K Annamalai: बीजेपी छोड़ने वालों का क्या हुआ, अन्नामलाई से पहले पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं का हाल
नई दिल्ली: तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई मात्र सात साल से ही पार्टी में थे। विधानसभा चुनावों के बाद अचानक उनके बीजेपी छोड़ने की खबरें आईं और शुक्रवार को उसपर औपचारिक मुहर लग गई। लेकिन, बीजेपी और जनसंघ का इतिहास देखें तो बीजेपी के किसी समर्पित नेता का वैचारिक तालमेल नहीं मिलने के चलते इस तरह से संगठन से निकलने का यह पहला मामला नहीं है।
बीजेपी को टाटा-बाय-बाय कहकर जाने वाले पूर्व आईपीएस के अन्नामलाई से पहले की भी बड़े और हाई-प्रोफाइल समर्पित नेताओं की एक लंबी लिस्ट है। उनमें से कई दोबारा पार्टी में लौटे भी,कुछ ने नई पार्टी बनाई और फिर उसका भाजपा में ही विलय किया, कुछ ने दूसरे दलों की भी राह ली। कुछ ऐसे भी हैं, जो निकले तो ऐसे निकले की हर मुद्दे पर सिर्फ कटु आलोचक बनकर रह गए। लेकिन, तथ्य यह है कि जिनकी भारतीय जनता पार्टी में दोबारा वापसी नहीं हुई, वह अलग रहकर भी ज्यादा सफल नहीं हो पाए। जैसे कि भाजपा में आकर शुभेंदु अधिकारी या हिमंत बिस्वा सरमा हुए हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा
कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा
गुजरात के पूर्व सीएम केशुभाई पटेल
मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती
यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह
गुजरात के पूर्व सीएम शंकरसिंह वाघेला
बीजेपी को टाटा-बाय-बाय कहकर जाने वाले पूर्व आईपीएस के अन्नामलाई से पहले की भी बड़े और हाई-प्रोफाइल समर्पित नेताओं की एक लंबी लिस्ट है। उनमें से कई दोबारा पार्टी में लौटे भी,कुछ ने नई पार्टी बनाई और फिर उसका भाजपा में ही विलय किया, कुछ ने दूसरे दलों की भी राह ली। कुछ ऐसे भी हैं, जो निकले तो ऐसे निकले की हर मुद्दे पर सिर्फ कटु आलोचक बनकर रह गए। लेकिन, तथ्य यह है कि जिनकी भारतीय जनता पार्टी में दोबारा वापसी नहीं हुई, वह अलग रहकर भी ज्यादा सफल नहीं हो पाए। जैसे कि भाजपा में आकर शुभेंदु अधिकारी या हिमंत बिस्वा सरमा हुए हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह
- बीजेपी से निकलने वाले हाल के सबसे हाई-प्रोफाइल नेताओं में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और केंद्रीय मंत्री आरके सिंह शामिल हैं।
- उन्हें पार्टी-विरोधी गतिविधियों के कारण 6 साल के लिए निलंबित किया गया तो उन्होंने बिहार में एक क्षेत्रीय पार्टी गठित करने की बात कही थी।
- अभी तक उनकी ऐसी कोई पार्टी सामने नहीं आई है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा को अपनी पहली ही मंत्रिपरिषद में जगह दी।
- लेकिन, यशवंत सिन्हा को लगा कि वे पार्टी में उपेक्षित होकर रह गए हैं और उन्हें भाव नहीं मिल रहा है तो उन्होंने 2018 में बीजेपी छोड़ दी।
- इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
- उन्होंने बिहार में एक भारतीय सब लोग पार्टी भी बनाई, लेकिन बुरी तरह से फेल हुए।
- रहा नहीं गया तो 2021 में टीएमसी में भी चले गए।
- इसके बाद विपक्ष ने 2022 में उन्हें राष्ट्रपति का संयुक्त उम्मीदवार बना दिया और इसमें भी वह बुरी तरह से पराजित हुए।
- बाद में उन्होंने एक अटल विचार मंच बनाया, लेकिन अब वह पूरी तरह से हाशिए पर जा चुके हैं।
कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा
- भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद जब बीजेपी की टॉप लीडरशिप के दबाव में बीएस येदियुरप्पा को 2011 में सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी तो उन्होंने पार्टी ही छोड़ दी।
- 2013 के प्रदेश चुनाव में कर्नाटक जनता पक्ष बनाकर लड़ा।
- उनकी पार्टी को सिर्फ 6 ही सीटें मिलीं, लेकिन लिंगायत वोट में सेंध लगने से बीजेपी भी 40 सीटों पर सिमट गई।
- 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले उन्होंने अपनी पार्टी भंग करके एक बार फिर से कमल थाम लिया और उसके बाद से दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी बने।
- बाद में बीजेपी ने उन्हें सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड में शामिल कर लिया।
गुजरात के पूर्व सीएम केशुभाई पटेल
- नरेंद्र मोदी का गुजरात में प्रभु्त्व बढ़ा तो पार्टी के पूर्व सीएम केशुभाई पटेल ने पार्टी छोड़ दी और गुजरात परिवर्तन पार्टी बनाई। लेकिन, उन्हें सफलता नहीं मिली।
