राशन से आधार तक… यूपी में लोग सबसे ज्यादा परेशान क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां करोड़ों लोग रहते हैं. इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में लोगों की समस्याएं भी अलगअलग तरह की होती हैं. किसी को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता, तो कोई पेंशन, राशन, सड़क, बिजली या दूसरी सरकारी सेवाओं से जुड़ी परेशानी का सामना करता है. ऐसे में जब लोगों की शिकायतों के सरकारी आंकड़े सामने आते हैं, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर किस राज्य में कितनी शिकायतें दर्ज हो रही हैं और उनका समाधान किस तरह किया जा रहा है.
केंद्र सरकार की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में उत्तर प्रदेश में जन शिकायतों के निपटारे की संख्या सबसे ज्यादा रही. वहीं, लोगों की शिकायतों और उनके समाधान से जुड़ी जानकारी यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या शिकायतों का निपटारा होने से लोगों की परेशानी पूरी तरह दूर हो रही है?
केवल सितंबर में कितनी शिकायतें दर्ज हुईं?केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की CPGRAMS महीने की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश में 31,900 नई शिकायतें दर्ज हुईं. पहले से चली आ रही शिकायतों को मिलाकर राज्य में कुल 73,330 शिकायतें दर्ज थीं. इनमें से 45,970 शिकायतों का निपटारा किया गया, जबकि महीने के अंत तक 27,360 शिकायतें लंबित रहीं. यानी बड़ी संख्या में शिकायतों पर कार्रवाई हुई, लेकिन हजारों मामले अभी भी बाकी हैं.
रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है. सितंबर में यूपी की 14,179 शिकायतों पर लोगों से प्रतिक्रिया मिली, जिनमें 8,870 लोगों ने समाधान पर संतुष्टि जताई, जबकि 5,309 लोग समाधान से संतुष्ट नहीं थे. इन आंकड़ों से पता चलता है कि शिकायतों का निपटारा और लोगों की संतुष्टि दो अलगअलग बातें हैं. हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे उत्तर प्रदेश के लोग देश में सबसे ज्यादा परेशान हैं. रिपोर्ट मुख्य रूप से दर्ज शिकायतों और उनके निपटारे की स्थिति बताती है.
31,900 नई शिकायतें: सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश में इतनी नई जन शिकायतें दर्ज हुईं.
45,970 शिकायतों का निपटारा: सितंबर में यूपी ने शिकायतों के समाधान के मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक संख्या दर्ज की.
27,360 शिकायतें पेडिंग: सितंबर के अंत तक इतनी शिकायतों का निपटारा बाकी था.
63 प्रतिशत लोग संतुष्ट:
9,401 शिकायतें 21 दिन से ज्यादा पुरानी: जनवरी से सितंबर 2026 के बीच के आंकड़ों में इतनी शिकायतें 21 दिन से अधिक समय से लंबित थीं.
आखिर यूपी में शिकायतें इतनी ज्यादा क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश में शिकायतों की बड़ी संख्या को समझने के लिए राज्य की आबादी और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है. यहां गांवों से लेकर बड़े शहरों तक बड़ी संख्या में लोग सरकारी योजनाओं और सेवाओं पर निर्भर हैं. जब किसी व्यक्ति को सरकारी सेवा से जुड़ी परेशानी होती है, तो वह संबंधित विभाग में शिकायत कर सकता है. इसके अलावा, ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था की जानकारी बढ़ने से भी ज्यादा लोग अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं.
जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें उत्तर प्रदेश के लोगों ने सबसे ज्यादा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित शिकायत दर्ज की है, जो कि 9 फीसदी है. इसके बाद लोगों के बीच आधार अपडेट को लेकर शिकायतों की संख्या कुल शिकायत का 7% है. इसके बाद PMKISAN से जुड़ी परेशानियां 5%, आधार नंबर डिएक्टिवेट या खो गया 5% और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़ी शिकायतें 4% रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 9,401 शिकायतें 21 दिनों से ज्यादा समय से पेंडिंग थीं.
इस रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू लोगों की संतुष्टि से जुड़ा है. सितंबर में उत्तर प्रदेश की 14,179 निपटाई गई शिकायतों पर प्रतिक्रिया दर्ज हुई. इनमें 8,870 लोगों ने समाधान पर संतुष्टि जताई, जबकि 5,309 लोगों ने असंतोष जाहिर किया. इसका मतलब है कि प्रतिक्रिया देने वाले लोगों में करीब 63 प्रतिशत संतुष्ट थे और लगभग 37 प्रतिशत संतुष्ट नहीं थे.
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश में 27,360 शिकायतें लंबित थीं. जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान राज्य में कुल 2,90,767 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 2,63,407 का निपटारा किया गया. यह संख्या बताती है कि राज्य में शिकायतों के समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम हुआ है, लेकिन कुछ मामले अब भी बाकी हैं.