Vande Mataram Bill: 'वंदे मातरम्' पर आज राज्यसभा में बहस, कांग्रेस कह रही- कानून की जरूरत नहीं

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् विधेयक पर आज राज्यसभा में बहस पर सबकी नजर है। सम्मान और उसके अपमान को दंडनीय अपराध बनाने के मकसद से लाया गया वंदे मातरम् विधेयक राजनीतिक बहस का केंद्र बना है। शुक्रवार को सरकार की ओर से इसे राज्यसभा में पेश किया जा चुका है और आज (सोमवार) को इस पर चर्चा कराने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
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  • विपक्षी दलों का कहना है कि वंदे मातरम् पहले से ही देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रीय गीत है और इसके सम्मान के लिए अलग कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है।
  • वहीं CPI(M) सहित कुछ दलों का आरोप है कि इस कानून का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने या राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किया जा सकता है।
  • CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर विधेयक वापस लेने की मांग भी की है।

सरकार की क्या है तैयारीअगर सोमवार को राज्यसभा में चर्चा होती है तो सरकार और विपक्ष के बीच इस विधेयक पर विस्तृत बहस देखने को मिल सकती है। अगर सदन में सहमति नहीं बनती या हंगामे के कारण चर्चा टलती है तो विधेयक की प्रक्रिया आगे खिसक सकती है। अभी कानून की धारा 3 केवल राष्ट्र गान जन गण मन पर लागू होती है।

क्या बदलाव करेगा यह विधेयक?अगर यह विधेयक संसद से पास हो जाता है, तो Prevention of Insults to National Honour Act , 1971 की धारा 3 का दायरा बढ़ जाएगा। अभी यह धारा केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने पर लागू होती है। नए संशोधन के बाद यही प्रावधान राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' पर भी लागू होगा। यानी वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर रुकावट डालना या कार्यक्रम में बाधा पहुंचाना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण मिलेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि कानून के दायरे और उसके इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता जरूरी है।