म्यांमार ट्रेनिंग कैंप केस: अमेरिका से लौटे मैथ्यू वैनडाइक, NIA कोर्ट में हुए पेश; ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने का है आरोप

Newspoint
नई दिल्ली: म्यांमार में विद्रोही गुटों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने के आरोपों से जुड़े मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत में पेशी दी। उन्हें सितंबर 2026 में परिवार से मिलने के लिए एक महीने अमेरिका जाने की अनुमति मिली थी। अदालत ने विदेश जाने की इजाजत देते हुए भारत लौटने और पेश होने का निर्देश दिया था। साथ ही, वापसी के 72 घंटे के भीतर अदालत को सूचना देना भी जरूरी किया गया था। वैनडाइक की यह पेशी ऐसे समय हुई है, जब उन्हें 18 सितंबर को इस मामले में ‘डिफॉल्ट जमानत’ मिल चुकी है। हालांकि, NIA की जांच अभी जारी है।
Hero Image

अधूरी चार्जशीट के आधार पर मिली थी डिफॉल्ट जमानतविशेष NIA अदालत ने 18 सितंबर को वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दी थी। इसकी वजह यह थी कि NIA की ओर से 8 सितंबर को दाखिल चार्जशीट अधूरी पाई गई थी। वैनडाइक को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और वह 180 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रह चुके थे। जमानत देते समय अदालत ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 लागू कीं, जबकि आरोपियों की गिरफ्तारी के समय लगाई गई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराओं को हटा दिया। जमानत के बाद वैनडाइक ने कथित इमिग्रेशन उल्लंघनों को निपटाने के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) में 5.5 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क भी जमा किया। उनकी कानूनी टीम ने मामले से पूरी तरह बरी कराने की योजना के संकेत दिए हैं।


टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर म्यांमार जाने का आरोपNIA ने 13 मार्च 2026 को वैनडाइक के साथ 6 यूक्रेनी नागरिकों को भी गिरफ्तार किया था। इनमें मैक्सिम गोंचारुक, पेट्रो हुबरा, इवान सुकमनोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, तारास स्लीवियाक और विक्टर कामिन्स्की शामिल हैं। जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद कथित तौर पर जरूरी परमिट के बिना मिजोरम गए और वहां से म्यांमार में दाखिल हुए। आरोप है कि वहां उन्होंने जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दिया। जांचकर्ताओं को संदेह है कि प्रशिक्षण केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकें भी शामिल थीं।

ड्रोन उपकरणों की सप्लाई और 2024 से नेटवर्क सक्रिय होने का शकजांचकर्ताओं को यह भी संदेह है कि आरोपियों ने यूरोप से उन्नत ड्रोन उपकरण म्यांमार पहुंचाने में मदद की थी। एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क 2024 से सक्रिय हो सकता है। आरोप है कि समूह के सदस्य बार-बार म्यांमार जाते थे और वहां विद्रोही गुटों को प्रशिक्षण देने के साथ ड्रोन उपकरणों तथा जैमिंग डिवाइस की आपूर्ति में मदद करते थे। हालांकि, ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनका अंतिम रूप से साबित होना बाकी है। NIA का कहना है कि UAPA के तहत संभावित अपराधों की जांच अब भी जारी है।

9 और लोगों से जुड़ सकते हैं तारNIA इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या स्थानीय लोगों ने आरोपियों की मदद की थी और क्या इस नेटवर्क का दायरा गिरफ्तार 7 लोगों से कहीं बड़ा है। रिपोर्ट में खुफिया जानकारी के हवाले से 9 अन्य लोगों के कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि मामले में भारत के भीतर कोई संगठित कनेक्शन था या नहीं। म्यांमार से लगी मिजोरम की खुली सीमा को लेकर भी चिंता जताई गई है। आशंका है कि इसका इस्तेमाल कथित प्रशिक्षण गतिविधियों और उपकरणों की आवाजाही के लिए किया गया हो सकता है। फिलहाल, NIA इस पूरे नेटवर्क, संभावित मददगारों और सीमा पार गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।