BJP vs TMC: भालो और बुरी टीएमसी की लक्ष्मण रेखा खिंची और मिटाई, ममता बनर्जी को दो मोर्चों पर उलझाया; बीजेपी की बिसात
नई दिल्लीः इस्तीफा देने के कुछ सप्ताह बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसद राज्यसभा जाने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस बार उनकी टोपी बदल जाएगी। ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बाड़ाईक ने 9 जुलाई को औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन कर ली। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही घंटे बाद बीजेपी ने तीनों को उपचुनाव के लिए नामित भी कर दिया। इन सीटों पर 24 जुलाई को चुनाव होने हैं।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने का बीजेपी का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है। एक और सांसद रुक्मिणी मल्लिक ने भी ईमेल के जरिए राज्यसभा चेयरमैन को अपना इस्तीफा भेज दिया है और जल्द ही वे चेयरमैन से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगी। सूत्रों का कहना है कि TMC के बाकी नौ राज्यसभा सांसदों में से दो और सांसद जल्द ही BJP में शामिल हो सकते हैं।
'अच्छे' तृणमूल नेता और 'बुरे' टीएमसी नेतापूर्व तृणमूल नेताओं का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के उन सार्वजनिक बयानों के खिलाफ है जिनमें कहा गया था कि वे टीएमसी के नेताओं को शामिल नहीं करेंगे क्योंकि उन पर भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के आरोप हैं। हालांकि, मंगलवार को राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक को पार्टी में शामिल करते हुए इसे एक 'अपवाद' बताया। समिक भट्टाचार्य ने पहले 'अच्छी TMC और बुरी TMC' की थ्योरी भी दी थी, जिसके तहत 'भालो' यानी अच्छे टीएमसी नेताओं को साथ लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
राज्यसभा का गणित
विभाजन से पहले, टीएमसी के राज्यसभा में 13 सांसद थे। किसी दूसरी पार्टी (जैसे BJP) में विलय के लिए 9 सांसदों की जरूरत होती है। चूंकि इतनी संख्या नहीं जुटाई जा सकी, इसलिए बीजेपी ने सांसदों से इस्तीफा दिलवाने और फिर उन्हें अपने चुनाव चिह्न पर दोबारा सदन भेजने की रणनीति अपनाई है। यह रणनीति तृणमूल को कमज़ोर करेगी और राज्यसभा में बीजेपी मजबूत होगी।
24 जुलाई के बाद, राज्यसभा में बीजेपी ताकत बढ़कर 117 हो जाएगी, जो अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या होगी। BJP अब अपने दम पर 123 के साधारण बहुमत से सिर्फ़ छह सीट दूर होगी।
सात मनोनीत और तीन निर्दलीय सदस्यों परिमल नथवानी, कार्तिकेय शर्मा और दिलीप रे को जोड़ने पर बीजेपबी साधारण बहुमत का आंकड़ा पार करके 127 तक पहुंच रही है। सहयोगियों के साथ मिलकर, यह 164 के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच जाती है। बीजेपी के सहयोगियों के पास 26 सांसद हैं। इनमें TDP, AIADMK, JDU और NCP के चार-चार सदस्य हैं, शिवसेना और UPPL के दो-दो सदस्य हैं, और RPI(A), AGP, MNF, NPP, RLM और जनसेना पार्टी का एक-एक सदस्य है। NDA की कुल संख्या 153 तक पहुंच गई है, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से सिर्फ़ 11 कम है।
एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने का बीजेपी का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है। एक और सांसद रुक्मिणी मल्लिक ने भी ईमेल के जरिए राज्यसभा चेयरमैन को अपना इस्तीफा भेज दिया है और जल्द ही वे चेयरमैन से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगी। सूत्रों का कहना है कि TMC के बाकी नौ राज्यसभा सांसदों में से दो और सांसद जल्द ही BJP में शामिल हो सकते हैं।
'अच्छे' तृणमूल नेता और 'बुरे' टीएमसी नेतापूर्व तृणमूल नेताओं का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के उन सार्वजनिक बयानों के खिलाफ है जिनमें कहा गया था कि वे टीएमसी के नेताओं को शामिल नहीं करेंगे क्योंकि उन पर भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के आरोप हैं। हालांकि, मंगलवार को राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक को पार्टी में शामिल करते हुए इसे एक 'अपवाद' बताया। समिक भट्टाचार्य ने पहले 'अच्छी TMC और बुरी TMC' की थ्योरी भी दी थी, जिसके तहत 'भालो' यानी अच्छे टीएमसी नेताओं को साथ लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
राज्यसभा का गणित
विभाजन से पहले, टीएमसी के राज्यसभा में 13 सांसद थे। किसी दूसरी पार्टी (जैसे BJP) में विलय के लिए 9 सांसदों की जरूरत होती है। चूंकि इतनी संख्या नहीं जुटाई जा सकी, इसलिए बीजेपी ने सांसदों से इस्तीफा दिलवाने और फिर उन्हें अपने चुनाव चिह्न पर दोबारा सदन भेजने की रणनीति अपनाई है। यह रणनीति तृणमूल को कमज़ोर करेगी और राज्यसभा में बीजेपी मजबूत होगी।
24 जुलाई के बाद, राज्यसभा में बीजेपी ताकत बढ़कर 117 हो जाएगी, जो अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या होगी। BJP अब अपने दम पर 123 के साधारण बहुमत से सिर्फ़ छह सीट दूर होगी।
सात मनोनीत और तीन निर्दलीय सदस्यों परिमल नथवानी, कार्तिकेय शर्मा और दिलीप रे को जोड़ने पर बीजेपबी साधारण बहुमत का आंकड़ा पार करके 127 तक पहुंच रही है। सहयोगियों के साथ मिलकर, यह 164 के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच जाती है। बीजेपी के सहयोगियों के पास 26 सांसद हैं। इनमें TDP, AIADMK, JDU और NCP के चार-चार सदस्य हैं, शिवसेना और UPPL के दो-दो सदस्य हैं, और RPI(A), AGP, MNF, NPP, RLM और जनसेना पार्टी का एक-एक सदस्य है। NDA की कुल संख्या 153 तक पहुंच गई है, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से सिर्फ़ 11 कम है।
Next Story