत्व के साथ प्रयोग करने का फैसला करती है तो इन नामों पर चर्चा सबसे अधिक है:
रेणु देवी: इन्हें सबसे अनुभवी दावेदार माना जा रहा है। रेणु देवी 2020 से 2022 तक बिहार की उपमुख्यमंत्री रह चुकी हैं। वह भाजपा के महिला विंग की एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं।
श्रेयसी सिंह: जमुई से विधायक और पूर्व नेशनल शूटर श्रेयसी सिंह को पार्टी के युवा और आधुनिक चेहरे के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा युवाओं को प्राथमिकता देती है तो वह एक बड़ा विकल्प हो सकती हैं।
रामा निषाद: औराई की विधायक और पूर्व मंत्री रामा निषाद का नाम अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए लिया जा रहा है।
गायत्री देवी: परिहार से विधायक गायत्री देवी की क्षेत्रीय पकड़ काफी मजबूत है और उन्हें ओबीसी आधार को सशक्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा सकता है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे कौन हैं?
सम्राट चौधरी: इन्हें वर्तमान में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वह अभी उपमुख्यमंत्री हैं और गृह मंत्रालय संभाल रहे हैं। एक प्रमुख कुशवाहा नेता के रूप में उनकी नियुक्ति भाजपा के ओबीसी समीकरणों को मजबूती देगी।
नित्यानंद राय: केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के पास लंबा प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव है। वह दिल्ली और बिहार दोनों की राजनीति में एक वरिष्ठ चेहरा हैं।
दिलीप कुमार जायसवाल: प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल को पार्टी संगठन के भीतर एक स्थिर और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है।
निशांत कुमार: हालांकि वह भाजपा के सदस्य नहीं हैं लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार जदयू के कुछ नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं ताकि गठबंधन का सामाजिक तालमेल बना रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिहार को पहली महिला मुख्यमंत्री देकर एक नया मास्टरस्ट्रोक चलेंगे? आइए जानते हैं उन चेहरों के बारे में जो इस शीर्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं।
महिला नेता जो मुख्यमंत्री पद की दावेदार हो सकती हैं
अगर भाजपा महिला नेतृत्व के साथ प्रयोग करने का फैसला करती है तो इन नामों पर चर्चा सबसे अधिक है: रेणु देवी: इन्हें सबसे अनुभवी दावेदार माना जा रहा है। रेणु देवी 2020 से 2022 तक बिहार की उपमुख्यमंत्री रह चुकी हैं। वह भाजपा के महिला विंग की एक वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं।
श्रेयसी सिंह: जमुई से विधायक और पूर्व नेशनल शूटर श्रेयसी सिंह को पार्टी के युवा और आधुनिक चेहरे के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भाजपा युवाओं को प्राथमिकता देती है तो वह एक बड़ा विकल्प हो सकती हैं।
रामा निषाद: औराई की विधायक और पूर्व मंत्री रामा निषाद का नाम अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए लिया जा रहा है।
गायत्री देवी: परिहार से विधायक गायत्री देवी की क्षेत्रीय पकड़ काफी मजबूत है और उन्हें ओबीसी आधार को सशक्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा सकता है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे कौन हैं?
सम्राट चौधरी: इन्हें वर्तमान में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वह अभी उपमुख्यमंत्री हैं और गृह मंत्रालय संभाल रहे हैं। एक प्रमुख कुशवाहा नेता के रूप में उनकी नियुक्ति भाजपा के ओबीसी समीकरणों को मजबूती देगी। नित्यानंद राय: केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के पास लंबा प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव है। वह दिल्ली और बिहार दोनों की राजनीति में एक वरिष्ठ चेहरा हैं।
दिलीप कुमार जायसवाल: प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल को पार्टी संगठन के भीतर एक स्थिर और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है।
निशांत कुमार: हालांकि वह भाजपा के सदस्य नहीं हैं लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार जदयू के कुछ नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं ताकि गठबंधन का सामाजिक तालमेल बना रहे।
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