नेटो क्या भारत के खिलाफ खड़ा होगा? इंस्ताबुल में 4 जुलाई को हुई एक मीटिंग पर पूर्व रॉ एजेंट ने भारत को किया अलर्ट

Newspoint
नई दिल्लीः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 6 जुलाई को तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से इंस्ताबुल में मिले। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड, डिफेंस और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट शहबाज शरीफ और एर्दोगन की इस मुलाकात को भारत के लिए आने वाले समय में खतरे के रूप में देख रहे हैं।
Hero Image


इंस्ताबुल में मिले शरीफ और एर्दोगन, भारत के लिए मतलब
लकी बिष्ट ने X पोस्ट में लिखा, 4 जुलाई 2026 को इस्तांबुल में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगान की मुलाकात को मीडिया में भले ही एक 'सामान्य सरकारी बैठक' दिखाकर कवर किया जा रहा हो। लेकिन जिस वक्त पूरा मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर है और रूस-यूक्रेन जंग जारी है, उस टाइमिंग पर 43 देशों के इस्लामी सैन्य गठबंधन के मुखौटे के पीछे से एक 'केंद्रीय धुरी' (सऊदी का पैसा, तुर्किये की टेक और पाकिस्तान की फौज) एक्टिव हो चुकी है। इस पूरे गेम का सबसे खतरनाक हिस्सा तुर्किये का नेटो ( NATO ) सदस्य होना है।