- 2014 में मोदी पीएम बनकर दिल्ली आ गए तो केशुभाई पटेल फिर से बीजेपी में आ गए और 2020 में अपने निधन तक बीजेपी में बने रहे।
मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती
- उमा भारती ने बीजेपी छोड़ने का पहला प्रयास 1992 में ही किया, लेकिन तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष एलके आडवाणी उन्हें समझाने में सफल रहे।
- 2004 में कर्नाटक के हुबली दंगा मामले में एक गैर-जमानती वारंट के चक्कर में उन्होंने मध्य प्रदेश के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
- एमपी के तत्कालीन सीएम बाबूलाल गौड़ की आलोचना की वजह से उन्हें एक बार 2004 में पार्टी से निकाल दिया गया, लेकिन आरएसएस के कहने पर एक महीने के अंदर ही बीजेपी का महासचिव बनाया गया।
- बाद में उन्होंने शिवराज सिंह चौहान का विरोध किया, जिसके चलते फिर से बीजेपी से निकाला गया और उन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाई।
- 2008 के मध्य प्रदेश चुनाव में उनकी पार्टी सिर्फ 5 सीटें जीतीं।
- इसके बाद उनकी फिर से बीजेपी से करीबी बढ़ने लगी है और 2011 में वह बीजेपी में आ गईं और अपनी पार्टी का भी भाजपा में विलय कर लिया।
- बाद में उन्होंने बीजेपी छोड़ने के लिए खेद जताया और पीएम मोदी सरकार में मंत्री भी बनीं।
- अभी वह बीजेपी की उपाध्यक्ष हैं।
यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह
- जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, तब कल्याण सिंह की बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से तल्खी बढ़ गई।
- आखिरकार दिसंबर, 1999 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया।
- उन्होंने हिंदुत्व के एजेंडे पर ही अपनी एक अलग पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी भी बनाई और 2002 के यूपी विधानसभा चुनाव में चार सीटें भी जीत ली।
- 2003 में बीजेपी-मायावती सरकार गिरने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी से भी हाथ मिलाया और उनके बेटे राजवीर सिंह उनके कट्टर सियासी दुश्मन मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री भी बने।
- लेकिन, 2004 में ही वापस बीजेपी में शामिल हो गए और अपनी पार्टी का उसमें विलय भी कर दिया।
- जनवरी 2009 में उन्होंने फिर से बीजेपी छोड़ दी और सपा के साथ गठबंध कर लिया।
- जब सपा फिरोजाबाद उपचुनाव हारी और मुलायम ने हार का ठीकरा उनसे गठबंधन पर फोड़ा तो जन क्रांति पार्टी नाम का एक नया संगठन खड़ा किया।
- लेकिन, 2013 में इस पार्टी का फिर से बीजेपी में विलय कर दिया।
- 2014 में लखनऊ की विशाल रैली में नरेंद्र मोदी के सामने वे वापस भाजपा में आ गए।
- बाद में उन्हें हिमाचल प्रदेश और राजस्थान का गवर्नर बनाया गया।
गुजरात के पूर्व सीएम शंकरसिंह वाघेला
- जब 1995 में बीजेपी ने गुजरात में कांग्रेस की जड़ें उखाड़ दी और पार्टी ने केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया तो शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी से बगावत कर दिया।
- इसकी वजह से पार्टी को सुरेशभाई मेहता को सीएम बनाना पड़ा।
- 1996 में तो उन्होंने भाजपा के 121 विधायकों में से 105 के साथ बगावत का बिगुल फूंका और उन्हें कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश के खजुराहो के रिसॉर्ट में पहुंचा दिया।
- इसके चलते सुरेश मेहता सरकार बर्खास्त कर दी गई और गुजरात में राष्ट्रपति शासन लग गया।
- आगे चलकर वाघेला ने बीजेपी के 47 विधायकों के साथ अपनी अलग राष्ट्रीय जनता पार्टी बना ली, जिसे कांग्रेस का समर्थन हासिल था।
- वह कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के फिर से सीएम बन गए, लेकिन एक साल में ही सरकार गिर गई।
- जब बीजेपी वापस सत्ता में आ गई तो उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया।
- वाघेला ने करीब एक दशक बाद 2017 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज अहमद पटेल के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की।
- इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और जन विकल्प मोर्चा के नाम से नई पार्टी बनाई, जिसे चुनाव आयोग से मान्यता नहीं मिली।
- कुछ दिन एनसीपी में बिताने के बाद प्रजा शक्ति डेमोक्रैटिक पार्टी भी बनाई। लेकिन, 2022 में चुनाव लड़ने के बजाए कांग्रेस को समर्थन देने का एलान किया।
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