थोड़े से 'नमक' ने उड़ा दी RSS की नींद...सीजियम-137 क्या इतना खतरनाक है?

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नई दिल्ली/नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर स्थित मुख्यालय और स्मृति मंदिर पर रेडियोएक्टिव हमले की धमकी मिली है। एक गुमनाम पत्र में ‘डीएसएस’ नाम के संगठन की ओर से यह धमकी दी गई है। पत्र को नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ रविंद्रकुमार सिंगल को भेजा गया। इसमें दावा किया गया है कि आरएसएस मुख्यालय, रेशीमबाग स्मृतिमंदिर और मेट्रो में ‘सीजियम-137’ नाम के एक रेडियोएक्टिव पाउडर डाला गया है। फिलाहल, मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। जानते हैं यह रेडियोएक्टिव पाउडर क्या है और यह कितना खतरनाक है?
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सीजियम-137 क्या है और यह कितना खतरनाक
  • द न्यूक्लियर थ्रीट इनीशिएटिव (NTI) के अनुसार, सीजियम-137 (Cs-137) एक हाई रेडियोएक्टिव तत्व है जो यूरेनियम या प्लूटोनियम के नाभिकीय विखंडन के दौरान बीटा और गामा विकिरण निकालते हुए टूटता रहता है। यह ठोस और नमक जैसी अवस्था में दिखाई देता है। कैप्सूल से टूटने पर यह आसानी से फैल सकता है और रेडियोएक्टिव विकिरण फैला सकता है।
  • सीजियम-137 पाउडर के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को यह घाव वाली त्वचा, सांस लेने या दूषित भोजन के जरिये शरीर में प्रवेश कर सकता है। जब सीजियम-137 शरीर में प्रवेश करता है, तो यह कई अंगों के कोमल ऊतकों में जमा हो जाता है और इन अंगों में विकिरण फैलाता है। इससे उन अंगों में कैंसर होने का खतरा होता है, जहां सीजियम-137 जमा होता है।



आसानी से भाप बनकर उड़ना बेहद घातक
  • सीजियम-137 का प्रोडॅक्शन बमों और रिएक्टरों जैसी परमाणु विखंडन प्रतिक्रियाओं में होता है। यह आसानी से भाप बनकर उड़ जाता है। ऐसे में यह बेहद गर्म वातावरणों से यह आसानी से फैल सकता है, जिससे यह पैंक्रियाज में जमा होकर बेहद घातक हो सकता है।
  • अगर इसे गलत तरीके से संभाला जाए या जानबूझकर दुरुपयोग किया जाए तो यह घातक भी हो सकता है। यह पानी में आसानी से घुल जाता है, जिससे इसका खतरा बढ़ जाता है।


मरीजों को ब्लड चढ़ाने में भी होता है इस्तेमाल
डॉक्टर सीजियम-137 का इस्तेमाल सीजियम क्लोराइड नमक के रूप में करते हैं। मरीजो को ब्लड चढ़ाने से पहले उस पर रेडियोथेरेपी की जाती है, ताकि ब्लड चढ़ाने के दौरान ग्राफ्ट-बनाम-होस्ट रोग न हो सके, जो बेहद दुर्लभ टाइप की बीमारी है। इस बीमारी में श्वेत रक्त कोशिकाएं प्राप्तकर्ता के ऊतकों पर हमला करती हैं। ऐसे में सीजियम क्लोराइड से ट्रीटमेंट किसी की जिंदगी बचाने में सहायक है।


पानी में घुलनशील होने के चलते ज्यादा खतरनाक
  • दुर्भाग्यवश, सीजियम क्लोराइड नमक का दुरुपयोग दुर्घटनावश या जानबूझकर किए गए आतंकवादी कृत्य के कारण स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। यह पदार्थ टेल्कम पाउडर की तरह फैल सकता है और पानी में भी घुलनशील होता है।
  • यह इतना ज्यादा रेडियोधर्मी है कि यह कंक्रीट जैसी सतहों पर आसानी से चिपक जाता है। सीजियम-137 की अर्ध आयु 30 वर्ष है, जिसका मतलब यह है कि यह लंबे समय तक मौजूद रहेगा और गंभीर खतरा पैदा करेगा।


