दिल्ली में INDIA ब्लॉक की अहम बैठक से पहले राजधानी की सड़कों पर शुरू हुआ ‘पोस्टर वॉर’ अब चुनावी बहस को एक नए फ्रंट पर ले आया है। सेंट्रल दिल्ली में लगे इन पोस्टरों और बैनरों में विपक्षी नेताओं पर ECI, EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर ‘डबल स्टैंडर्ड’ अपनाने का आरोप लगाया गया है। पोस्टरों का पूरा नैरेटिव एक ही सवाल के आसपास घूमता है—चुनाव आयोग पर भरोसा नतीजों के साथ बदलता है क्या? यानी चुनाव जीते तो सिस्टम ठीक, हार गए तो सिस्टम पर सवाल? हालांकि, ये बैनर किसने लगाए हैं, यह स्पष्ट नहीं है और इनमें लगाए गए आरोपों को पोस्टर लगाने वालों के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
इस ‘बैनर वॉर’ की टाइमिंग भी काफी दिलचस्प है। एक तरफ INDIA ब्लॉक की बैठक में विपक्षी दल SIR यानी वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision, ECI की भूमिका, EVM-VVPAT और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर अपनी आगे की रणनीति पर मंथन करने वाले हैं। कांग्रेस पहले ही चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर चुकी है। दूसरी तरफ, बैठक से कुछ घंटे पहले सड़क पर लगे ये पोस्टर विपक्ष के उन्हीं सवालों को पलटकर उस पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी के बिहार चुनाव अभियान से लेकर अखिलेश यादव के पुराने बयानों और 2024-25 के चुनावी रुख तक, पोस्टरों ने अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की है—यानी दिल्ली की सड़कें इस वक्त सिर्फ पोस्टरों से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग, EVM और ‘वोट चोरी’ की पूरी राजनीतिक बहस से भी पटी हुई हैं।

राजधानी में INDIA ब्लॉक की बैठक से ठीक पहले लगाए गए इन पोस्टरों ने चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को सड़क पर ला दिया है। पोस्टर में विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया गया है कि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में आने पर वे ECI के कामकाज का जश्न मनाते हैं, लेकिन हार के बाद उसी आयोग पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाते हैं। पोस्टर का पूरा संदेश इसी कथित विरोधाभास के इर्द-गिर्द है—‘जब जवाब स्कोरबोर्ड के साथ बदल जाए।’ तस्वीरों और बड़े-बड़े शब्दों के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक दलों का रुख चुनाव के नतीजे के हिसाब से बदलता है।

पोस्टर ऐसे समय सामने आए हैं जब विपक्षी INDIA ब्लॉक की दिल्ली में बैठक चुनाव आयोग, SIR यानी मतदाता सूची के Special Intensive Revision, EVM और VVPAT जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए हो रही है। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बीच दिल्ली में सामने आए पोस्टर बहस का दूसरा पक्ष सामने रख रहे हैं। इनमें विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को निशाना बनाकर चुनाव आयोग पर बदलते राजनीतिक रुख का सवाल उठाया गया है। यानी एक तरफ विपक्ष ECI को लेकर अपने सवालों के साथ बैठक कर रहा है, तो दूसरी तरफ राजधानी की सड़कों पर पोस्टरों के जरिए उसी राजनीतिक रुख पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बैनरों में सिर्फ ECI और EVM को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल नहीं उठाए गए, बल्कि राहुल गांधी के बिहार चुनाव अभियान को लेकर भी निशाना साधा गया है। एक होर्डिंग में दावा किया गया है कि राहुल गांधी “59 दिन बिहार कैंपेन से दूर” रहे और चुनावी नतीजे आने के बाद ECI पर सवाल उठाए गए। इस संदेश के जरिए पोस्टर लगाने वालों ने चुनावी हार, प्रचार से दूरी और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को एक ही नैरेटिव में जोड़ने की कोशिश की है। हालांकि, पोस्टर में किए गए इन आरोपों को पोस्टर लगाने वालों का दावा मानकर ही देखा जा रहा है; पोस्टरों पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं है।