भारत के पास 'होर्मुज' जैसा हथियार, छटपटा कर रह जाएगा पाकिस्तान; उत्तराधिकारी वाला दाव नहीं आएगा काम
नई दिल्लीः भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि एक फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारत के जल संसाधन मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा है कि नई दिल्ली यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि पाकिस्तान को सिंधु का पानी मिलना बंद हो जाए और आने वाले सालों में पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी न मिले। वहीं सी. आर. पाटिल के बयान पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने युद्ध की धमकी तक दे डाली। हालांकि पाकिस्तान कोई भी पैंतरा चले, या धमकी दें लेकिन सिंधु नदी भारत के लिए होर्मुज जैसा हथियार है। अगर भारत इस नदी बेसिन से बहने वाले पानी में थोड़ा बहुत भी हेरफेर कर दे तो पाकिस्तान के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

सिंधु का पानी रोकने से बौखलाया पाकिस्तानबहरहाल, पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से सिंधु का पानी रोके जाने से पाकिस्तान बौखला गया है। वह सिंधु नदी पर अपना दावा मजबूत करने के लिए तमाम पैंतरे अपना रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के विरोध को एक सभ्यतागत दावे से जोड़ दिया। उन्होंने मोहनजो-दड़ो और सिंधु घाटी सभ्यता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पाकिस्तान सिंधु का असली संरक्षक है। उनका कहना है कि पाकिस्तान का सिंधु नदी पर ऐतिहासिक अधिकार है।
इतिहास को पाकिस्तान ने बनाया नया पैंतराजो पाकिस्तान वर्षों से छात्रों को यह पढ़ाता रहा है कि उसका इतिहास 712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध की जीत के साथ शुरू हुआ, उसने सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजो-दड़ो में नई खुदाई शुरू की है। 1965 में अमेरिकी पुरातत्वविद् जॉर्ज डेल्स द्वारा खुदाई किए जाने के बाद से यह जगह काफी हद तक अछूती रही थी। यह खुदाई जून 2025 में 5,000 साल पुराने इस महानगर में शुरू हुई।
सिंधु घाटी सभ्यता और इस्लाम-पूर्व विरासत का हवालाअसल में, पाकिस्तान लगातार सिंधु घाटी सभ्यता और अपनी इस्लाम-पूर्व विरासत का हवाला देकर सिंधु की विरासत के मुख्य उत्तराधिकारी के तौर पर अपने दावे को मजबूत कर रहा है। साथ ही, वह सिंधु घाटी की कहानी का इस्तेमाल भारत को चुनौती देने और सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर अपने दावों को मजबूत करने के लिए कर रहा है।
पाकिस्तान की सिंधु पर दलील गलतएक्सपर्ट्स कहते हैं कि पाकिस्तान को 5,000 साल पुरानी नदी-सभ्यता का उत्तराधिकारी बताकर, इस्लामाबाद एक ऐसे मामले में ऐतिहासिक, सभ्यतागत और भावनात्मक पहलू जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो असल में कानूनी और जल-विज्ञान से जुड़ा विवाद है। यह तर्क कि पाकिस्तान का सिंधु नदी पर खास अधिकार है क्योंकि मोहनजो-दड़ो, हड़प्पा और नदी का ज़्यादातर हिस्सा उसके यहां है, असल में गलत है।
सिंधु का पानी रोकने से बौखलाया पाकिस्तानबहरहाल, पहलगाम हमले के बाद भारत की तरफ से सिंधु का पानी रोके जाने से पाकिस्तान बौखला गया है। वह सिंधु नदी पर अपना दावा मजबूत करने के लिए तमाम पैंतरे अपना रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के विरोध को एक सभ्यतागत दावे से जोड़ दिया। उन्होंने मोहनजो-दड़ो और सिंधु घाटी सभ्यता का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पाकिस्तान सिंधु का असली संरक्षक है। उनका कहना है कि पाकिस्तान का सिंधु नदी पर ऐतिहासिक अधिकार है।
इतिहास को पाकिस्तान ने बनाया नया पैंतराजो पाकिस्तान वर्षों से छात्रों को यह पढ़ाता रहा है कि उसका इतिहास 712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम द्वारा सिंध की जीत के साथ शुरू हुआ, उसने सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजो-दड़ो में नई खुदाई शुरू की है। 1965 में अमेरिकी पुरातत्वविद् जॉर्ज डेल्स द्वारा खुदाई किए जाने के बाद से यह जगह काफी हद तक अछूती रही थी। यह खुदाई जून 2025 में 5,000 साल पुराने इस महानगर में शुरू हुई।
सिंधु घाटी सभ्यता और इस्लाम-पूर्व विरासत का हवालाअसल में, पाकिस्तान लगातार सिंधु घाटी सभ्यता और अपनी इस्लाम-पूर्व विरासत का हवाला देकर सिंधु की विरासत के मुख्य उत्तराधिकारी के तौर पर अपने दावे को मजबूत कर रहा है। साथ ही, वह सिंधु घाटी की कहानी का इस्तेमाल भारत को चुनौती देने और सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर अपने दावों को मजबूत करने के लिए कर रहा है।
पाकिस्तान की सिंधु पर दलील गलतएक्सपर्ट्स कहते हैं कि पाकिस्तान को 5,000 साल पुरानी नदी-सभ्यता का उत्तराधिकारी बताकर, इस्लामाबाद एक ऐसे मामले में ऐतिहासिक, सभ्यतागत और भावनात्मक पहलू जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो असल में कानूनी और जल-विज्ञान से जुड़ा विवाद है। यह तर्क कि पाकिस्तान का सिंधु नदी पर खास अधिकार है क्योंकि मोहनजो-दड़ो, हड़प्पा और नदी का ज़्यादातर हिस्सा उसके यहां है, असल में गलत है।
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