'यह बहाना नहीं, संतुलन बिठाना पड़ता है', अमेरिकी विदेश मंत्री के मुंह से निकल गई भारत से 'बेहद करीब' ट्रेड डील की सच्चाई, जयशंकर से बात कल

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नई दिल्ली: भारत आ रहे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा अपडेट दिया है। 19 से 22 अक्टूबर तक हो रहे भारत दौरे से पहले रुबियो ने रूस से तेल और गैस के मामले पर बड़ी बात कही है। उन्होंने भारत से ट्रेड डील पर कहा है कि हम इस डील के बेहद करीब हैं। हालांकि, बातों-ही बातों में उन्होंने ट्रेड डील को लेकर असली बात भी कह डाली। भारत आने पर रुबियो कल यानी 20 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 अक्टूबर को बातचीत करेंगे।
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इससे पहले रविवार देर रात रुबियो रविवार देर रात उज्बेकिस्तान के 'सिल्क रोड' शहर समरकंद पहुंचे। यह वही उज्बेकिस्तान है, जहां के फरगना में भारत में मुगल शासन की नींव रखने वाले बाबर का जन्म हुआ था। वहीं, मुंबई में रुबियो की मेजबानी करने से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करने वाले हैं, जो इस समय भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।



अमेरिकी विदेश मंत्री बोले-भारत से डील बेहद करीबअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा-'...हम अभी भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसके बहुत करीब हैं।' रूस से तेल और गैस के मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में हमें प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है, क्योंकि इसका असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा था...।'


रुबियो बोले-हमें सभी चीजों को संभालना होता हैरुबियो ने आगे कहा-'हमें इन सभी चीजों को संभालना होता है। हम अभी भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसके बहुत करीब हैं। जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य मामलों पर कोई फैसला लेते हैं, तो हम इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं। हर देश के सामने कई जटिल कारक होते हैं, जिन्हें उन्हें ध्यान में रखना पड़ता है। भौगोलिक स्थिति एक वास्तविकता है। कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत खोजना बहुत मुश्किल होता है। यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है...।'



मुंबई में जयशंकर और रुबियो की मुलाकात
  • समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक सरकारी प्रवक्ता के हवाले से बताया कि मुंबई में एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच होने वाली इस बैठक का उद्देश्य 'व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' को मजबूत करना है। इसमें ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों और द्विपक्षीय सहयोग के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले हफ्ते बताया था, '19-20 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्री मुंबई में UAE के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री, महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की आधिकारिक यात्रा के दौरान उनकी मेजबानी करेंगे। 20 अक्टूबर को विदेश मंत्री अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत करेंगे और 'गेस्ट ऑफ ऑनर' (मुख्य अतिथि) के तौर पर अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में शामिल होंगे।'

एक्सपर्ट ने कहा-निर्णायक मोड़ पर भारत-अमेरिका बातचीतमिंट की एक रिपोर्ट में विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने कहा कि रुबियो की जामनगर और मुंबई की यात्रा के पीछे महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक उद्देश्य हैं, जो मुख्य रूप से कॉर्पोरेट निवेश और अमेरिका के आगामी मध्यावधि (मिडटर्म) घटनाक्रमों से जुड़े हैं।

ANI से बातचीत में, सचदेव ने भारत और अमेरिका के बीच चल रहे राजनीतिक और कॉर्पोरेट संबंधों का विश्लेषण किया, जिसमें इस राजनयिक यात्रा पर विशेष ध्यान दिया गया।



सचदेव ने कहा, 'मुझे लगता है कि मार्को रुबियो की यह यात्रा निश्चित रूप से एक अच्छा संकेत है, जो अमेरिका-भारत संबंधों के लिए सकारात्मक है। अन्य बातों के अलावा, उनकी इस यात्रा और इसके उद्देश्यों को लेकर मेरा एक अनुमान है। मैं यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि वह जामनगर क्यों जा रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण यात्रा है।'


भारत-अमेरिका संबंधों की समीक्षा
  • इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि रुबियो की आगामी यात्रा दोनों पक्षों को भारत-अमेरिका संबंधों की समीक्षा करने और 'अमेरिका के साथ हमारी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने' के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर देगी।
  • सोमवार यानी 19 अक्टूबर को रुबियो भारत आने से पहले मध्य एशिया के प्रमुख देशों के साथ बातचीत शुरू करेंगे। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और यहां चीन एक मुख्य प्रतिस्पर्धी के रूप में मौजूद है।

जयशंकर और रुबियो में इन क्षेत्रों पर बात संभव
  • सोवियत संघ से अलग हुए पांच देशों के नेताओं ने पिछले साल नवंबर में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत की थी। 200 बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए रुबियो समरकंद के पुराने शहर का दौरा करेंगे। यह शहर चीन और पश्चिम के बीच एक ऐतिहासिक पड़ाव रहा है। इसके बाद, वे चीन के साथ आज की प्रतिद्वंद्विता को लेकर बातचीत शुरू करेंगे।
  • उन्होंने बताया कि मुंबई में रुबियो और जयशंकर के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती हुई तकनीकें, तथा आपसी हित के अन्य विषय शामिल हैं।
  • दोनों पक्ष क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा करेंगे। जायसवाल ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत को बनाए रखने और हमारी साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का एक मौका देगा।