बेबी कर रहे हैं प्लान, दांतों से जुड़ी ये छोटी सी आदत आ सकती है बहुत काम, जानें कैसे
बेबी प्लानिंग करने वाले कई प्रॉब्लम्स जैसे स्ट्रेस, नींद न आना और गलत खानपान को दूर करने पर फोकस करते हैं. इन सब के बीच लोग ओरल हाइजीन को नजरअंदाज कर देते हैं. फ्लोसिंग से मुंह की सफाई होती है लेकिन इससे क्रोनिक इंफ्लामेशन कंडीशन से भी बचा जा सकता है. डा.सांत्वना पयासी का कहना है कि हेल्दी दांत, हेल्दी मसूड़े हमारी पूरी हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है.
अगर आपके दांतमसूड़ों से खून आता है और मुंह से बदबू आती है या फिर दांतों के आसपास इंफेक्शन है तो इसका समयसमय पर इलाज करना चाहिए. इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे हेल्दी ओरल हेल्थ, बेबी प्लानिंग में अहम रोल निभा सकती है.
डॉक्टर सांत्वना ने कहा, प्रेगनेंसी के दौरान हार्मोनल चेंजेस की वजह से मसूड़े नॉर्मल से ज्यादा सेंसिटिव हो सकते हैं, जिससे पहले से हो रही समस्याएं और बढ़ सकती हैं. इसलिए प्रेगनेंसी से पहले ओरल हेल्थ का इवेलुएशन और जरूरी मेडिकेशन बहुत जरूरी है. मुंह की हेल्थ को ठीक रखने के लिए हमें डेली फ्लोसिंग भी करनी चाहिए. दांतों को साफ करने का ये तरीका बेबी प्लानिंग में हेल्प कर सकता है. जब टूथपिक से दांतों की क्लीनिंग की जाती है तो इससे गम हेल्थ डैमेज हो सकती है, जबकि फ्लोसिंग एक सेफ तरीका है. इससे हमारे दांत या मसूड़ों में खाना फंसता नहीं है.
फ्लोसिंग या क्लीनिंग न की जाए तो बैक्टीरियल इंफेक्शन बढ़ता है जिससे इंफ्लामेशन की समस्या हो सकती है. मसूड़ों की सूजन और प्लाक का जमाव भी इसके कारण कम होता है और ओरल हाइजीन बहुत अच्छी बनी रहती है.
फ्लोसिंग और प्रेगनेंसी का कनेक्शनफ्लोसिंग से हमारे दांतों को कैविटी से बचाकर इन्हें साफ रखने में मदद मिलती है. लेकिन ये मसूड़ों में सूजन से बचाने में भी कारगर है. इसके जरिए हम क्रोनिंक इंफ्लामेट्री कंडीशन से बच पाते हैं. दरअसल, शरीर में मौजूद सूजन गुड प्रडोक्टिव हेल्थ की सबसे बड़ी दुश्मनों में से एक है. जब इंफ्लामेशन है तो इससे स्पर्म की क्वालिटी, हार्मोनल बैलेंस और ओवरऑल फर्टिलिटी को नुकसान होता है. कई रिसर्च में सामने आया है कि मसूड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी पीरियडोंटल वाले पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी, हेल्दी मसूड़ों वाले पुरुषों की तुलना में कमजोर हो सकती है.