ईरान ने 'Minab168' से अमेरिका को किया टारगेट, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने BRICS से यूं साधा निशाना
नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स 2026 की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची नई दिल्ली दौरे पर हैं। वैश्विक उथल-पुथल के बीच ईरानी विदेश मंत्री का यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि ब्रिक्स और दुनियाभर के लिए एक बड़ा प्रतिकात्मक संदेश भी माना जा रहा है।
अराघची बुधवार को जिस विमान से भारत पहुंचे हैं, उसका नाम 'मिनाब 168' है। यह नाम ईरान के शहर मिनाब के उस स्कूल हमले की याद में रखा गया, जिसमें युद्ध शुरू होने के बाद 168 बच्चों की मौत हो गई थी। ईरान इस घटना को अमेरिका-इजरायल हमलों से जुड़े नागरिक नुकसान के बड़े उदाहरण के तौर पर पेश कर रहे हैं।

क्या मैसेज देना चाह रहे अब्बास अराघची?
अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से किया गया था हमला
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिनाब स्कूल पर हमला 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के दौरान हुआ था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और जांचकर्ताओं ने दावा किया कि स्कूल के पास मौजूद IRGC नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाकर किए गए हमले में स्कूल भी चपेट में आ गया। सैटेलाइट तस्वीरों, वीडियो और मिसाइल विश्लेषण के आधार पर इसे अमेरिकी टॉमहॉक जैसी क्रूज मिसाइलों से जुड़ा बताया गया।
कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि शुरुआती जांच में अमेरिकी बलों की भूमिका की आशंका जताई गई है। अमेरिका में इस मामले की जांच की जा रही है।
भारत ने किया अराघची का स्वागत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पोस्ट में तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने दिल्ली पधारे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत किया गया।
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के ऑफिशियल 'एक्स' अकाउंट से साझा जानकारी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। वे वहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, जिसकी मेजबानी इस साल के अंत में भारत करने वाला है, इसमें शामिल होने वाले अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ईरान को उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य समकक्षों से मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग और आर्थिक लचीलेपन पर चर्चा करेंगे।
अराघची बुधवार को जिस विमान से भारत पहुंचे हैं, उसका नाम 'मिनाब 168' है। यह नाम ईरान के शहर मिनाब के उस स्कूल हमले की याद में रखा गया, जिसमें युद्ध शुरू होने के बाद 168 बच्चों की मौत हो गई थी। ईरान इस घटना को अमेरिका-इजरायल हमलों से जुड़े नागरिक नुकसान के बड़े उदाहरण के तौर पर पेश कर रहे हैं।
क्या मैसेज देना चाह रहे अब्बास अराघची?
- मिनाब 168 के जरिए ईरान ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंच के जरिए संदेश देना चाह रहा है कि ईरान पीड़ित है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
- अराघची की कोशिश है कि ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ को अपने पक्ष में लाया जाए, खासकर ऐसे समय में जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
- ईरान मिनाब 168 के प्रतिकात्मक मैसेज के जरिए भारत को तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाने का संदेश भी दे सकता है।
अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से किया गया था हमला
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिनाब स्कूल पर हमला 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के दौरान हुआ था। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों और जांचकर्ताओं ने दावा किया कि स्कूल के पास मौजूद IRGC नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाकर किए गए हमले में स्कूल भी चपेट में आ गया। सैटेलाइट तस्वीरों, वीडियो और मिसाइल विश्लेषण के आधार पर इसे अमेरिकी टॉमहॉक जैसी क्रूज मिसाइलों से जुड़ा बताया गया।
कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि शुरुआती जांच में अमेरिकी बलों की भूमिका की आशंका जताई गई है। अमेरिका में इस मामले की जांच की जा रही है।
भारत ने किया अराघची का स्वागत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पोस्ट में तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने दिल्ली पधारे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत किया गया।
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार के ऑफिशियल 'एक्स' अकाउंट से साझा जानकारी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। वे वहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, जिसकी मेजबानी इस साल के अंत में भारत करने वाला है, इसमें शामिल होने वाले अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
ईरान को उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य समकक्षों से मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग और आर्थिक लचीलेपन पर चर्चा करेंगे।
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