40 साल बाद जादुई नंबर के करीब बीजेपी, राज्यसभा में राजीव गांधी के कार्यकाल के बाद अब मोदी सरकार की बारी
नई दिल्ली: राज्यसभा में बीजपी की संख्या में और अधिक इजाफा होने वाला है। यह तत्काल बढ़ोतरी पश्चिम बंगाल से होगी। 24 जुलाई को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए बंगाल में उपचुनाव होने हैं और BJP के इन तीनों ही सीटों पर जीत लगभग तय है। पश्चिम बंगाल में BJP सत्ता में है और विधानसभा में पार्टी के पास इतनी संख्या है कि वह आसानी से इन तीनों सीटों पर जीत दर्ज कर लेगी उसे किसी बड़ी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। ये सीटें तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं, जो बाद में BJP में शामिल हो गए। तीन सीटों पर जीत के साथ ही बीजेपी साधारण बहुमत से सिर्फ 6 सीट दूर रह जाएगी।

1986 के बाद बन रहा यह संयोग
तीन राज्यसभा सीटों पर जीत के साथ ही राज्यसभा की मौजूदा संख्या में साधारण बहुमत के लिए जरूरी 123 सीटों के मुकाबले BJP सिर्फ छह सीटें पीछे है। पिछली बार किसी एक राजनीतिक दल को राज्यसभा में बहुमत 1986 में मिला था, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पास जरूरी संख्या बल था। हालांकि BJP के पास अभी भी अपने दम पर बहुमत नहीं है लेकिन NDA की 152 सीटों की संख्या के साथ वह यहां काफी मजबूत स्थिति में है।
नजर अब आने वाले मॉनसून सत्र पर
पहले टीएमसी और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी में फूट के बाद संसद में एनडीए की ताकत बढ़ी है। साथ ही पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में सरकार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संवैधानिक कानून पेश करेगी, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल की काफी अधिक चर्चा है। संसद के मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी गुणा गणित और हलचल तेज हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा संवैधानिक संशोधनों की होगी। संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक है, और इस हिसाब से राज्यसभा में पूर्ण प्रभावी संख्या में सदस्य मतदान करते हैं तो 166 सदस्य दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करते हैं।
1986 के बाद बन रहा यह संयोग
तीन राज्यसभा सीटों पर जीत के साथ ही राज्यसभा की मौजूदा संख्या में साधारण बहुमत के लिए जरूरी 123 सीटों के मुकाबले BJP सिर्फ छह सीटें पीछे है। पिछली बार किसी एक राजनीतिक दल को राज्यसभा में बहुमत 1986 में मिला था, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पास जरूरी संख्या बल था। हालांकि BJP के पास अभी भी अपने दम पर बहुमत नहीं है लेकिन NDA की 152 सीटों की संख्या के साथ वह यहां काफी मजबूत स्थिति में है।
नजर अब आने वाले मॉनसून सत्र पर
पहले टीएमसी और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी में फूट के बाद संसद में एनडीए की ताकत बढ़ी है। साथ ही पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में सरकार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संवैधानिक कानून पेश करेगी, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल की काफी अधिक चर्चा है। संसद के मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी गुणा गणित और हलचल तेज हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा संवैधानिक संशोधनों की होगी। संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक है, और इस हिसाब से राज्यसभा में पूर्ण प्रभावी संख्या में सदस्य मतदान करते हैं तो 166 सदस्य दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करते हैं।
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