LPG Crisis in India: गैस की कमी से महंगा हो सकता है होटल और रेस्टोरेंट का खाना
अगर आप बाहर जाकर खाना पसंद करते हैं या अक्सर होटल और रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं, तो आने वाले समय में आपकी जेब पर थोड़ा ज्यादा बोझ पड़ सकता है। देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर अब रेस्टोरेंट और होटल उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है।
इस संकट के कारण कई रेस्टोरेंट्स को अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर खाने की कीमतें बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो खाने की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
यह स्थिति खासकर उन शहरों में ज्यादा गंभीर होती जा रही है जहां बाहर खाने की संस्कृति काफी लोकप्रिय है, जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई।
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है।
इसके अलावा सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए गैस की सप्लाई को कुछ क्षेत्रों में सीमित किया है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।
कुछ जगहों पर सुबह के नाश्ते में मिलने वाले आइटम जैसे डोसा, पूरी और अन्य तले हुए व्यंजन अस्थायी रूप से हटाए जा रहे हैं। इसके बजाय ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्हें कम गैस में तैयार किया जा सके।
रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि यह कदम केवल गैस बचाने के लिए उठाया जा रहा है ताकि सीमित संसाधनों में भी व्यवसाय चलाया जा सके।
मुंबई जैसे बड़े शहर में लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद हो चुके हैं। अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो और भी कई प्रतिष्ठानों को अपने संचालन पर रोक लगानी पड़ सकती है।
कुछ जगहों पर रेस्टोरेंट्स ने अपने काम के घंटे भी कम कर दिए हैं ताकि गैस की खपत कम हो सके।
कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर ब्लैक मार्केट में ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ जगहों पर सिलेंडर 3000 से 4000 रुपये तक में बिकने की खबरें सामने आई हैं, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत इससे काफी कम होती है।
ऐसी स्थिति में छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने के स्टॉल चलाने वालों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है क्योंकि उनके पास ज्यादा स्टॉक रखने की सुविधा नहीं होती।
सबसे पहले रेस्टोरेंट्स खाने की कीमतें बढ़ा सकते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में खाने के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा ग्राहकों को मेन्यू में कम विकल्प भी मिल सकते हैं क्योंकि कई रेस्टोरेंट्स सीमित व्यंजन ही तैयार कर पाएंगे।
रेस्टोरेंट संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को स्थिर किया जाए ताकि कारोबार प्रभावित न हो। वहीं कुछ रेस्टोरेंट्स ने अस्थायी तौर पर इंडक्शन या इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प अपनाने की कोशिश भी शुरू की है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर इन विकल्पों को अपनाना आसान नहीं है क्योंकि अधिकांश व्यंजन पारंपरिक गैस किचन में ही बेहतर तरीके से तैयार होते हैं।
इस संकट के कारण कई रेस्टोरेंट्स को अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर खाने की कीमतें बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो खाने की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
यह स्थिति खासकर उन शहरों में ज्यादा गंभीर होती जा रही है जहां बाहर खाने की संस्कृति काफी लोकप्रिय है, जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई।
क्यों पैदा हुआ LPG का संकट
एलपीजी की कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाएं हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है।
इसके अलावा सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए गैस की सप्लाई को कुछ क्षेत्रों में सीमित किया है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।
रेस्टोरेंट्स को करना पड़ रहा है मेन्यू में बदलाव
गैस की कमी का असर सिर्फ कीमतों पर ही नहीं बल्कि मेन्यू पर भी दिखाई देने लगा है। कई रेस्टोरेंट्स ने ऐसे व्यंजन कम कर दिए हैं जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस लगती है।कुछ जगहों पर सुबह के नाश्ते में मिलने वाले आइटम जैसे डोसा, पूरी और अन्य तले हुए व्यंजन अस्थायी रूप से हटाए जा रहे हैं। इसके बजाय ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्हें कम गैस में तैयार किया जा सके।
रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि यह कदम केवल गैस बचाने के लिए उठाया जा रहा है ताकि सीमित संसाधनों में भी व्यवसाय चलाया जा सके।
कुछ रेस्टोरेंट्स को बंद भी करना पड़ा
स्थिति कुछ शहरों में इतनी गंभीर हो गई है कि कई रेस्टोरेंट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।मुंबई जैसे बड़े शहर में लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद हो चुके हैं। अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो और भी कई प्रतिष्ठानों को अपने संचालन पर रोक लगानी पड़ सकती है।
कुछ जगहों पर रेस्टोरेंट्स ने अपने काम के घंटे भी कम कर दिए हैं ताकि गैस की खपत कम हो सके।
काला बाज़ारी भी बढ़ने लगी
जहां मांग ज्यादा और सप्लाई कम होती है, वहां काला बाज़ारी का खतरा भी बढ़ जाता है।कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर ब्लैक मार्केट में ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ जगहों पर सिलेंडर 3000 से 4000 रुपये तक में बिकने की खबरें सामने आई हैं, जबकि इसकी आधिकारिक कीमत इससे काफी कम होती है।
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ऐसी स्थिति में छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने के स्टॉल चलाने वालों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है क्योंकि उनके पास ज्यादा स्टॉक रखने की सुविधा नहीं होती।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर
अगर गैस की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा।सबसे पहले रेस्टोरेंट्स खाने की कीमतें बढ़ा सकते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में खाने के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा ग्राहकों को मेन्यू में कम विकल्प भी मिल सकते हैं क्योंकि कई रेस्टोरेंट्स सीमित व्यंजन ही तैयार कर पाएंगे।
सरकार और उद्योग क्या कर रहे हैं
इस स्थिति को देखते हुए सरकार और उद्योग से जुड़े संगठन समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।रेस्टोरेंट संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को स्थिर किया जाए ताकि कारोबार प्रभावित न हो। वहीं कुछ रेस्टोरेंट्स ने अस्थायी तौर पर इंडक्शन या इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प अपनाने की कोशिश भी शुरू की है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर इन विकल्पों को अपनाना आसान नहीं है क्योंकि अधिकांश व्यंजन पारंपरिक गैस किचन में ही बेहतर तरीके से तैयार होते हैं।









