ईरान-अमेरिका को चकमा दे रहे भारत आने वाले जहाज! होर्मुज में ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर अपना रहे 'निंजा टेक्निक'
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका डील के बाद भी होर्मुज से गुजरने वाले जहाज काफी एहतियात बरत रहे हैं। दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्ते से गुजरते समय वे अपनी लोकेशन तक ऑफ कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए सामान ले जाने वाले कमर्शियल जहाज बड़ी संख्या में अपनी आवाजाही छिपा रहे हैं। यह बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को दिखाता है।
ट्रांसपॉन्डर बंद कर देते हैं जहाजसमुद्री इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिसर्च में सामने आया है कि होर्मुज के रास्ते भारत आने वाले ज्यादातर जहाज हाई-रिस्क वाले इलाके से गुजरते समय अपनी पहचान, लोकेशन और मंजिल की जानकारी छिपाने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपॉन्डर बंद कर देते हैं। शिपिंग इंडस्ट्री में इस काम को 'गोइंग डार्क' कहा जाता है।

नेविगेशनल डेटा न भेजने का फैसलाहोर्मुज को लेकर सामने आई इस जानकारी का हवाला देते हुए एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फारस की खाड़ी से भारत आने वाले लगभग 62 प्रतिशत टैंकर और कार्गो जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिए थे। 1 मई से 25 जून के बीच भारत आने वाले 73 जहाजों ने यह रास्ता तय किया, जिनमें से 45 ने गुजरते समय नेविगेशनल डेटा न भेजने का फैसला किया।
निशाना बनाए जाने का जोखिम कमAIS ट्रांसपॉन्डर का इस्तेमाल आम तौर पर जहाज दूसरे जहाजों और समुद्री अधिकारियों के साथ अपनी रियल-टाइम लोकेशन की जानकारी शेयर करने के लिए करते हैं। हालांकि, पहचाने जाने या निशाना बनाए जाने के जोखिम को कम करने के लिए ऑपरेटर अक्सर संघर्ष वाले इलाकों में इन सिस्टम को बंद कर देते हैं।
वॉशिंगटन-तेहरान में अब भी विवादहाल ही में हुए अमेरिका-ईरान टकराव और उसके बाद हुए नाज़ुक संघर्ष-विराम के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) से जहाजों के गुजरने को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे शिपिंग के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। हालांकि वॉशिंगटन और तेहरान ने कमर्शियल शिपिंग को फिर से शुरू करने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी इस समझौते को लागू करने को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं। दोनों के बीच इस बात को लेकर भी तनाव है कि शिपिंग को रेगुलेट करने का अधिकार किसके पास है।
ट्रांसपॉन्डर बंद कर देते हैं जहाजसमुद्री इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिसर्च में सामने आया है कि होर्मुज के रास्ते भारत आने वाले ज्यादातर जहाज हाई-रिस्क वाले इलाके से गुजरते समय अपनी पहचान, लोकेशन और मंजिल की जानकारी छिपाने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपॉन्डर बंद कर देते हैं। शिपिंग इंडस्ट्री में इस काम को 'गोइंग डार्क' कहा जाता है।
नेविगेशनल डेटा न भेजने का फैसलाहोर्मुज को लेकर सामने आई इस जानकारी का हवाला देते हुए एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फारस की खाड़ी से भारत आने वाले लगभग 62 प्रतिशत टैंकर और कार्गो जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिए थे। 1 मई से 25 जून के बीच भारत आने वाले 73 जहाजों ने यह रास्ता तय किया, जिनमें से 45 ने गुजरते समय नेविगेशनल डेटा न भेजने का फैसला किया।
निशाना बनाए जाने का जोखिम कमAIS ट्रांसपॉन्डर का इस्तेमाल आम तौर पर जहाज दूसरे जहाजों और समुद्री अधिकारियों के साथ अपनी रियल-टाइम लोकेशन की जानकारी शेयर करने के लिए करते हैं। हालांकि, पहचाने जाने या निशाना बनाए जाने के जोखिम को कम करने के लिए ऑपरेटर अक्सर संघर्ष वाले इलाकों में इन सिस्टम को बंद कर देते हैं।
वॉशिंगटन-तेहरान में अब भी विवादहाल ही में हुए अमेरिका-ईरान टकराव और उसके बाद हुए नाज़ुक संघर्ष-विराम के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz ) से जहाजों के गुजरने को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे शिपिंग के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। हालांकि वॉशिंगटन और तेहरान ने कमर्शियल शिपिंग को फिर से शुरू करने के लिए एक शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी इस समझौते को लागू करने को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं। दोनों के बीच इस बात को लेकर भी तनाव है कि शिपिंग को रेगुलेट करने का अधिकार किसके पास है।
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