भारत-रूस संबंधों को कमजोर करना चाहता है US, ब्रह्मा चेलानी ने समझाया मार्को रुबियो के जामनगर जाने का सारा गणित
नई दिल्ली: अमेरिकी सरकार के करीबी अरबपति एलन मस्क ने हाल में अंबानी के नाम पर भारत पर खीज निकाली थी, बावजूद इसके अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जिस तरह से भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ गुजरात के जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी का दौरा किया है, उससे कुछ प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं। जामनगर रिफाइनरी रिलायंस की है। जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी अमेरिका के इस कूटनीतिक खेल का गणित समझाया है।

ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जामनगर दौरे को लेकर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट डाला है। उनका कहना है कि रुबियो ने कहा है कि भारत अमेरिका के साथ-साथ वेनेजुएला से ज्यादा से ज्यादा तेल खरीदे। इसका सारा का सारा पैसा अमेरिका के खजाने में जाएगा। रुबियो चाहते हैं कि जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी परिसर में वेनेजुएला को और अधिक कच्चा तेल रिफाइन की जाए।
भारत का सबसे बड़ा एलपीजी-एलएनजी निर्यातक अमेरिकाब्रह्मा चेलानी को लगता है कि मई के बाद भारत के अमेरिका और उसके नियंत्रण वाले तेल का सबसे बड़ा वैश्विक खरीदार बनने मात्र से भी वह संतुष्ट नहीं है। अमेरिका पहले ही भारत का सबसे बड़ा एलपीजी और एलएनजी सप्लायर बन चुका है। अमेरिका के इशारे पर ही भारत वेनेजुएला के तेल का भी सबसे बड़ा आयातक बन चुका है। इस बात की तस्दीक भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी की है।
'भारत-रूस संबंधों को कमजोर करना चाहता है अमेरिका'इसके बाद ब्रह्मा चेलानी ने अमेरिका के असली मकसद की ओर इशारा किया है, जो भारत की कूटनीति के लिए बहुत बड़े खतरे का संकेत है। उनका अनुमान है कि यह सब करके अमेरिका असल में भारत और रूस के रिश्तों को कमजोर करना चाहता है।
अपने फायदे के लिए अमेरिका ने रचा सारा खेलउन्होंने कहा, 'वैसे रुबियो ने अपने एनर्जी पोर्टफोलियो में विविधता लाने के भारत की कोशिशों को 'एक समझदारी भरा कदम' बताया, लेकिन वाशिंगटन का असली कूटनीतिक लक्ष्य भारत को रूसी तेल की जगह अमेरिकी क्रूड और अमेरिका नियंत्रित वेनेजुएला के तेल का इस्तेमाल कराना है।
ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जामनगर दौरे को लेकर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट डाला है। उनका कहना है कि रुबियो ने कहा है कि भारत अमेरिका के साथ-साथ वेनेजुएला से ज्यादा से ज्यादा तेल खरीदे। इसका सारा का सारा पैसा अमेरिका के खजाने में जाएगा। रुबियो चाहते हैं कि जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी परिसर में वेनेजुएला को और अधिक कच्चा तेल रिफाइन की जाए।
भारत का सबसे बड़ा एलपीजी-एलएनजी निर्यातक अमेरिकाब्रह्मा चेलानी को लगता है कि मई के बाद भारत के अमेरिका और उसके नियंत्रण वाले तेल का सबसे बड़ा वैश्विक खरीदार बनने मात्र से भी वह संतुष्ट नहीं है। अमेरिका पहले ही भारत का सबसे बड़ा एलपीजी और एलएनजी सप्लायर बन चुका है। अमेरिका के इशारे पर ही भारत वेनेजुएला के तेल का भी सबसे बड़ा आयातक बन चुका है। इस बात की तस्दीक भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी की है।
'भारत-रूस संबंधों को कमजोर करना चाहता है अमेरिका'इसके बाद ब्रह्मा चेलानी ने अमेरिका के असली मकसद की ओर इशारा किया है, जो भारत की कूटनीति के लिए बहुत बड़े खतरे का संकेत है। उनका अनुमान है कि यह सब करके अमेरिका असल में भारत और रूस के रिश्तों को कमजोर करना चाहता है।
अपने फायदे के लिए अमेरिका ने रचा सारा खेलउन्होंने कहा, 'वैसे रुबियो ने अपने एनर्जी पोर्टफोलियो में विविधता लाने के भारत की कोशिशों को 'एक समझदारी भरा कदम' बताया, लेकिन वाशिंगटन का असली कूटनीतिक लक्ष्य भारत को रूसी तेल की जगह अमेरिकी क्रूड और अमेरिका नियंत्रित वेनेजुएला के तेल का इस्तेमाल कराना है।
Next Story