ऐसा दिलदार दोस्त होना चाहिए!...भारत को हथियार के साथ पूरी तकनीक देगा यह देश? इसके दिए तोपों से पाकिस्तान ने टेके थे घुटने

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नई दिल्ली: भारत और स्वीडन ने अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठा लिए हैं। नई दिल्ली में आठवां भारत-स्वीडन फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशंस (FOC) का आयोजन हुआ। इस आयोजना की सह अध्यक्षता भारत आए स्वीडन के विदेश मंत्रर डैग हार्टलियस के साथ वेस्ट के विदेश सचिव सीबी जॉर्ज ने की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी। भारत का स्वीडन के साथ रक्षा संबंध बेहद मजबूत हैं। स्वीडन यूरोप में भारत का प्रमुख गेटवे है।
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विदेश मंत्रालय बोला-भारत-स्वीडन ने हर पहलू पर की चर्चा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा-दोनों देशों ने द्विपक्षीय रिश्तों के सभी आयामों पर चर्चा की और इसे और मजबूत बनाए जाने पर सहमत हुए हैं। राजनीतिक संपर्कों को बढ़ाने के अलावा कारोबार, निवेश, रक्षा-सुरक्षा, इनोवेशन, सतत विकास और लोगों के आपसी संपर्कों को बढ़ाए जाने पर बात हुई।



भारत-EU FTA ने खोली भारत-स्वीडन के संबंधों की नई राह
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्वीट कर कहा कि भारत और स्वीडन ने हाल ही हुए भारत-यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा की। इसने आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों का नया अध्याय लिखा है।
  • यह समझौता भारत और स्वीडन के कारोबार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा हितों पर भी बात की। स्वीडन के विदेश मंत्री डगलस ने इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।



आजादी के समय से ही भारत-स्वीडन में संबंध
  • स्वीडन के साथ भारत के संबंध 1947 से ही हैं, जब स्वीडन ने भारत की स्वतंत्रता को मान्यता दी। दोनों देशों ने 1949 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए।
  • भारत का स्टॉकहोम में दूतावास है, जबकि स्वीडन का नई दिल्ली में दूतावास और चेन्नई, कोलकाता और मुंबई में मानद वाणिज्य दूतावास हैं। स्वीडन में करीब 10,000 से ज्यादा भारतीय नागरिक स्वीडन में रहते हैं।
  • 1957 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू स्वीडन का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वीडन के दौरे पर जा चुके हैं। अंतरिक्ष सहयोग में इसरो के शुक्र मिशन में स्वीडन की भागीदारी और चंद्रयान-I मिशन पर पूर्व सहयोग शामिल हैं।


स्वीडन ने ऐसे हथियार दिए,जो किसी और ने नहीं दिए
  • स्वीडन से आजादी के बाद से ही भारत के आर्थिक और रक्षा संबंध रहे हैं। स्वीडन ने भारत को मुख्य रूप से कार्ल-गुस्ताफ (Carl-Gustaf) M4 रिकॉइललेस राइफल और AT4 एंटी-आर्मर वेपन जैसे अत्याधुनिक हथियार दिए हैं।
  • ये कंधे पर रखकर दागे जाने वाले सिस्टम हैं जो बंकरों और टैंकों को नष्ट कर सकते हैं। भारतीय सेना इनका इस्तेमाल 1976 से कर रही है। अब ये भारत में ही मेक इन इंडिया के तहत बन रहे हैं। साब (Saab) ने भारत को कंधे पर रखकर चलाने वाले कार्ल-गुस्ताफ M4 (Carl-Gustaf M4) हथियार दिए हैं, जो 1.5 किलोमीटर तक सटीक निशाना बना सकता है।
  • AT4 एंटी-आर्मर वेपन-यह एक हल्का, सिंगल-शॉट हथियार है, जिसे विशेष रूप से शहरी लड़ाई, बंकरों और इमारतों के भीतर से फायर करने के लिए डिजाइन किया गया है। स्वीडन के साथ भारत हथियारों के मामले में पूर्ण तकनीकी ट्रांसफर पर भी बात कर रहा है। स्वीडन ने अभी करीब 75 फीसदी तकनीकी ट्रांसफर की है।


कंधे पर रखकर दागे जाने वाले हथियार की फैक्ट्री बनाई
  • स्वीडन और भारत ने रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में सहयोग किया है, जिसमें स्वीडिश रक्षा कंपनी SAAB जैसी कई कंपनियों ने भारत के रक्षा क्षेत्र में निवेश किया है।
  • रक्षा सहयोग पर 9वां संयुक्त कार्य समूह 2023 में आयोजित किया गया था। SAAB ने हरियाणा में कार्ल-गुस्ताफ कंधे से दागे जाने वाले हथियारों के लिए एक विनिर्माण फैक्ट्री बनाई थी। 2024 में इनका निर्माण शुरू हो गया था।


बोफोर्स तोपों से ही पाकिस्तान को हराया था
  • भारत बोफोर्स तोपों (FH77B 155mm howitzer) का प्रमुख खरीदार रहा है। इन तोपों का इस्तेमाल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान हुआ था। इन तोपों को 1986 में खरीदा गया था।
  • इन तोपों के दम पर कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों में पाकिस्तानी सेना के बंकरों को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे भारत को जीत मिली।

सोर्स: भारतीय विदेश मंत्रालय और मीडिया रिपोर्ट्स