अद्भुत! 1200 साल पुराने कुएं का 'स्वास्तिक जैसा' आकार, ड्रोन शॉट से सामने आया पल्लव राजवंश का ऐतिहासिक दृश्य, जानें इतिहास

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नई दिल्ली: भारत में 1200 साल पुराना एक ऐतिसाहिक कुआं है। इसकी इंजीनियरिंग इतनी कमाल की है कि पूरे देश-दुनिया में इस कुएं की चर्चा होती है। ये कुआं तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के पास तिरुवेल्लराई में है। कुएं का स्थानीय नाम 'मारपिडुगु पेरुंगिनार' यानी स्वास्तिक कुआं है। हाल ही में इसका ड्रोन फुटेज सामने आया है, जो पल्लव-युग की इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण हैं। आइए आपको इस कुएं की खासियत बताते हैं।
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जानें, किसने कराया था निर्माणये ऐतिहासिक कुआं राजा दंतिवर्मन के शासनकाल में बनाया गया था। इसका निर्माण कंबन अरायन ( Kamban Arayan ) ने किया था, जो पल्लव राजवंश के समय ऐतिहासिक शख्स और निर्माणकर्ता थे। इनकी तुलना आज के समय के इंजीनियरों से की जा सकती है। वैसे तो कंबन अरायन ने बहुत से निर्माण किए, लेकिन इन्हें सबसे ज्यादा प्रसिद्धि 'स्वास्तिक कुआं' बनाने के बाद ही मिली।

कुआं प्राचीन जल-प्रबंधन की निशानीइस कुएं की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है। दरअसल, कुएं से पानी भरने में किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसलिए इस कुएं के चारों तरफ सीढ़ियों का निर्माण किया गया। इन सीढ़ियों की मदद से एक ही समय में ढेर सारे लोग कुएं से पानी भर पाते थे और भीड़ को असुविधा का सामना भी नहीं करना पड़ता था। ये चारों सीढ़ियां मिलकर स्वास्तिक आकार का बनाती हैं। ये कुआं भारत के प्राचीन जल-प्रबंधन को दर्शाता है।

प्राचीनकाल में व्यापारी करते थे CSRस्वास्तिक आकार का यह ऐतिहासिक कुआं तमिलनाडु के थिरुवेल्लारई में प्रसिद्ध पुंडरीकाक्ष पेरुमल मंदिर के पास स्थित है। भारतीय इतिहासकारों के मुताबिक प्राचीन काल में सक्षम व्यापारियों ने भी मंदिर में स्थित इस कुएं का जीर्णोद्धार कराया था। इस बात से साबित होता है कि उस समय के व्यापारी भी अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर निभाना नहीं भूलते थे और समय-समय पर समाज की भलाई के काम करते रहते थे।