OTT 'सांस्कृतिक प्रदूषण'है...RSS ने सुझाव के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाया, फिल्म सेंसर बोर्ड जैसी संस्था की तैयारी

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नई दिल्ली: आरएसएस ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट की समीक्षा के लिए एक पैनल बनाया है। यह एक अनौपचारिक एक्सपर्ट पैनल है, जो यह सुझाव देगा कि ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को कैसे नियंत्रित और नियमित किया जाना चाहिए, जिसे संघ 'सांस्कृतिक प्रदूषण' बताता है।


आरएसएस की ओर से यह कदम संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस विजयादशमी संबोधन के करीब दो साल बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के कुछ कंटेंट को कानूनी तौर पर नियंत्रित करने का आह्वान किया था और इसके कुछ कंटेंट के 'नैतिक भ्रष्टाचार' कहा था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आरएसएस के एक्सपर्ट पैनल की पहली बैठक हो भी चुकी है।
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ओटीटी पर आरएसएस के पैनल में कौन लोग हैं
  • आरएसएस ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी तौर पर नियंत्रित करने का सुझाव देने के लिए कुछ महीने पहले ही यह पैनल गठित किया।
  • इस पैनल में कुछ पूर्व वाइस चांसलरों और शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में काम कर चुके आरएसएस प्रचारकों को शामिल किया गया है।
  • संघ का यह पैनल अपने सुझावों को अंतिम रूप देने से पहले उसमें कानून के जानकारों की सलाहों को भी शामिल करेगा।


केंद्र को अपनी सिफारिशें सौंपेगा आरएसएस पैनलसंघ का यह एक्सपर्ट पैनल ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट को नियमित करने के लिए अपने जो भी सुझाव देगा, उसे आरएसएस केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्र सरकार के अन्य संबंधित संस्थाओं को सौंपेगा।



अभी ओटीटी कंटेंट के लिए सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं
  • इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रिलीज करने से पहले उन्हें उन सर्टिफिकेशन प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ता है, जैसा थियेटर में फिल्मों को रिलीज करने से पहले गुजरना होता है।
  • अभी इस तरह की स्ट्रीमिंग सेवाएं इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2021 से नियमित होती हैं।

कई ओटीटी प्लेटफॉर्म पहले ही हो चुके हैं बंद
  • वैसे केंद्र सरकार ने गैर-कानूनी और अश्लील कंटेंट के खिलाफ कुछ कदम पहले ही से उठाए हैं।
  • जुलाई, 2026 में सरकार ने लोकसभा को बताया था कि भारत में दो साल में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म को बंद कर दिए गए है, क्योंकि वह अश्लील कंटेंट दिखा रहे थे और उन्होंने आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम का उल्लंघन किया।
  • एक संसदीय समिति ने भी ऐसे प्लेटफॉर्म पर कड़ी निरगरानी रखने के लिए पोस्ट-रिलीज पैनल पर मंथन किया है।
  • वहीं सूचना और प्रसारण मंत्रालय अपने स्तर पर एक वैधानिक फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है।