Lucknow Coaching Centre Fire: लखनऊ अग्निकांड में बड़ा खुलासा, एलडीए के 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए, बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक मेन एंट्रेंस

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Lucknow Coaching Centre Fire: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून को कोचिंग सेंटर अग्निकांड की जांच में 18 अधिकारी समेत इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। जांच में बिल्डिंग का कमर्शियल इस्तेमाल, फायर सेफ्टी की कमी और लापरवाही की बात सामने आई। 

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आने जाने का सिर्फ एक ही रास्ता

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। इमारत में आनेजाने का सिर्फ एक ही रास्ता था। एक अकेले रास्ते में एयर कंडीशनिंग पैनल, उलझे हुए तार और दूसरे उपकरण लगे हुए थे। इसी वजह से हादसे के वक्त लोगों का निकलना और साथ ही हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में भी दिक्कत आई। 

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15 लोगों की मौत के 18 लोग जिम्मेदार

इस मामले में नई जानकारी के मुताबिक, LDA की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए। LDA के वाइस प्रेसीडेंट ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज कल रात भेज दी थी।

दोषियों में 5 जोनल अधिकारी और 18 इंजीनियर और संबंधित अधिकारी शामिल बताए गए।  इससे पहले एलडीए एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित किया जा चुका है। 

बिल्डिंग का गलत इस्तेमाल !

जांच में पता चला कि बिल्डिंग का मैप आवासीय इस्तेमाल के लिए अप्रूव कराया गया था। मैप अप्रूव हुआ रहने के लिए लेकिन रहने की बजाय उसका इस्तेमाल कमर्शियल पर्पस के लिए हो रहा था।

2016 में इस बिल्डिंग को अवैध निर्माण ठहराया गया। बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था लेकिन तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त कर दिया था।

लापरवाहियों का खुलासा!

एफआईआर के मुताबिक, बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक या इमरजेंसी एग्जिट नहीं था। 
बिल्डिंग में आनेजाने के लिए सिर्फ एक मेन एंट्रेंस और एग्जिट रास्ता था।
बिजली की वायरिंग और विद्युत उपकरण भी असुरक्षित तरीके से लगाए गए थे।
बिल्डिंग के अंदर एसी के आउटर यूनिट और अन्य उपकरण सुरक्षा मानकों के विपरीत स्थापित थे।

अग्निशमन और एनडीआरएफ टीम को रेस्क्यू के दौरान दीवार काटकर अंदर प्रवेश करना पड़ा।
जांच में माना गया है कि बिल्डिंग संचालकों और जिम्मेदार लोगों को संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। 

निलंबित FSSO कमलेंद्र सिंह बोले CFO जिम्मेदार हैं

लखनऊ अग्निकांड मामले में निलंबित FSSO कमलेंद्र सिंह ने CM योगी को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि छोटे स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई की गई, ये अन्यायपूर्ण है, मेरा कार्यक्षेत्र सीमित है। CFO के पास सारे अधिकार हैं, उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। NOC, CFO देते हैं। फायर ब्रिगेड देर से पहुंची, इसके लिए CFO जिम्मेदार हैं। कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।

18 इंजीनियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अलीगंज अग्निकांड मामले में बड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने अवैध बिल्डिंग के निर्माण के लिए दोषी तत्कालीन विहित प्राधिकारी, 5 जोनल अफसरों समेत 18 इंजीनियरों की जवाबदेही तय करते हुए इनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें इन सभी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। 

एकएक फाइल खंगाली गई

LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मामले से जुड़ी एकएक फाइल को खुद खंगाला। अलीगंज, सेक्टरडी में भूखण्ड और भवन कब और किसको आवंटित किया गया। उसकी रजिस्ट्री कब हुई, स्थल पर निर्माण कार्य के लिए कब नक्शा स्वीकृत किया गया। साथ ही स्थल पर हुए अवैध निर्माण को रोकने में किनकिन अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा। 

जांच में हुआ खुलासा

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस भवन का नक्शा एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। वहां समय के साथ बहुमंजिला व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रहीं। लेकिन अलगअलग स्तरों पर तैनात अधिकारियों ने प्रभावी निगरानी एवं प्रवर्तन कार्रवाई नहीं की गई। इससे नक्शे का उल्लंघन और अवैध निर्माण की स्थिति सालों तक बनी रही। जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका को गंभीर पाया गया है।

मकान तोड़ने का आदेश हुआ रद्द

विहित प्राधिकारी ने 2016 में भवन को तोड़ने का आदेश पारित किया, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता के प्रार्थना पत्र पर आदेश को खत्म कर दिया गया। जांच में सवाल उठाया गया है कि यदि भवन तोड़ने के आदेश को रद्द किया गया था तो उसके बाद भवन की वास्तविक स्थिति, उपयोग और नक्शे के अनुपालन की दोबारा जांच क्यों नहीं कराई गई। तत्कालीन विहित प्राधिकारी के साथ ही प्रवर्तन जोन4 में तैनात रहे 5 जोनल अफसरों, 6 असिस्टेंड इंजीनियर और 6 जूनियर इंजीनियरों की लापरवाही उजागर होती है। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए  शासन को रिपोर्ट भेज दी।