सरकार को दो-तिहाई बहुमत जुटाना क्यों कठिन? महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर वोटिंग आज
नई दिल्लीः महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयकों को गुरुवार को लोकसभा में पेश किए जाने के साथ ही नंबर गेम की राजनीति तेज हो गई है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को पेश करने से पहले वोटों का विभाजन कराया गया।
इसमें सदन में मौजूद 436 सांसदों में से 185 ने खिलाफ वोट किया। यानी 42% से अधिक सांसद शुरुआती चरण में ही सरकार के साथ नहीं दिखे। यह आंकड़ा आने वाली वोटिंग के लिहाज से सरकार के लिए चिंता का कारण बन गया है।

शाम चार बजे होगा मत विभाजन
महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक पर आज यानी शुक्रवार को चर्चा संपन्न होगी जिसके बाद इस पर मत विभाजन होगा। विधेयक पर मत विभाजन के लिए शाम चार बजे का समय निर्धारित किया गया है।
आमतौर पर लोकसभा में प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया जाता है लेकिन जब किसी निर्णय पर विवाद होता है, तो 'डिवीजन' यानी मत विभाजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में ऑटोमेटिक वोट रिकॉर्डर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसमें सांसद 'हां', 'ना' या 'अनुपस्थित' के रूप में अपना वोट दर्ज करते हैं।
सरकार की क्यों बढ़ी टेंशन?
तृणमूल के 20 सांसद भी लेंगे वोट में हिस्सा
तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों के शुक्रवार को दिल्ली पहुंचकर वोटिंग में हिस्सा लेने की संभावना है। गुरुवार को उनकी सीमित मौजूदगी रही, लेकिन पूर्ण उपस्थिति की स्थिति में विपक्ष का आकड़ा मजबूत हो सकता है। शुक्रवार की वोटिंग से पहले सभी दलों ने सांसदों को विप जारी किया।
इसमें सदन में मौजूद 436 सांसदों में से 185 ने खिलाफ वोट किया। यानी 42% से अधिक सांसद शुरुआती चरण में ही सरकार के साथ नहीं दिखे। यह आंकड़ा आने वाली वोटिंग के लिहाज से सरकार के लिए चिंता का कारण बन गया है।
शाम चार बजे होगा मत विभाजन
महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक पर आज यानी शुक्रवार को चर्चा संपन्न होगी जिसके बाद इस पर मत विभाजन होगा। विधेयक पर मत विभाजन के लिए शाम चार बजे का समय निर्धारित किया गया है।
आमतौर पर लोकसभा में प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया जाता है लेकिन जब किसी निर्णय पर विवाद होता है, तो 'डिवीजन' यानी मत विभाजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में ऑटोमेटिक वोट रिकॉर्डर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसमें सांसद 'हां', 'ना' या 'अनुपस्थित' के रूप में अपना वोट दर्ज करते हैं।
सरकार की क्यों बढ़ी टेंशन?
- संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।
- वर्तमान में सदन की प्रभावी संख्या 540 है, ऐसे में कम से कम 360 सांसदों का समर्थन अनिवार्य है।
- लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह आंकड़ा हासिल करना सरकार के लिए आसान नहीं दिख रहा। अगर विपक्ष विरोध के आंकड़े बनाए रखता है, तो सरकार की राह मुश्किल हो सकती है।
तृणमूल के 20 सांसद भी लेंगे वोट में हिस्सा
तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों के शुक्रवार को दिल्ली पहुंचकर वोटिंग में हिस्सा लेने की संभावना है। गुरुवार को उनकी सीमित मौजूदगी रही, लेकिन पूर्ण उपस्थिति की स्थिति में विपक्ष का आकड़ा मजबूत हो सकता है। शुक्रवार की वोटिंग से पहले सभी दलों ने सांसदों को विप जारी किया।
Next Story