ONORC Scheme Benefits: मजदूरों और गरीबों के लिए राशन कार्ड के नए नियम, अब कहीं भी मिलेगा अनाज
गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाने का इंतजाम करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। इसी को ध्यान में रखते हुए राशन की व्यवस्था बनाई गई थी। लंबे समय से यह नियम चला आ रहा था कि लोग अपने इलाके की तय दुकानों पर अपना कार्ड दिखाकर अनाज लेते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, लोगों की जरूरतें और काम करने की जगहें भी बदलने लगीं। इसे देखते हुए सरकार ने इस पुराने सिस्टम में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। इस नए बदलाव का नाम 'वन नेशन वन राशन कार्ड' स्कीम है। ये योजना अब पूरे देश में बहुत तेजी से लागू की जा रही है, ताकि किसी को भी खाने की दिक्कत न हो।
राशन की दुकानों पर अब इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल मशीनें लगा दी गई हैं। जब कोई व्यक्ति राशन लेने दुकान पर जाता है, तो उसे मशीन पर अपना अंगूठा या उंगली लगाकर अपनी पहचान बतानी होती है। इसे बायोमेट्रिक जांच कहते हैं। जैसे ही पहचान पक्की होती है, मशीन बता देती है कि उस आदमी ने पहले कितना राशन लिया है और उसका कितना हिस्सा बाकी है।
सरकार का कहना है कि इस डिजिटल सिस्टम की वजह से फर्जी राशन कार्डों का चलना बंद हो गया है। पहले कई लोग गलत तरीके से एक से ज्यादा कार्ड बनवा लेते थे, लेकिन अब आधार लिंक होने की वजह से ऐसा करना नामुमकिन है। अब सिर्फ वही लोग राशन ले पा रहे हैं, जो इसके असली हकदार हैं। इससे राशन बांटने के काम में साफ़-सफाई आई है और बेईमानी कम हुई है। यह योजना भूखमरी को खत्म करने की दिशा में एक बहुत मजबूत कदम मानी जा रही है।
जो लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, वे ऑफलाइन भी कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए पास के खाद्य आपूर्ति दफ्तर या राशन डीलर से फॉर्म लेना होता है। फॉर्म भरकर और जरूरी कागजों की फोटोकॉपी साथ लगाकर जमा करने के बाद प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
क्या है ये वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम?
वन नेशन वन राशन कार्ड भारत सरकार की एक बहुत ही खास योजना है। इस योजना का मकसद यह है कि जिसके पास भी राशन कार्ड है, वह देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सरकारी राशन की दुकान से अपना अनाज ले सके। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई इंसान काम के सिलसिले में अपने राज्य से बाहर गया है, तो उसे वहां नया कार्ड बनवाने की जरूरत नहीं है। वह अपने पुराने कार्ड से ही वहां की किसी भी दुकान से राशन ले सकता है। ये सुविधा उन मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और गरीब परिवारों के लिए बहुत मददगार है, जिन्हें काम की तलाश में बार-बार अपना घर बदलना पड़ता है।राशन कार्ड को डिजिटल बनाने का काम
इस योजना को सही तरीके से चलाने के लिए राशन कार्डों को डिजिटल कर दिया गया है। इसके तहत सभी राज्यों के राशन कार्डों को एक साथ इंटरनेट के जरिए जोड़ दिया गया है। सबसे पहले राशन कार्ड को आधार नंबर से जोड़ा जाता है। आधार नंबर से यह पक्का हो जाता है कि कार्ड किसके नाम पर है और उसकी सही पहचान क्या है। इसके बाद सभी राज्यों का डाटा एक जगह जमा किया जाता है।राशन की दुकानों पर अब इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल मशीनें लगा दी गई हैं। जब कोई व्यक्ति राशन लेने दुकान पर जाता है, तो उसे मशीन पर अपना अंगूठा या उंगली लगाकर अपनी पहचान बतानी होती है। इसे बायोमेट्रिक जांच कहते हैं। जैसे ही पहचान पक्की होती है, मशीन बता देती है कि उस आदमी ने पहले कितना राशन लिया है और उसका कितना हिस्सा बाकी है।
इस योजना के बड़े फायदे
इस योजना से देश भर के लाखों लोगों को सीधा फायदा हो रहा है। अब लोगों को अनाज लेने के लिए अपने गांव या शहर की दुकान के भरोसे नहीं रहना पड़ता। जो मजदूर अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में काम करते हैं, वे अब अपनी काम की जगह पर ही राशन ले सकते हैं। इससे उनका खाने का खर्चा बचता है और उन्हें भटकना नहीं पड़ता।सरकार का कहना है कि इस डिजिटल सिस्टम की वजह से फर्जी राशन कार्डों का चलना बंद हो गया है। पहले कई लोग गलत तरीके से एक से ज्यादा कार्ड बनवा लेते थे, लेकिन अब आधार लिंक होने की वजह से ऐसा करना नामुमकिन है। अब सिर्फ वही लोग राशन ले पा रहे हैं, जो इसके असली हकदार हैं। इससे राशन बांटने के काम में साफ़-सफाई आई है और बेईमानी कम हुई है। यह योजना भूखमरी को खत्म करने की दिशा में एक बहुत मजबूत कदम मानी जा रही है।
किसे मिलेगा इस योजना का लाभ?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत जिन भी लोगों के पास राशन कार्ड है, वे सभी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। बस एक ही शर्त है कि उनका राशन कार्ड उनके आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए। जब तक कार्ड आधार से नहीं जुड़ेगा, तब तक मशीन पर पहचान नहीं हो पाएगी और दूसरे राज्य में राशन नहीं मिल पाएगा। इसलिए आधार लिंकिंग बहुत जरूरी है।राशन कार्ड बनवाने का आसान तरीका
अब राशन कार्ड बनवाना पहले से बहुत आसान हो गया है। लोग घर बैठे इंटरनेट से या दफ्तर जाकर, दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं। अगर किसी को ऑनलाइन बनवाना है, तो उसे अपने राज्य के खाद्य और आपूर्ति विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां अपना अकाउंट बनाकर लॉग इन करना होता है। इसके बाद नए राशन कार्ड का फॉर्म भरकर परिवार की सारी जानकारी देनी होती है। जरूरी कागज अपलोड करके और फीस जमा करके आवेदन पूरा हो जाता है।जो लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, वे ऑफलाइन भी कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए पास के खाद्य आपूर्ति दफ्तर या राशन डीलर से फॉर्म लेना होता है। फॉर्म भरकर और जरूरी कागजों की फोटोकॉपी साथ लगाकर जमा करने के बाद प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
आम लोगों की जिंदगी में बदलाव
वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम ने उन लोगों की एक बहुत बड़ी मुसीबत दूर कर दी है, जो काम के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। पहले उन्हें राशन के लिए बहुत परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें कहीं भी अनाज मिल जाता है। इस योजना ने यह पक्का किया है कि कोई भी गरीब परिवार भूखा न सोए। आधार वाले सिस्टम ने गड़बड़ियों को कम किया है और यह सुनिश्चित किया है कि सरकार की मदद सही हाथों तक पहुंचे। कुल मिलाकर, ये योजना देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में बहुत बड़ा रोल निभा रही है।Next Story