कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल BPCL, HPCL, इंडिगो के शेयर 4% तक टूटे
बुधवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भारी निराशा लेकर आया. अमेरिका और ईरान के बीच अचानक बढ़े सैन्य तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में ऐसी आग लगाई कि भारतीय शेयर बाजार औंधे मुंह गिर गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इस एक खबर ने सेंसेक्स को 600 अंकों से ज्यादा नीचे धकेल दिया. सबसे बुरी मार उन कंपनियों पर पड़ी है जिनका सीधा वास्ता कच्चे तेल से होता है. एयरलाइन कंपनियां, पेट्रोलडीजल बेचने वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तथा पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली.
कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर एयरलाइंस के ईंधन तथा पेंट बनाने के कच्चे माल की लागत पर पड़ता है. यही वजह है कि बुधवार को इंटरग्लोब एविएशन के शेयर में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की.
शेयर बाजार में आई इस गिरावट की असली जड़ पश्चिम एशिया में भड़का नया विवाद है. होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है. जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर 80 से ज्यादा ठिकानों पर सैन्य हमले किए हैं. इस कार्रवाई ने पूरे मध्यपूर्व में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है.
ईरान ने भी इस हमले का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है. मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की लगातार आ रही खबरों ने दुनियाभर में तेल की सप्लाई बाधित होने का डर पैदा कर दिया है. इसी खौफ के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 3 फीसदी का तेज उछाल दर्ज किया गया. हालात तब और बिगड़ गए जब अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की जो प्रतिबंध छूट दे रखी थी, उसे भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया. अब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई कम होने की आशंका से दाम आसमान छूने लगे हैं, जिसका सीधा खामियाजा भारतीय शेयर बाजार को भुगतना पड़ रहा है.
इस पूरी स्थिति पर बाजार के जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है. ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ग्लोबल अफेयर्स की एसोसिएट डीन कैरोलिन किसैन ने अपनी राय रखी है. उनका मानना है कि अगर यह सैन्य तनाव आगे नहीं बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आया यह मौजूदा उछाल लंबे समय तक नहीं टिकेगा. यानी हालात शांत होने पर बाजार जल्द ही वापसी कर सकता है.