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BMC चुनाव: किसके हाथो में जाएगी बीएमसी की सत्ता? 15 जनवरी को होगा मतदान

कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम चुनाव के प्रचार खत्म होने के बाद जो शांति होनी चाहिए थी, वह मंगलवार की रात चीख-पुकार में बदल गई। खबर है कि डोम्बिवली में महायुति सरकार के दो प्रमुख घटक, बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।
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मामला वार्ड नंबर 29 का है, जहाँ तनाव इतना बढ़ गया कि नौबत मारपीट तक आ पहुंची। पुलिस के मुताबिक, बीजेपी उम्मीदवार के पति पर कथित तौर पर हमला किया गया। यह आरोप किसी विरोधी पार्टी पर नहीं, बल्कि सरकार में ही सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं पर लगा है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिवसेना के शिंदे गुट के उम्मीदवार नितिन पाटिल और रवि पाटिल को हिरासत में ले लिया है।

इस गिरफ्तारी के बाद डोम्बिवली का माहौल और गरमा गया। शास्त्री नगर अस्पताल, जहाँ घायलों को ले जाया गया था, उसके बाहर भारी हंगामा देखने को मिला। समर्थकों की भीड़ और नारेबाजी ने पुलिस के लिए चुनौती खड़ी कर दी। शिंदे गुट के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक आक्रामक हो गए हैं, जिससे इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। यह घटना बता रही है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।


महिलाओं के लिए राहत की खबर

एक तरफ जहाँ सड़कों पर तनाव है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने वोटिंग से ऐन पहले 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को साधने की बड़ी कोशिश की है। महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाडकी बहन योजना' के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में खुशियों की घंटी बजी है।

दिसंबर महीने की 1500 रुपये की किस्त महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। हालांकि, चर्चा जनवरी की एडवांस किस्त को लेकर भी थी, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों ने यहाँ लक्ष्मण रेखा खींच दी। आयोग के स्पष्ट निर्देश थे कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान किसी भी तरह का एडवांस या अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार ने नियमों का पालन करते हुए केवल दिसंबर की नियमित राशि ही जारी की है।


प्रचार थमा, पर प्रहार जारी

मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम गया, लेकिन नेताओं के बयानों के तीर अभी भी चल रहे हैं। मुंबई पुलिस ने मतदान के मद्देनजर शहर को हाई अलर्ट पर रखा है। हर किसी की नजर मुंबई पर है, क्योंकि BMC की सत्ता का रास्ता पूरे महाराष्ट्र की राजनीति की दशा और दिशा तय करता है।

प्रचार के अंतिम दौर में जिस तरह की बयानबाजी हुई, उसने माहौल को और गरमा दिया है:
  • हिंदू-मुस्लिम और बंटवारे की बात: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ठाकरे बंधुओं पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव गुट का काम हिंदुओं को बांटना रह गया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो मुस्लिम बहुल इलाकों में जाकर वे अपनी बातें रखें।
  • 'जय श्रीराम' वाले मेयर: बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं में वही मेयर बनेगा जो 'जय श्रीराम' बोलेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद पूरा माहौल भगवामय होने वाला है। विपक्ष ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है।
  • संजय राउत का पलटवार: शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी हर चुनाव में हिंदू-मुस्लिम का कार्ड खेलती है। राउत ने सवाल किया कि क्या बीजेपी बिना धर्म का सहारा लिए चुनाव लड़ सकती है? उन्होंने इसे स्थानीय मुद्दों से भटकाने की साजिश बताया।
  • नाना पटोले का तंज: कांग्रेस नेता नाना पटोले ने बीजेपी को 'दोहरे चरित्र' वाली पार्टी बताया। उन्होंने नागपुर में कहा कि बीजेपी को भगवान राम की याद सिर्फ चुनाव में ही आती है। पटोले का कहना था कि राजनीति में धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, बल्कि बात विकास और रोजगार पर होनी चाहिए।

हिजाब पर फिर छिड़ी बहस



सियासी गरमा-गरमी के बीच AIMIM नेता वारिस पठान ने हिजाब के मुद्दे को हवा दे दी। उन्होंने अपनी पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला देश की प्रधानमंत्री या मेयर बनेगी। पठान ने कहा कि संविधान हर किसी को आगे बढ़ने का हक देता है, चाहे वह हिजाब पहनती हो या नहीं।

कल होगा मतदान

इन तमाम विवादों, झड़पों और दावों के बीच कल जनता जनार्दन अपना फैसला सुनाएगी। डोम्बिवली की हिंसा ने यह तो साफ कर दिया है कि चुनावी रंजिश अब गठबंधन धर्म पर भी भारी पड़ रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि गुरुवार को पड़ने वाले वोट और शुक्रवार को आने वाले नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में क्या नया भूचाल लाते हैं। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए कमर कस ली है, लेकिन डोम्बिवली जैसी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।