बड़ी राहत! आधे-अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब नहीं देना होगा भारी टोल, जानें मोदी सरकार का नया नियम
भारत में हाईवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे शुल्क नियमों में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। 15 फरवरी 2026 से लागू हुए ये नए नियम उन यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं जो अक्सर निर्माणाधीन या आधे अधूरे एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करते हैं।
अब अधूरी सुविधा के लिए नहीं देना होगा पूरा पैसा
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई नया एक्सप्रेसवे बनता है तो उसके कुछ हिस्सों को यातायात के लिए खोल दिया जाता है। चूंकि एक्सप्रेसवे पर सफर तेज और सुगम होता है इसलिए रेलवे और साधारण हाईवे की तुलना में यहाँ 25 प्रतिशत तक अधिक टोल वसूला जाता है। लेकिन समस्या तब आती थी जब एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार नहीं होता था और यात्रियों को डायवर्जन या निर्माण कार्य के कारण देरी का सामना करना पड़ता था। फिर भी उनसे प्रीमियम यानी महंगा टोल ही लिया जाता था।
अब नए नियमों के मुताबिक अगर कोई नेशनल एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक (End-to-End) पूरी तरह चालू नहीं है तो उसके तैयार हिस्से पर प्रीमियम रेट के बजाय साधारण नेशनल हाईवे वाली दर से ही टोल लिया जाएगा। यानी जब तक आपको पूरी सुविधा नहीं मिलती तब तक आपको महंगा शुल्क देने की जरूरत नहीं है।
इस बदलाव के पीछे का मुख्य उद्देश्य
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के इस कदम के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
यात्रियों को प्रोत्साहन: कम टोल होने से लोग पुराने और भीड़भाड़ वाले रास्तों को छोड़कर एक्सप्रेसवे के तैयार हिस्सों का इस्तेमाल करेंगे।
ट्रैफिक मैनेजमेंट: समानांतर चल रहे पुराने नेशनल हाईवे पर गाड़ियों का दबाव कम होगा जिससे जाम की स्थिति नहीं बनेगी।
प्रदूषण में कमी: जब गाड़ियां बिना रुके और बिना जाम में फंसे चलेंगी तो ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण भी कम होगा।
पारदर्शिता: यह नियम सुनिश्चित करता है कि जनता से केवल उतनी ही सुविधा का पैसा लिया जाए जितनी उन्हें वास्तव में मिल रही है।
ये नियम कब तक लागू रहेंगे?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) संशोधन नियम 2026' के तहत यह राहत फिलहाल एक साल के लिए दी गई है। यदि एक साल के भीतर एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार होकर चालू हो जाता है तो पुरानी प्रीमियम दरें वापस लागू हो जाएंगी। लेकिन जब तक निर्माण जारी है तब तक आपको कम पैसे ही चुकाने होंगे।
वाहन मालिकों के लिए अन्य जरूरी अपडेट
टोल शुल्क में बदलाव के साथ साथ कुछ अन्य डिजिटल बदलाव भी चर्चा में हैं। अब फास्टैग (FASTag) का इस्तेमाल और भी सख्त कर दिया गया है। अगर आपके वाहन पर फास्टैग नहीं है तो आपको कैश में दोगुना भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं 1 फरवरी 2026 से नए फास्टैग के लिए केवाईसी (KYV) प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है जिससे नए वाहन मालिकों को बार-बार वेरिफिकेशन के झंझट से मुक्ति मिल गई है।
हाईवे पर आपका सफर अब न केवल सस्ता होगा बल्कि सरकार की इस नई नीति से ज्यादा तर्कसंगत और सुखद भी होने वाला है।
अब अधूरी सुविधा के लिए नहीं देना होगा पूरा पैसा
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई नया एक्सप्रेसवे बनता है तो उसके कुछ हिस्सों को यातायात के लिए खोल दिया जाता है। चूंकि एक्सप्रेसवे पर सफर तेज और सुगम होता है इसलिए रेलवे और साधारण हाईवे की तुलना में यहाँ 25 प्रतिशत तक अधिक टोल वसूला जाता है। लेकिन समस्या तब आती थी जब एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार नहीं होता था और यात्रियों को डायवर्जन या निर्माण कार्य के कारण देरी का सामना करना पड़ता था। फिर भी उनसे प्रीमियम यानी महंगा टोल ही लिया जाता था। अब नए नियमों के मुताबिक अगर कोई नेशनल एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक (End-to-End) पूरी तरह चालू नहीं है तो उसके तैयार हिस्से पर प्रीमियम रेट के बजाय साधारण नेशनल हाईवे वाली दर से ही टोल लिया जाएगा। यानी जब तक आपको पूरी सुविधा नहीं मिलती तब तक आपको महंगा शुल्क देने की जरूरत नहीं है।
इस बदलाव के पीछे का मुख्य उद्देश्य
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के इस कदम के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं: यात्रियों को प्रोत्साहन: कम टोल होने से लोग पुराने और भीड़भाड़ वाले रास्तों को छोड़कर एक्सप्रेसवे के तैयार हिस्सों का इस्तेमाल करेंगे।
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ट्रैफिक मैनेजमेंट: समानांतर चल रहे पुराने नेशनल हाईवे पर गाड़ियों का दबाव कम होगा जिससे जाम की स्थिति नहीं बनेगी।
प्रदूषण में कमी: जब गाड़ियां बिना रुके और बिना जाम में फंसे चलेंगी तो ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण भी कम होगा।
पारदर्शिता: यह नियम सुनिश्चित करता है कि जनता से केवल उतनी ही सुविधा का पैसा लिया जाए जितनी उन्हें वास्तव में मिल रही है।
ये नियम कब तक लागू रहेंगे?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) संशोधन नियम 2026' के तहत यह राहत फिलहाल एक साल के लिए दी गई है। यदि एक साल के भीतर एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार होकर चालू हो जाता है तो पुरानी प्रीमियम दरें वापस लागू हो जाएंगी। लेकिन जब तक निर्माण जारी है तब तक आपको कम पैसे ही चुकाने होंगे।वाहन मालिकों के लिए अन्य जरूरी अपडेट
टोल शुल्क में बदलाव के साथ साथ कुछ अन्य डिजिटल बदलाव भी चर्चा में हैं। अब फास्टैग (FASTag) का इस्तेमाल और भी सख्त कर दिया गया है। अगर आपके वाहन पर फास्टैग नहीं है तो आपको कैश में दोगुना भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं 1 फरवरी 2026 से नए फास्टैग के लिए केवाईसी (KYV) प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है जिससे नए वाहन मालिकों को बार-बार वेरिफिकेशन के झंझट से मुक्ति मिल गई है। हाईवे पर आपका सफर अब न केवल सस्ता होगा बल्कि सरकार की इस नई नीति से ज्यादा तर्कसंगत और सुखद भी होने वाला है।