सीजियम-137: कैसे करते हैं आतंकी इसका इस्तेमाल
अगर आतंकवादी सीजियम-137 पाउडर को हासिल कर लेते हैं तो वह इसका इस्तेमाल हवा में विकिरण फैलाने वाले उपकरणों में कर सकते हैं। जैसे कि डर्टी बम में भी सीजियम क्लोराइड का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे हथियार सीधे संपर्क में आने वाले लोगों को मार सकते हैं या उन्हें घायल कर सकते हैं। एक बड़े इलाके में यह लंबे समय तक रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैला सकते हैं।


सीजियम-137 के चलते 11 लाख को कराना पड़ा इलाज
  • सीजियम-137 से जुड़ी कई वैश्विक घटनाएं हुई हैं, जो इस रेडियोधर्मी आइसोटोप के गंभीर जोखिमों को बयां करती हैं। 13 सितंबर, 1987 को ब्राजील के गोइयाना में सीजियम-137 भरे एक कैप्सूल के फटने से चार लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • यह लैटिन अमेरिका के इतिहास की सबसे भीषण रेडियोलॉजिकल आपदाओं में से एक मानी गई। इस घटना ने इस आइसोटोप से पैदा हुए जोखिम को उजागर किया। बड़े पैमाने पर संदूषण के कारण कई इमारतों को ध्वस्त करना पड़ा और लगभग 112,000 लोगों ने विकिरण के संपर्क में आने के डर से इलाज करवाया।


सीजियम-137 के संपर्क में आने पर कितना होगा खतरा
  • मतली, उल्टी, भूख न लगना
  • पेट दर्द, दस्त, डिहाइड्रेशन।
  • त्वचा सूजती है और गलने लगती है।
  • बालों का झड़ना, मुंह का सड़ना।
  • भ्रम, दौरे पड़ना और कोमा और बाद में मृत्यु।


रेडियोएक्टिव प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करना चाहिए
  • किसी भी वस्तु को छूने के बाद संक्रमण को कम करने के लिए आंखों को साफ पानी से धोएं।
  • हाथों को धोएं, नहाएं, बाल धोएं और तुरंत कपड़े बदलें।
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण की जांच के लिए कपड़ों को सीलबंद थैली में रखें।
  • स्वास्थ्य की निगरानी करें और रेडियोधर्मिता के प्रसार को नियंत्रित करें।
  • किसी भी वस्तु को न छुएं, धूम्रपान न करें, खाना-पीना कम से कम करें।


क्या सीजियम-137 का कोई इलाज है?
  • स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में कहा गया है कि गोइयानिया घटना से सीजियम-137 के इलाज के एक ऐसे तरीके के बारे में जानकारी मिलती है, जो बहुत हद तक सफल रही थी। यह इलाज फेरिक फेरोसायनाइड के जरिये होता है, जिसे प्रशियन ब्लू के नाम से भी जाना जाता है। यह एक धातु कार्बनिक ढांचा पदार्थ है। विद्युत रसायनज्ञ और बैटरी वैज्ञानिक लंबे समय से इलेक्ट्रोक्रोमिक उपकरणों में प्रशियन ब्लू की संरचना का उपयोग करते आ रहे हैं क्योंकि पोटेशियम और सीजियम जैसे क्षारीय आयन इसकी संरचना में तेजी से समाहित हो जाते हैं।
  • प्रशियन ब्लू में इन आयनों के प्रति इतनी ज्यादा आत्मीयता होती है कि गोइयानिया घटना के दौरान और बाद में इसे सीजियम-137 के संपर्क में आने वालों का इससे इलाज किया गया है। उन्हें हर दिन 10 ग्राम तक प्रशियन ब्लू की खुराक दी गई। गोइयानिया घटना से बचे लोगों के बाद के विश्लेषण में पाया गया कि प्रशियन ब्लू देने से सीजियम-137 के संपर्क में आने में लगभग 70% की कमी आई। हालांकि, ये सभी खुराक जांच के बाद डॉक्टरों की सलाह पर दी गई थी।