'सुप्रीम कोर्ट संविधान और लोकतंत्र को बचाएं', SIR विवाद के बीच पी चिदंबरम ने जस्टिस नरिमन-भूषण को लेकर दिया ये बड़ा बयान

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने सोमवार को SIR और वोट के अधिकार को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की उम्मीद जताई है। उन्होंने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन एफ. नरिमन और मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भूषण की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों का जिक्र किया।
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चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि लोगों को राजकोट में जस्टिस नरिमन और हैदराबाद में जस्टिस भूषण की टिप्पणियां पढ़नी चाहिए। उन्होंने अपने 22 मार्च 2026 के इंडियन एक्सप्रेस कॉलम ‘Millions of Citizen Non-voters’ का भी हवाला दिया। चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मौके पर आगे आएगा और संविधान व लोकतंत्र को बचाएगा। साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर तंज कसते हुए ‘भक्तों’ से चुप रहने की अपील की।


आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाईचिदंबरम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच लगातार विवाद चल रहा है।


जस्टिस भूषण ने क्या कहा?4 अक्टूबर को जस्टिस उज्जल भूषण ने चुनावी अधिकार से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों नागरिक अपने मताधिकार से वंचित होते हैं और उन्हें वोट देने के अधिकार के बिना ‘दूसरे दर्जे का नागरिक’ बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है। उन्होंने कहा था कि इस स्थिति को किसी भी तरह के ‘व्हाटअबाउटरी’ से सही नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, ऐसा कदम संविधान के मूल केंद्र पर चोट करता है।


जस्टिस नरिमन ने भी उठाए सवाल
  • 4 अक्टूबर को राजकोट में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन एफ. नरिमन ने भी SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 90 लाख नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र के केंद्र में है।
  • जस्टिस नरिमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है।

‘Millions of Citizen Non-voters’ में क्या लिखा था?अपने 22 मार्च के लेख में चिदंबरम ने चुनावी सूची के पुनरीक्षण से लाखों पात्र नागरिकों के वोटिंग अधिकार से बाहर होने की आशंका जताई थी। उन्होंने अडल्ट आबादी और रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या के बीच अंतर का हवाला देते हुए सवाल उठाया था कि SIR के बाद कितने पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।

इस पूरे विवाद के बीच अब चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई है कि शीर्ष अदालत संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी।