मार्को रुबियो की दो टूक! कहा- अगर ईरान को नहीं रोक सका, तो किस काम का UN? अमेरिकी विदेश मंत्री का प्रहार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का एक बयान तेजी से चर्चा में है, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र यानी UN की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कही। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र से अपील कर रहा है कि वह ईरान को जहाजों पर हमले रोकने, समुद्र में बिछाई गई माइंस हटाने और मानवीय सहायता की अनुमति देने के लिए कहे।

इस बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय इतना “सीधा और स्पष्ट” मुद्दा भी हल करने में एकजुट नहीं हो पाता, तो UN के कार्यों पर सवाल खड़े होते हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार गहराती जा रही हैं। इस पर कड़े रूख के साथ राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया भी सामने आई, जिसमें में उन्होंने मार्को रुबियो की बात का समर्थन करते हुए UN के कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
UN की भूमिका पर उठे सवालरुबियो का यह बयान सीधे तौर पर UN की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ग्लोबल संस्थाएं बुनियादी सुरक्षा और मानवीय मुद्दों पर भी निर्णायक कदम नहीं उठा पातीं, तो उनकी प्रासंगिकता कमजोर पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह इंटरनेशनल मंचों पर ज्यादा एक्टिव और कठोर कार्रवाई की मांग करता रहा है।
ईरान पर लगाए गंभीर आरोपरुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह समुद्री मार्गों में बाधा डाल रहा है और जहाजों को निशाना बना रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में बिछाई गई माइंस इंटरनेशनल व्यापार और मानवीय सहायता के लिए बड़ा खतरा हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में पहले भी इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रियाइस वीडियो को राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीशेयर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने लिखा, “इस वक्त तो खुद UN को भी नहीं पता कि उसकी उपयोगिता क्या है।” उनका यह बयान भारत में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस को हवा देता नजर आ रहा है।
इस बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय इतना “सीधा और स्पष्ट” मुद्दा भी हल करने में एकजुट नहीं हो पाता, तो UN के कार्यों पर सवाल खड़े होते हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार गहराती जा रही हैं। इस पर कड़े रूख के साथ राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया भी सामने आई, जिसमें में उन्होंने मार्को रुबियो की बात का समर्थन करते हुए UN के कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
UN की भूमिका पर उठे सवालरुबियो का यह बयान सीधे तौर पर UN की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ग्लोबल संस्थाएं बुनियादी सुरक्षा और मानवीय मुद्दों पर भी निर्णायक कदम नहीं उठा पातीं, तो उनकी प्रासंगिकता कमजोर पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह इंटरनेशनल मंचों पर ज्यादा एक्टिव और कठोर कार्रवाई की मांग करता रहा है।
ईरान पर लगाए गंभीर आरोपरुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह समुद्री मार्गों में बाधा डाल रहा है और जहाजों को निशाना बना रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में बिछाई गई माइंस इंटरनेशनल व्यापार और मानवीय सहायता के लिए बड़ा खतरा हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में पहले भी इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रियाइस वीडियो को राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रीशेयर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने लिखा, “इस वक्त तो खुद UN को भी नहीं पता कि उसकी उपयोगिता क्या है।” उनका यह बयान भारत में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस को हवा देता नजर आ रहा है।
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