नीतीश कुमार के बाद अब सम्राट चौधरी बिहार के नए सीएम, लव-कुश समीकरण पर भाजपा का बड़ा दांव

पटना। बिहार की सियासत ने एक ऐसी करवट ली है जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी। करीब दो दशकों तक नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमने वाली बिहार की सत्ता अब सम्राट चौधरी के हाथों में आ गई है। 15 अप्रैल को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह भाजपा के लिए उस सपने का सच होना है जहाँ वह बिहार में अपने दम पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो रही है।
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राजद और जदयू जैसे दलों में अपनी पहचान बनाने के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा जीतकर सम्राट चौधरी आज उस मुकाम पर हैं जहाँ से वे बिहार के भविष्य की नई इबारत लिखेंगे।

विरासत और शुरुआती राजनीतिक संघर्ष

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज नेताओं में शुमार थे। सम्राट ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 31 साल की उम्र में 1999 में वे राज्य के कृषि मंत्री बन गए थे। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से मिली जीत ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक मजबूत युवा चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया।