ED जांच में CM की मौजूदगी 'केंद्र बनाम राज्य' विवाद नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ईडी जांच के दौरान सीएम की मौजूदगी केंद्र बनाम राज्य का विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कथित कार्रवाई में हस्तक्षेप के मामले पर सुनवाई करते हुए उक्त मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की जारी जांच के बीच पहुंचकर दखल देता है, तो उसे केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद नहीं कहा जा सकता।
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किस याचिका की सुनवाई कर रहा था कोर्ट
अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। आरोप है कि टीएमसी के राजनीतिक सलाहकार आई-पैक पर ईडी की छापेमारी के दौरान बाधा डाली गई।

ममता सरकार ने ईडी की याचिका पर उठाया सवालसुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी ने ईडी याचिका की मेंटेनिब्ल्टी पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह मूल रूप से राज्य और केंद्र के बीच विवाद है, इसलिए इसे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत नहीं बल्कि अनुच्छेद 131 के तहत उठाया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस मिश्रा ने असहमति जताते हुए कहा कि यह राज्य के अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति का कृत्य है, जो संयोग से मुख्यमंत्री हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी राज्य की मुख्यमंत्री यदि जांच के बीच पहुंचकर हस्तक्षेप करें, तो इसे संघीय विवाद बताना उचित नहीं होगा।

मुख्यमंत्री द्वारा वहां से ले जाई गई आपत्तिजनक सामग्री
पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई मंत्री जांच के बीच पहुंचकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को संकट में डाल दे, तो उसे केवल केंद्र-राज्य विवाद बताकर सीमित नहीं किया जा सकता। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री भी मुख्यमंत्री द्वारा वहां से ले जाई गई थी। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति की कल्पना संविधान निर्माताओं ने भी शायद नहीं की होगी कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री किसी दूसरी एजेंसी के दफ्तर में जाकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित करे।

वकील ने SC में राज्य ओर से दी ये दलील
राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि ईडी एक वैधानिक संस्था है और वह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा करते हुए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जांच करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है और ईडी या उसके अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान व्यक्तिगत मौलिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कई संविधान पीठ के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निगमों और वैधानिक संस्थाओं को अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों जैसे अधिकार प्राप्त नहीं हैं।

क्या है ममता बनर्जी पर ईडी का आरोप
ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को आई-पैक कार्यालय में तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वरिष्ठ नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ वहां पहुंचीं, अधिकारियों का सामना किया और कुछ फाइलें तथा डिजिटल उपकरण अपने साथ ले गईं, जिससे जांच प्रभावित हुई। घटना के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की थीं। ईडी ने इन एफआईआर को चुनौती देते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। सुप्रीम Court ने जनवरी में इन एफआईआर पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी और राज्य को सीसीटीवी फुटेज तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। मामले में सुनवाई जारी है।