सुप्रीम कोर्ट में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए सरकार के ही दो बड़े संगठन, एक ने दी हरी झंडी तो दूसरा हुआ 'लाल'
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में ग्रीन पटाखों को लेकर केंद्र सरकार के ही दो बड़े संगठन एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए। देश में नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों के कमर्शियल प्रोडक्शन की इजाजत देने पर कोई आम सहमति नहीं बन पाई है। केंद्र ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कमर्शियल प्रोडक्शन पर फैसला लेने को कहा है।
नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखे के फॉर्मूले को लेकर अलग-अलग राय
पर्यावरण मंत्रालय ने दिया ये हलफनामा

ग्रीन पटाखे: 50 फीसदी कम हो प्रदूषण
CSIR-NEERI की रिपोर्ट में क्या कहा गया है
बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कैसे
बोर्ड ने आगे कहा, 'PM10 और PM2.5 के स्तर में बताई गई कमी की तुलना बेहतर कम-उत्सर्जन वाले पटाखों और बिना बेरियम के बनाए गए ग्रीन पटाखों से नहीं की गई है, जिससे यह दावा अधूरा और अनिर्णायक हो जाता है।'
नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखे के फॉर्मूले को लेकर अलग-अलग राय
- टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NEERI) ने नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखे के फॉर्मूले को मंजूरी दी है और कहा है कि इनसे प्रदूषण का स्तर 40-60% तक कम होता है।
- वहीं, इसके उलट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि इन पटाखों में अभी भी बेरियम नाइट्रेट होता है। इस केमिकल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है, ऐसे में इन्हें मंजूरी नहीं दी जा सकती।
पर्यावरण मंत्रालय ने दिया ये हलफनामा
- सरकार के इन संगठनों के परस्पर विरोधी विचारों के बीच फंसे पर्यावरण मंत्रालय ने इस मामले में एक हलफनामा दायर किया और इस मामले पर फैसला लेने का काम सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया।
- मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन फॉर्मूलों को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के पास भेजा गया था, जो विस्फोटक पदार्थों के लिए रेगुलेटरी बॉडी है, और उसने नए फॉर्मूलों के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी किया था।
ग्रीन पटाखे: 50 फीसदी कम हो प्रदूषण
- CPCB ने ग्रीन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने CSIR-NEERI से कहा था कि वे पटाखे बनाने वालों के साथ मिलकर ऐसे ग्रीन या कम प्रदूषण वाले पटाखे बनाएं जिनसे प्रदूषण 50 फीसदी से ज्यादा कम हो।
- इसके बाद, तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (TANFAMA) ने नई पीढ़ी के पटाखे बनाने के तरीके तैयार किए, जिनमें बेरियम साल्ट/नाइट्रेट की मात्रा कम रखी गई और दूसरे ऑक्सीडाइज़र का इस्तेमाल किया गया, ताकि पार्टिकुलेट एमिशन (कणों का उत्सर्जन) 50 फीसदी से ज्यादा कम हो सके।
CSIR-NEERI की रिपोर्ट में क्या कहा गया है
- CSIR-NEERI की रिपोर्ट के मुताबिक, PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 फीसदी तक की कमी आई। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि रोशनी देने वाले पटाखों जैसे कि फ्लावरपॉट, स्पार्कलर, चक्कर, पेंसिल और ट्विंकलिंग स्टार्स और इनके हाइब्रिड के लिए इन तरीकों को कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) के लिए माना जा सकता है।
- इसने जुड़े हुए पटाखों (जिन्हें 'लड़ी' कहा जाता है) के निर्माण को भी मंज़ूरी दी, जिन पर कोर्ट के आदेश के तहत प्रतिबंध लगा हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया कि जुड़े हुए पटाखों से पार्टिकुलेट मैटर (PM) के उत्सर्जन में लगभग 30% और ठोस कचरे के उत्पादन में 32% तक की कमी आई।
बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कैसे
- CSIR-NEERI की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए CPCB ने पूछा कि पटाखों में बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसकी इजाजत देना कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा।
- बोर्ड ने कहा, 'इस कोर्ट ने 23 अक्टूबर, 2018 के आदेश के जरिए पटाखों में बेरियम साल्ट के इस्तेमाल पर साफ तौर पर प्रतिबंध लगा दिया था। ऐसे में बेरियम कंपाउंड वाले किसी भी तरीके का इस्तेमाल उस आदेश का उल्लंघन है। भले ही यह कम हो।'
बोर्ड ने आगे कहा, 'PM10 और PM2.5 के स्तर में बताई गई कमी की तुलना बेहतर कम-उत्सर्जन वाले पटाखों और बिना बेरियम के बनाए गए ग्रीन पटाखों से नहीं की गई है, जिससे यह दावा अधूरा और अनिर्णायक हो जाता है।'
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