तमिलनाडु सीएम थलपति विजय की सुप्रीम कोर्ट में बहुत बड़ी जीत, करूर भगदड़ केस में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक

Newspoint
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय को निजी तौर पर बहुत राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को करूर भगदड़ हादसे के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने पर रोक लगाने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को रोक दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने तमिलनाडु सरकार की ओर से मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश जारी किया है।
Hero Image


'हाई कोर्ट कैसे दखल दे सकता है?'
  • इस केस में तमिलनाडु सरकार की ओर से कांग्रेस नेता और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी और सीनियर वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए।
  • लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि 'अगर सरकार मौत के बाद अनुच्छेद 162 के तहत नीतिगत फैसले से कुछ देना (दया के आधार पर नौकरी) चाहती है, तो हाई कोर्ट कैसे दखल दे सकता है? '
'यहां राजनीति मत लाइए'
  • इस दौरान एक राजनीतिक दल की ओर से एडवोकेट वेलन ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी राज्य की मर्जी से नहीं हो सकती।
  • उन्होंने दलील दी कि जो पार्टी भगदड़ के लिए जिम्मेदार थी, वही आज राज्य में सत्ता में है।
  • उनके मताबिक इसलिए यह 'हितों के टकराव' का मामला है।
  • जब अदालत ने पूछा कि वह किसकी ओर से पेश हो रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक दल की ओर से।
  • इसपर जस्टिस पारदीवाला ने सवाल किया कि यहां राजनीतिक दल का क्या रोल है।
  • इसपर जस्टिस चंद्रन ने कहा, 'यहां राजनीति मत लाइए।'
'पीड़ितों को रोजगार दे रही है तो दिक्कत क्या है'सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि एक हादसे के पीड़ितों को सरकार अगर रोजगार दे रही है तो इसमें क्या दिक्कत हो सकती है।



'अकेले कमाई वाले की मौत हो जाए तो क्या होगा'जस्टिस पारदीवाली ने आगे कहा, 'सरकार की नीति पर सवाल उठाने वाले आप कौन हैं, कि किसी को रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। मान लीजिए, भगदड़ में परिवार के अकेले कमाने वाली की मौत होती है और परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है, तो सरकार को बेटा या बेटा या पत्नी को उनके शैक्षणिक योग्यता के आधार पर क्या कोई रोजगार नहीं देना चाहिए।'

(खबर अपडेट हो रही है)