Explainer: EPFO के नए नियम से किसको फायदा, किसको नुकसान…यहां है आपके सवालों का जवाब

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निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि यानी PF सिर्फ एक मासिक कटौती नहीं बल्कि रिटायरमेंट की सबसे बड़ी बचत होती है. ऐसे में जब सरकार ने नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026 के तहत 15,000 की वेतन सीमा से ऊपर होने वाले EPF योगदान को स्वैच्छिक बनाने का फैसला किया, तो कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के बीच कई सवाल खड़े हो गए.

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अब तक आम तौर पर ऐसा होता था कि एक बार कोई कर्मचारी PF के दायरे में आ जाता था तो कर्मचारी और कंपनी दोनों उसकी रियल बेसिक सैलरी पर 1212 फीसदी योगदान करते थे, भले ही उसकी सैलरी सरकार की ओर से तय 15,000 रुपये की वेज सीलिंग से कहीं ज्यादा क्यों न हो.

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नए नियम में 15,000 तक के वेतन पर होने वाला योगदान तो अनिवार्य रहेगा, लेकि उससे ऊपर की राशि पर PF जमा करना कर्मचारी और कंपनी की सहमति पर निर्भर करेगा. ऐसे में नोएडा में काम करने वाले रोहित और मुंबई की किसी कंपनी में काम करने वाली स्नेहा के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर, नए नियमों से उनकी सैलरी पर क्या असर होगा. पेंशन फंड कम हो जाएगा क्या? आइए रोहित और स्नेहा की तरह करोड़ों पीएफ धारकों के मन में उठ रहे तमाम सवालों का एकएक करके जवाब देते हैं.

ईपीएस स्कीम को पहले समझिए

लेबर मिनिस्ट्री ने जब से नई ईपीएस स्कीम 2026 के तहत ये ऐलान किया है कि अब की रााशि कितनी जमा करवानी है ये आपके ऊपर है तभी रोहित थोड़ा असमंजस में है. अभी 2 साल पहले लखनऊ से पॉलिटेक्निक कर के नोएडा में नौकरी कर रहा है. पहले तो उसकी सैलरी कम थी तो पीएफ वही कुल 3600 रुपये जमा होता है. मगर इस बार कंपनी ने उसका प्रमोशन कर दिया है. पैसे बढ़ गए हैं बेसिक सैलरी भी 15,00 हजार से ज्यादा हो गई है तो वह अब सोच रहा है कि क्या करूं इतना ही पैसा रहने दूं या बढ़ा ही दूं. ठीक इसी हाल में स्नेहा भी है उसने भी दिल्ली में मॉस कम्युनिकेशन का कोर्स करने के बाद मुंबई गई है. पहली नौकरी उसकी भी है. रोहित की तरह वह भी निवेश को लेकर परेशान है. कुल मिलाकर रोहित और स्नेहा की तरह करोड़ों लोग अभी इस द्वंद में हैं कि क्या कैसे होगा. उन्हीं सबका कंफ्यूजन दूर करने के लिए आपको नई नीति से जुड़े कुछ जरूरी नियम FAQ के जरिए बताते हैं. तो चलिए शुरू करते हैं.

सवाल अब 1 लाख की सैलरी पर भी सिर्फ 1,800 रुपये PF कटेंगे?

जवाब नए नियमों में कर्मचारी और कंपनी की सहमति से पीएफ कटेगा. 1,800 रुपये मिनिमम पीएफ की रकम है जो कि 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी से तय होती है. अब अगर किसी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये है उसमें बेसिक 50 हजार रुपये मान लेते हैं तो जरूरी नहीं है कि उसको 1,800 ही देना होगा. वह व्यक्ति चाहेगा तो 50 हजार रुपये के बेसिक पर पीएफ जमा कर सकता है. यह पूरी तरीके से वॉलेंट्री है यानी आपका निवेश आपके हाथ में है.

सवाल क्या रिटायरमेंट की बचत पर अब लगाम लग जाएगी?

जवाब अगर कंपनियां और कर्मचारी केवल वेज सीलिंग तक योगदान चुनते हैं यानी 1,800 रुपये+ 1,800 रुपये का ऑप्शन चुनते हैं तो PF खाते में कम पैसा जमा होगा. इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बनने वाला फंड छोटा हो सकता है. हालांकि ज्यादा योगदान करने का विकल्प अभी भी खुला रहेगा.

सवाल 12% PF कटौती का नियम खत्म हो गया है?

जवाब नहीं, 12% योगदान का नियम अभी भी लागू है. बदलाव सिर्फ इतना है कि यह 12% अब न्यूनतम रूप से 15,000 की वेज सीलिंग पर लागू होगा. इससे ऊपर का योगदान आपकी मर्जी के ऊपर है.

सवाल क्या यह नया नियम है या पहले से मौजूद व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है?

जवाब कई विशेषज्ञ इसे पूरी तरह नया नियम नहीं बल्कि पुरानी व्यवस्था को स्पष्ट और औपचारिक रूप देने वाला कदम मान रहे हैं. हालांकि इससे कंपनियों को वेज सीलिंग तक योगदान सीमित करने का स्पष्ट विकल्प जरूर मिल गया है.

सवाल क्या इस फैसले से इनहैंड सैलरी बढ़ जाएगी?

जवाब हां, अगर कर्मचारी का योगदान वास्तविक वेतन के बजाय 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर सीमित हो जाता है तो हर महीने कम राशि कटेगी. इससे कर्मचारी के हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ सकती है क्योंकि पीएफ के जरिए जो ज्यादा पैसा आपका कट जाता था वह कम कटेगा और आपके हाथ में ज्यादा तनख्वाह आएगी.

सवाल नए नियम से क्या पैसा निकालना आसान हो जाएगा

जवाब EPFO के नए नियमों के तहत अब सही PF क्लेम को सिर्फ 3 दिनों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कर्मचारियों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इसके साथ ही ऑटोसेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है और डिजिटल वेरिफिकेशन तथा कम कागजी प्रक्रिया के जरिए निकासी को आसान बनाया जा रहा है. हालांकि यह सुविधा मुख्य रूप से उन्हीं सदस्यों को मिलेगी जिनका UAN, आधार, बैंक खाता और KYC पूरी तरह अपडेट है.

सवाल अगर PF कम कटेगा तो रिटायरमेंट फंड कितना घट जाएगा?

जवाब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पहले कितना PF जमा हो रहा था और अब कितना जमा होगा. लंबे समय तक कम योगदान का असर चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से काफी बड़ा हो सकता है और अंतिम कॉर्पस लाखों रुपये कम हो सकता है.

सवाल क्या कर्मचारी अपनी मर्जी से ज्यादा PF जमा कर सकते हैं?

जवाब हां, कर्मचारी और नियोक्ता की सहमति होने पर वास्तविक बेसिक सैलरी पर या उससे अधिक भी PF योगदान जारी रखा जा सकता है. नए नियम ने इस विकल्प को खत्म नहीं किया है.

सवाल कम PF कटने से EPS पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब EPS में नियोक्ता का योगदान पहले से ही 15,000 की वेज सीलिंग तक सीमित है. इसलिए ज्यादातर कर्मचारियों की पेंशन गणना पर इस बदलाव का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

सवाल क्या रिटायरमेंट के समय मिलने वाला कॉर्पस छोटा हो जाएगा?

जवाब अगर कर्मचारी लंबे समय तक केवल न्यूनतम PF योगदान करता है तो रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल रकम पहले की तुलना में कम हो सकती है. इसकी सबसे बड़ी वजह कम निवेश और कम ब्याज अर्जित होना है.