कौन थे स्वामी चिन्मयानंद? जिन्हें याद कर पीएम मोदी हो गए भावुक; 33 साल पुराने वाकया को किया याद

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 23 अक्टूबर को दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन' का उद्घाटन किया। यह तीन दिवसीय भव्य कार्यक्र स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती द्वारा 1951 में स्थापित किए गए चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम रूप के दर्शन किए। स्वामी चिन्मयानंद को याद कर वे भावुक हो गए।
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पीएम मोदी ने इस दौरान भावुक होते हुए कहा कि होलोग्राम देखकर उन्हें ऐसा लगा मानो वे 33 साल पीछे चले गए हों, जब फरवरी 1993 में वडोदरा में उनकी स्वामी जी से आखिरी मुलाकात हुई थी। उस मुलाकात में स्वामी जी ने उन्हें शिकागो की 'विश्व धर्म संसद' के लिए आमंत्रित किया था। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि स्वामी चिन्मयानंद जी की शिक्षाओं का मुख्य भाव 'युवा शक्ति के जरिए सशक्त भारत का निर्माण' था।

कौन थे स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती
  • स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम में एक सभ्रांत परिवार में हुआ था।
  • उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय और महाराजा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य और कानून की शिक्षा प्राप्त की।
  • स्वामी चिन्मयानंद ने संन्यास लेने से पहले पत्रकार के रूप में भी योगदान दिया था।
  • उन्होंने 1942 के दौरान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया था और उन्हें इस दौरान जेल भी जाना पड़ा था।
संन्यास और चिन्मय मिशन की स्थापनास्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने ऋषिकेश में स्वामी शिवानंद सरस्वती से दीक्षा ली और बाद में स्वामी तपोवन महाराज के मार्गदर्शन में वेदांत का गहरा अध्ययन किया। वर्ष 1953 में उन्होंने वेदों और भगवद्गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विश्वव्यापी संस्था चिन्मय मिशन की स्थापना की।

विश्व हिंदू परिषद की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहीवर्ष 1964 में हिंदू संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए उनकी अध्यक्षता में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने श्रीमद्भगवत गीता, उपनिषदों और आदि शंकराचार्य के ग्रंथों पर 35 से अधिक पुस्तकें व भाष्य लिखे हैं।

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती का निधन3 अगस्त 1993 को सैन डियागो, अमेरिका में उनका निधन हुआ था। बता दें कि स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को दिल की बीमारी थी। उनके पार्थिव शरीर को भारत लाया गया था और हिमाचल प्रदेश के सिद्धबाड़ी स्थित उनके आश्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार समाधि दी गई।