खेती के बिना भी कमा सकते हैं अच्छा मुनाफा, सरकार दे रही है बंपर सब्सिडी
बिहार सरकार के कृषि विभाग के तहत आने वाले उद्यान निदेशालय (Horticulture Directorate) ने राज्य में आधुनिक खेती को नई दिशा देने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने राज्य में दो 'टिश्यू कल्चर लैब' स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराना है।
इन लैब्स के जरिए तैयार किए गए पौधे न केवल अच्छी नस्ल के होंगे, बल्कि ये किसानों को किफायती दरों पर भी मिलेंगे। इससे किसानों की खेती की लागत कम होगी और उनकी आमदनी में इजाफा होगा।
सबसे खास बात यह है कि इस लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 2.42 करोड़ रुपये राज्य सरकार बतौर सब्सिडी देगी। बाकी की राशि आवेदक को खुद निवेश करनी होगी। यह उन उद्यमियों या संस्थाओं के लिए एक बेहतरीन मौका है जो कृषि क्षेत्र में बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं।
यह योजना न केवल एग्री-बिजनेस शुरू करने वालों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, बल्कि यह बिहार की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। अगर आप भी कृषि क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो 31 जनवरी से पहले आवेदन जरूर करें।
इन लैब्स के जरिए तैयार किए गए पौधे न केवल अच्छी नस्ल के होंगे, बल्कि ये किसानों को किफायती दरों पर भी मिलेंगे। इससे किसानों की खेती की लागत कम होगी और उनकी आमदनी में इजाफा होगा।
कितनी मिलेगी सब्सिडी?
यह बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार बहुत बड़ी आर्थिक मदद दे रही है। योजना के मुताबिक, बिहार में कुल दो टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की जाएंगी। एक लैब की कुल लागत लगभग 4.85 करोड़ रुपये आंकी गई है।सबसे खास बात यह है कि इस लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 2.42 करोड़ रुपये राज्य सरकार बतौर सब्सिडी देगी। बाकी की राशि आवेदक को खुद निवेश करनी होगी। यह उन उद्यमियों या संस्थाओं के लिए एक बेहतरीन मौका है जो कृषि क्षेत्र में बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं।
टिश्यू कल्चर तकनीक के फायदे
शायद आप सोच रहे होंगे कि आखिर टिश्यू कल्चर लैब इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं? दरअसल, इस तकनीक के कई बड़े फायदे हैं:- साल भर उत्पादन: टिश्यू कल्चर तकनीक से किसी भी मौसम में पौधों का उत्पादन किया जा सकता है। मौसम की मार का इस पर असर नहीं पड़ता।
- रोगमुक्त पौधे: इस तकनीक से तैयार पौधे बीमारियों से मुक्त होते हैं, जिससे फसल खराब होने का डर बहुत कम हो जाता है।
- दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण: जो पौधों की प्रजातियां लुप्त होने की कगार पर हैं, उन्हें इस तकनीक के जरिए बचाया जा सकता है और उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
आवेदन की अंतिम तिथि और प्रक्रिया
अगर आप इस योजना में दिलचस्पी रखते हैं और टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करना चाहते हैं, तो आपको जल्द कदम उठाना होगा। उद्यान निदेशालय ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।- अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2026 है। इसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- चयन प्रक्रिया: चूंकि लैब की संख्या सीमित (सिर्फ दो) है, इसलिए अगर लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो लाभार्थियों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाएगा।
कहां और कैसे करें आवेदन?
इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं उद्यान निदेशालय, बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रखें कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। फॉर्म भरते समय सभी जानकारी सही-सही भरें ताकि आपका आवेदन रद्द न हो।यह योजना न केवल एग्री-बिजनेस शुरू करने वालों के लिए एक बेहतरीन अवसर है, बल्कि यह बिहार की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाने में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। अगर आप भी कृषि क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो 31 जनवरी से पहले आवेदन जरूर करें।
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