ईरान पर निराश अमेरिका ने पाकिस्तान को पेशावर में मरने के लिए छोड़ा, भारत से अचानक बढ़ी नजदीकी; समझ रहे हैं असीम मुनीर
नई दिल्लीः ईरान के मोर्चे पर नाकाम पाकिस्तान को अमेरिका ने एक साथ कई झटके दिए हैं। अमेरिका ने ऐलान किया है अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के मद्देनजर वह पाकिस्तान के पेशावर स्थित कॉन्सुलेट को बंद करेगा। अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान के लिए अफगानिस्तान तालिबान से नई चुनौती मिलने की आशंका बढ़ गई है।
संबंधों को मजबूत बनाने का संकेतदूसरा, अमेरिका ने व्यापार को लेकर भारत की तरफ हाथ बढ़ाया है। अमेरिका में भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत कई सेक्टर्स में 20.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश करने की योजना बना रही हैं। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देकर संबंधों को मजबूत बनाने का संकेत दे दिया है।

अमेरिका से मिला पाकिस्तान को झटकाअसल में, अमेरिका ने पाकिस्तान के पेशावर स्थित अपने वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से जुड़े सभी राजनयिक कामकाज इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए संभाले जाएंगे।
पाकिस्तान को अफगान से मिलेगी सुरक्षा चुनौतीपेशावर क्षेत्र लंबे समय से उग्रवाद, सीमा पार तनाव और आतंकवाद विरोधी अभियानों का केंद्र रहा है। ऐसे में इस कॉन्सुलेट का बंद होना एक अहम कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सिर्फ कूटनीतिक बदलाव ही नहीं, पेशावर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का बंद होना अफगानिस्तान से मिल रही चुनौती के लिहाज से पाकिस्तान के लिए झटका है। इससे पाकिस्तान के लिए सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। पेशावर में अमेरिका की मौजूदगी होने की वजह से पाकिस्तान को अफगानिस्तान तालिबान से सुरक्षा मिली हुई थी। अमेरिका के हटते ही तालिबान के लिए पेशावर खुला मैदान बन जाएगा। अफगानिस्तान तालिबान पेशावर को अपनी राजधानी मानते हैं, ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकवादी गुटों के एक्टिव होने की संभावना बढ़ जाएगी।
खैबर पख्तूनख्वा में नाक में दम कर देगा अफगानिस्तान
भारत की तरफ अमेरिका की नजरमाना जा रहा था कि ईरान जंग मामले में मध्यस्थ बनकर पाकिस्तान की अहमियत अमेरिका के लिए बढ़ गई थी। अमेरिका ने अहमियत भी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, और वहां के सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में डिनर कराया। लेकिन ईरान के मसले पर फेल होने के बाद अमेरिका झुकाव भारत की तरफ नजर आ रहा है।
इसका पहला संकेत खुद ट्रंप ने ही दिया। ट्रंप ने बुधवार को पीएम मोदी को बंगाल विधानसभा जीतने पर बधाई दी। दूसरा संकेत भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दे दिया। सर्जियो गोर ने X पर लिखा, भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत कई सेक्टर्स में 20.5 बिलियन डॉलर से ज़्यादा निवेश करने की योजना बना रही हैं। इसमें आज ही 12 भारतीय कंपनियों की ओर से घोषित 1.1 बिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है! ये साझेदारियां अमेरिका में जॉब्स पैदा कर रही हैं और सप्लाई चेन को और मजबूत बना रही हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मौजूदा परिदृश्य में अमेरिका भारत की तरफ हाथ बढ़ाता हुआ दिख रहा है। भारत और अमेरिका व्यापार समझौता को लेकर भी आगे बढ़ रहे हैं।
संबंधों को मजबूत बनाने का संकेतदूसरा, अमेरिका ने व्यापार को लेकर भारत की तरफ हाथ बढ़ाया है। अमेरिका में भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत कई सेक्टर्स में 20.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश करने की योजना बना रही हैं। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देकर संबंधों को मजबूत बनाने का संकेत दे दिया है।
अमेरिका से मिला पाकिस्तान को झटकाअसल में, अमेरिका ने पाकिस्तान के पेशावर स्थित अपने वाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से जुड़े सभी राजनयिक कामकाज इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए संभाले जाएंगे।
पाकिस्तान को अफगान से मिलेगी सुरक्षा चुनौतीपेशावर क्षेत्र लंबे समय से उग्रवाद, सीमा पार तनाव और आतंकवाद विरोधी अभियानों का केंद्र रहा है। ऐसे में इस कॉन्सुलेट का बंद होना एक अहम कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सिर्फ कूटनीतिक बदलाव ही नहीं, पेशावर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का बंद होना अफगानिस्तान से मिल रही चुनौती के लिहाज से पाकिस्तान के लिए झटका है। इससे पाकिस्तान के लिए सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। पेशावर में अमेरिका की मौजूदगी होने की वजह से पाकिस्तान को अफगानिस्तान तालिबान से सुरक्षा मिली हुई थी। अमेरिका के हटते ही तालिबान के लिए पेशावर खुला मैदान बन जाएगा। अफगानिस्तान तालिबान पेशावर को अपनी राजधानी मानते हैं, ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकवादी गुटों के एक्टिव होने की संभावना बढ़ जाएगी।
खैबर पख्तूनख्वा में नाक में दम कर देगा अफगानिस्तान
- खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित है और इसकी पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान के साथ लगती है।
- आबादी के लिहाज से यह पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है, जहां विशेषरूप से पश्तून (पख्तून) लोग रहते हैं।
- भले ही यह पाकिस्तान का हिस्सा है, लेकिन यहां की संस्कृति, भाषा और नस्लीय संबंध अफगानिस्तान के पश्तूनों के साथ बहुत गहरे हैं।
- पाकिस्तानी सुरक्षा बल खैबर पख्तूनख्वा में अफगानिस्तान सीमा के पास सक्रिय रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।
- अमेरिकी दूतावास की मौजूदगी की वजह से मनोवैज्ञानिक लिहाज से पाकिस्तान को सपोर्ट मिल रहा था लेकिन अमेरिका के कदम पीछे खिंचते ही पाकिस्तान के लिए चुनौतियां बढ़ जाएंगी।
भारत की तरफ अमेरिका की नजरमाना जा रहा था कि ईरान जंग मामले में मध्यस्थ बनकर पाकिस्तान की अहमियत अमेरिका के लिए बढ़ गई थी। अमेरिका ने अहमियत भी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ, और वहां के सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में डिनर कराया। लेकिन ईरान के मसले पर फेल होने के बाद अमेरिका झुकाव भारत की तरफ नजर आ रहा है।
इसका पहला संकेत खुद ट्रंप ने ही दिया। ट्रंप ने बुधवार को पीएम मोदी को बंगाल विधानसभा जीतने पर बधाई दी। दूसरा संकेत भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दे दिया। सर्जियो गोर ने X पर लिखा, भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स समेत कई सेक्टर्स में 20.5 बिलियन डॉलर से ज़्यादा निवेश करने की योजना बना रही हैं। इसमें आज ही 12 भारतीय कंपनियों की ओर से घोषित 1.1 बिलियन डॉलर का निवेश भी शामिल है! ये साझेदारियां अमेरिका में जॉब्स पैदा कर रही हैं और सप्लाई चेन को और मजबूत बना रही हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मौजूदा परिदृश्य में अमेरिका भारत की तरफ हाथ बढ़ाता हुआ दिख रहा है। भारत और अमेरिका व्यापार समझौता को लेकर भी आगे बढ़ रहे हैं।
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