आंसू और खुशी एक ही हृदय में बहती भावनाएं, मुकेश अंबानी के छलके प्रेम के अलग-अलग रूप

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सुरक्षित गोस्वामी: राधा के विरह की कल्पना कीजिए। कृष्ण की स्मृति में कभी उनके अधरों पर मुस्कान आती, तो कभी आंखें भर आतीं। स्मरण में मिलन का आनंद है और सामने अनुपस्थिति का दुख। प्रेम इतना गहरा कि उसमें हंसी भी है और आंसू भी। वहां भावनाएं एक-दूसरे की विरोधी नहीं रह जातीं, बल्कि एक ही प्रेम के दो रूप बन जाती हैं। असलियत में मनुष्य की भावनाओं की भी एक सीमा है। जब खुशी बहुत अधिक हो, तो आंखों से आंसू बहने लगते हैं। देखा जाए तो जब हम हंसते हैं, तो हंसते हैं और रोते हैं, तो रोते हैं। लेकिन, जीवन में कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जब हंसी और आंसू के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है। मन न तो केवल हंस पाता है और न ही केवल रो पाता है। भीतर कुछ ऐसा घट रहा होता है, जिसे व्यक्त करने के लिए कोई एक भाव पर्याप्त नहीं होता।

Jio के IPO लॉन्च कार्यक्रम में मुकेश अंबानी के छलके प्रेम के दो रूपपिछले दिनों जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO लॉन्च के दौरान मुकेश अंबानी के बच्चों ने मन की बातें कहीं तब उनके चेहरे पर कभी हंसी और कभी आंसू दिखाई दिए। इसे केवल एक भावुक पिता की प्रतिक्रिया मानकर छोड़ देना शायद इस दृश्य की गहराई को पूरी तरह समझना नहीं होगा। संभव है कि उस क्षण वह अपने बच्चों के शब्दों में वर्षों का प्रेम, संघर्ष, स्मृतियां, अपनापन और जीवन की सार्थकता अनुभव कर रहे हों। जब भावनाएं हृदय की गहराइयों को छूने लगती हैं, तब व्यक्ति की अभिव्यक्ति भी उसके सामान्य व्यवहार से अलग हो जाती है।

आनंद जब अपनी सीमाएं तोड़ता है तो...आनंद जब अपनी सीमाएं तोड़ता है, तब वह केवल हंसी बनकर नहीं रह जाता। कभी वह आंसुओं में बहता है, कभी मुस्कान बनकर चेहरे पर खिलता है। दोनों एक ही अनुभव की अलग-अलग अभिव्यक्तियां हो सकती हैं। मन उस क्षण समझ नहीं पाता कि भीतर उमड़ते भावों को हंसकर व्यक्त करें या रो कर। हमारे जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं, जब किसी अपने की बात, किसी पुरानी स्मृति या किसी उपलब्धि का अनुभव हमें भीतर तक छू जाता है। उस समय आंसू कमजोरी नहीं होते और हंसी हल्केपन का प्रमाण नहीं होती।

दोनों हृदय की उस गहराई से निकल सकते हैं, जहां शब्दों की पहुंच समाप्त होने लगती है। शायद आध्यात्मिक आनंद का एक संकेत यह भी है कि मन किसी एक अभिव्यक्ति में बंधा नहीं रहता। वह हंसता भी है, रोता भी है और दोनों के बीच किसी गहरे अनुभव में डूबा रहता है। जब हृदय भावनाओं से भर जाता है, तब आंखें और होंठ अपनी अलग-अलग भाषा नहीं बोलते, वे एक ही हृदय की कहानी कहने लगते हैं।