नई बात है उनका निडर होना, जस्टिस भुइयां और जस्टिस नरीमन के बयान पर बोले सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी
नई दिल्ली: नागरिकों के वोट देने के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के विचारों और रिटायर्ड जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की टिप्पणियों पर सीनियर एडवोकेट और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस नरीमन एक वकील, लॉ ऑफिसर और जज, तीनों ही भूमिकाओं में बहुत विद्वान व्यक्ति माने जाते हैं। जस्टिस नरीमन एक ऐसे विषय पर बोल रहे थे जिसके शीर्षक में 'आम आदमी' शब्द शामिल था। मैं उनके बयान की तारीफ करता हूं।

वहीं, जस्टिस भुइयां हमारे सबसे सम्मानित और बेबाक लोगों में से एक हैं, जो बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रखते हैं। जस्टिस भुइयां NALSAR यूनिवर्सिटी में युवाओं की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन दोनों ने वोट की अहमियत कम होने और वोट खत्म होने के बारे में बात की।
दोनों जजों की निडरता और हिम्मत नई बातसिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में आम आदमी पर इससे ज्यादा असर किस चीज का हो सकता है? दोनों जजों ने जो कहा, उसमें कुछ भी नया नहीं है। नई बात है उनका निडर होना, अपनी बात को स्पष्ट और बेबाकी से कहना। मुझे उम्मीद और भरोसा है कि भारत में सिविल सोसाइटी के ज्यादा से ज्यादा लोग - इंजीनियर, डॉक्टर, आर्किटेक्ट, वकील, गृहिणियां इस पर सोचेंगे और इसी तरह निडर होकर अपनी बात रखेंगे। मैं उनकी सोच और बात को साफ-साफ कहने की हिम्मत और निडरता का स्वागत करता हूं।
जस्टिस भुइयां ने वोट के अधिकार पर क्या कहादरअसल, जस्टिस भुइयां ने कहा कि किसी भारतीय नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित करना 'शरीर से आत्मा निकालने' जैसा होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो 'बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दे और वे बगैर वोट देने के अधिकार वाले नागरिक बन जाएं, संविधान का उल्लंघन होगी।
पूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने क्या कहापूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने कहा कि वोटर्स लिस्ट से लोगों के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाने की वजह से नागरिकों के वोट देने का अधिकार खतरे में पड़ गया है। । इसके अलावा जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
वहीं, जस्टिस भुइयां हमारे सबसे सम्मानित और बेबाक लोगों में से एक हैं, जो बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रखते हैं। जस्टिस भुइयां NALSAR यूनिवर्सिटी में युवाओं की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन दोनों ने वोट की अहमियत कम होने और वोट खत्म होने के बारे में बात की।
दोनों जजों की निडरता और हिम्मत नई बातसिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में आम आदमी पर इससे ज्यादा असर किस चीज का हो सकता है? दोनों जजों ने जो कहा, उसमें कुछ भी नया नहीं है। नई बात है उनका निडर होना, अपनी बात को स्पष्ट और बेबाकी से कहना। मुझे उम्मीद और भरोसा है कि भारत में सिविल सोसाइटी के ज्यादा से ज्यादा लोग - इंजीनियर, डॉक्टर, आर्किटेक्ट, वकील, गृहिणियां इस पर सोचेंगे और इसी तरह निडर होकर अपनी बात रखेंगे। मैं उनकी सोच और बात को साफ-साफ कहने की हिम्मत और निडरता का स्वागत करता हूं।
जस्टिस भुइयां ने वोट के अधिकार पर क्या कहादरअसल, जस्टिस भुइयां ने कहा कि किसी भारतीय नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित करना 'शरीर से आत्मा निकालने' जैसा होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो 'बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दे और वे बगैर वोट देने के अधिकार वाले नागरिक बन जाएं, संविधान का उल्लंघन होगी।
पूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने क्या कहापूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने कहा कि वोटर्स लिस्ट से लोगों के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाने की वजह से नागरिकों के वोट देने का अधिकार खतरे में पड़ गया है। । इसके अलावा जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
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