Income Tax New Rules: बदल जाएगा इनकम टैक्स रिटर्न भरने का तरीका, टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी खबर
नए साल की शुरुआत के साथ ही देश के करदाताओं (Taxpayers) के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने आयकर की जटिलताओं को कम करने और पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 'आयकर अधिनियम 2025' को मंजूरी दे दी है। यह नया कानून दशकों पुराने वर्तमान आयकर नियमों की जगह लेगा। सरकारी स्तर पर इसके क्रियान्वयन की तैयारियां अब काफी तेज हो गई हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में टैक्स भरने का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है।
कब से लागू होगा नया कानून?
इस नए कानून को लागू करने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। इसका मतलब है कि अगले वित्तीय वर्ष से देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स नए नियमों और नई प्रक्रियाओं के दायरे में होंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को आधुनिक बनाना और इसे आज के डिजिटल दौर की वित्तीय गतिविधियों के अनुरूप ढालना है।
सीबीडीटी अध्यक्ष का महत्वपूर्ण संदेश
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने हाल ही में विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नए साल के अपने संदेश में अधिकारियों से कहा है कि वे नए कानून की बारीकियों को गहराई से समझें ताकि वे आम जनता और करदाताओं का सही मार्गदर्शन कर सकें। विभाग का जोर इस बात पर है कि टैक्स नियमों में होने वाले इस बड़े बदलाव के दौरान करदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण और सूचना सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
क्या-क्या बदलेगा आपके लिए?
नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत टैक्स संरचना का बुनियादी ढांचा तो काफी हद तक वैसा ही रहने की उम्मीद है, लेकिन फॉर्म भरने के तरीके और विभागीय प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
नए फॉर्म और सरल प्रक्रिया: सीबीडीटी द्वारा नए टैक्स रिटर्न फॉर्म विकसित किए जा रहे हैं। ये फॉर्म पहले के मुकाबले अधिक सरल होंगे ताकि एक आम आदमी भी बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के अपना टैक्स आसानी से भर सके।
डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम: नए कानून में तकनीक के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। डेटा हैंडलिंग और असेसमेंट के लिए अब ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इंसानी हस्तक्षेप कम होने से गलतियों की गुंजाइश भी कम रहेगी।
नोटिस और संचार का नया तरीका: आयकर विभाग और करदाताओं के बीच होने वाली बातचीत, जैसे कि नोटिस भेजना या जवाब देना, अब और भी सुव्यवस्थित होगी। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ने से जवाबदेही भी बढ़ेगी।
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
चूंकि यह कानून 2026 से प्रभावी होने जा रहा है, इसलिए करदाताओं के पास खुद को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय है। जानकारों का मानना है कि लोगों को अभी से अपने वित्तीय दस्तावेजों और कर संबंधी कागजों को व्यवस्थित रखना शुरू कर देना चाहिए। जैसे-जैसे विभाग नए फॉर्म और गाइडलाइंस जारी करेगा, वैसे-वैसे अपनी जानकारी को अपडेट रखना जरूरी होगा।
कब से लागू होगा नया कानून?
इस नए कानून को लागू करने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। इसका मतलब है कि अगले वित्तीय वर्ष से देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स नए नियमों और नई प्रक्रियाओं के दायरे में होंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को आधुनिक बनाना और इसे आज के डिजिटल दौर की वित्तीय गतिविधियों के अनुरूप ढालना है।सीबीडीटी अध्यक्ष का महत्वपूर्ण संदेश
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने हाल ही में विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नए साल के अपने संदेश में अधिकारियों से कहा है कि वे नए कानून की बारीकियों को गहराई से समझें ताकि वे आम जनता और करदाताओं का सही मार्गदर्शन कर सकें। विभाग का जोर इस बात पर है कि टैक्स नियमों में होने वाले इस बड़े बदलाव के दौरान करदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण और सूचना सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।You may also like
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क्या-क्या बदलेगा आपके लिए?
नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत टैक्स संरचना का बुनियादी ढांचा तो काफी हद तक वैसा ही रहने की उम्मीद है, लेकिन फॉर्म भरने के तरीके और विभागीय प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। नए फॉर्म और सरल प्रक्रिया: सीबीडीटी द्वारा नए टैक्स रिटर्न फॉर्म विकसित किए जा रहे हैं। ये फॉर्म पहले के मुकाबले अधिक सरल होंगे ताकि एक आम आदमी भी बिना किसी विशेषज्ञ की मदद के अपना टैक्स आसानी से भर सके।
डिजिटल और ऑटोमेटेड सिस्टम: नए कानून में तकनीक के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। डेटा हैंडलिंग और असेसमेंट के लिए अब ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इंसानी हस्तक्षेप कम होने से गलतियों की गुंजाइश भी कम रहेगी।
नोटिस और संचार का नया तरीका: आयकर विभाग और करदाताओं के बीच होने वाली बातचीत, जैसे कि नोटिस भेजना या जवाब देना, अब और भी सुव्यवस्थित होगी। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ने से जवाबदेही भी बढ़ेगी।









